# विधानसभा चुनाव : टिकट के लिए मैराथन मंथन, लेकिन नहीं बन पा रही बात

दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, अजय सिंह कई नामों को लेकर एकमत हो चुके हैं लेकिन मालवा में कुछ सीटों को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया राज़ी नहीं हैं.

Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 11, 2018, 3:13 PM IST
# विधानसभा चुनाव : टिकट के लिए मैराथन मंथन, लेकिन नहीