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दिग्विजय सिंह ने PM नरेन्द्र मोदी को लिखी चिट्ठी,पूछा राम मंदिर ट्रस्ट में अपराधियों का क्या काम!
Bhopal News in Hindi

Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 24, 2020, 4:36 PM IST
दिग्विजय सिंह ने PM नरेन्द्र मोदी को लिखी चिट्ठी,पूछा राम मंदिर ट्रस्ट में अपराधियों का क्या काम!
राम मंदिर ट्रस्ट पर दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

दिग्विजय सिंह ने अपनी चिट्ठी में हवाला दिया कि आरएसएस भगवान श्री रामचंद्र जी को भगवान का अवतार नहीं मानती उन्हें मर्यादा पुरुष ही मानती है और उनका स्मारक बनाना चाहती है. सनातन धर्म में भगवान रामचंद्र भगवान के अवतार हैं. यह करोड़ों लोगों की आस्था है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह (Digvijay singh) ने राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) के संबंध में पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने ट्रस्ट के गठन और इसमें किसी प्रमाणित शंकराचार्य को शामिल ना करने पर सवाल उठाए हैं. साथ ही कहा है कि एक धार्मिक ट्रस्ट में अपराधी और सरकारी लोगों का क्या काम.

पीएम मोदी को लिखे खत में दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान रामालय ट्रस्ट का गठन किया जा चुका है. इसलिए मंदिर के लिए दोबारा ट्रस्ट बनाने का औचित्य क्या है. उन्होंने नये ट्रस्ट में किसी प्रमाणित शंकराचार्य को शामिल ना करने पर भी सवाल उठाए.
दिग्विजय सिंह के मुताबिक, वासुदेवानंद को शंकराचार्य के तौर पर शामिल किया जाना गलत है क्योंकि उन्हें कोर्ट के फैसले के बाद पद से हटाया जा चुका है.

दिग्विजय सिंह ने सुझाव दिया है कि सनातन धर्म के पांच शंकराचार्यों में से किसी एक को राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाना चाहिए था. ट्रस्ट में शामिल कुछ और नामों पर भी दिग्विजय सिंह को आपत्ति है. उनका कहना है ऐसे लोगों को ट्रस्ट में रखा गया जो बाबरी मस्जिद प्रकरण में आरोपी हैं. उन्होंने ट्रस्ट में सरकारी अधिकारियों को मनोनीत को भी गलत बताया. यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के अयोध्या में भगवान राम की भव्य मूर्ति बनाने के ऐलान पर भी दिग्विजय सिंह ने लिखा कि उनकी यह घोषणा सनातन धर्म की परंपराओं के खिलाफ है.

इन 4 नामों पर दिग्विजय सिंह को आपत्ति



1- चंपत राय- वीएचपी के प्रांतीय उपाध्यक्ष है. वीएचपी का सनातन धर्म से कोई लेना देना नहीं है. वह केवल आरएसएस का एक संगठन है.
2- अनिल मिश्रा- अयोध्या में एक होम्योपैथिक डॉक्टर हैं और आरएसएस के प्रांत कार्यवाहक हैं.
3- कामेश्वर चौपाल- बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं.
4- गोविंद देव गिरि- संघ के पुराने प्रचारक रहे हैं.

ये चिट्ठी का मजमून
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
भगवान श्री रामचंद्र जी का मंदिर अयोध्या में बने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद किसी को भी आपत्ति नहीं है. यह स्वागत योग्य है. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. नरसिम्हा राव जी ने अपने कार्यकाल में भगवान श्री रामचंद्र जी के मंदिर निर्माण के लिए रामालय ट्रस्ट का गठन किया था. इसमें केवल धर्म आचार्यों को ही रखा गया था और किसी राजनीतिक दल के व्यक्ति का मनोनयन नहीं हुआ था. उस समय जब रामालय ट्रस्ट का गठन हुआ था तब मुझे सहयोग देने के लिए कहा गया था और मुझसे जितना बना मैंने रामालय ट्रस्ट के गठन में सहयोग दिया था.

नये ट्रस्ट का क्या औचित्य
जब पूर्व में ही भगवान श्री रामचंद्रजी के मंदिर निर्माण के लिए रामालय ट्रस्ट मौजूद है तो पृथक से ट्रस्ट बनाने का कोई औचित्य नहीं है. जो नया ट्रस्ट गठित किया गया है उसमें किसी भी प्रमाणित जगतगुरु शंकराचार्य को स्थान नहीं दिया गया है. श्री वासुदेवानंद जी जिन्हें शंकराचार्य के नाम से मनोनीत किया गया है वह न्यायपालिका द्वारा पृथक किए गए हैं. उनके बारे में द्वारका और जोशीमठ के शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी स्वरूपानंद ने अपने वक्तव्य में जो कहा है वह संलग्न है. देश में सनातन धर्म के पांच शंकराचार्य के पीठ हैं. उनमें से ही ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाना उपयुक्त होता, जो नहीं हुआ.

धार्मिक ट्रस्ट में सरकारी अफसर और अपराधी!
इस ट्रस्ट में कुछ ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया है जो बाबरी मस्जिद प्रकरण में अपराधी हैं और आज भी जमानत पर हैं. बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने में सर्वोच्च न्यायालय ने जिन्हें अपराधी माना है. ऐसे लोगों को मंदिर निर्माण के लिए समिति में मनोनयन करना सर्वथा गलत है. इसी के साथ मैं रामालय ट्रस्ट और आपके द्वारा गठित ट्रस्ट में सदस्यों की सूची भेज रहा हूं. आप स्वयं देख सकते हैं तुलनात्मक दृष्टि से कौन सा न्यास धार्मिक है और कौन सा राजनैतिक है ?इसी धार्मिक ट्रस्ट में सरकारी अधिकारियों को मनोनयन भी उचित अनुचित है.

दान का हिसाब कहां है
भगवान श्री रामचंद्र का भव्य मंदिर का निर्माण हो इस आंदोलन में करोड़ों लोगों ने भाग लिया था और भारी मात्रा में चंदा दिया. इसका हिसाब आज तक जनता के सामने नहीं रखा गया. जब आयकर विभाग का नोटिस दिया गया था. उस समय नोटिस देने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो गई थी. जिन करोड़ों दानदाताओं ने मंदिर निर्माण के लिए दान दिया है, उसका 28 वर्षों का ब्याज सहित हिसाब उन्हें मिलना चाहिए.

आरएसएस रामचंद्र को भगवान नहीं माना
दिग्विजय सिंह ने अपनी चिट्ठी में हवाला दिया कि आरएसएस भगवान श्री रामचंद्र जी को भगवान का अवतार नहीं मानती उन्हें मर्यादा पुरुष ही मानती है और उनका स्मारक बनाना चाहती है. सनातन धर्म में भगवान रामचंद्र भगवान के अवतार हैं. यह करोड़ों लोगों की आस्था है.

योगी के मूर्ति लगवाने पर ऐतराज
दिग्विजय सिंह ने लिखा- उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में भगवान राम की एक भव्य मूर्ति बनाने की घोषणा की है. वह भी सनातन धर्म की परंपराओं के विपरीत है. क्योंकि जो मंदिर में दैनिक सेवा होती है वह 220 मीटर ऊंची मूर्ति की कैसे हो सकती है? उसमें चिड़िया आदि पक्षी गंदगी कर सकते हैं.अतः उस योजना पर भी पुनर्विचार करना चाहिए. भगवान श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए आपके द्वारा स्वीकृत ट्रस्ट को जिम्मेदारी ना देकर रामालय ट्रस्ट को ही जिम्मेदारी देनी चाहिए. रामालय ट्रस्ट ने मुझे अवगत कराया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए सरकार से एक भी पैसा नहीं लेंगे.आशा है आप इस पर शीघ्र निर्णय लेकर मुझे अवगत कराएंगे.

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First published: February 24, 2020, 3:49 PM IST
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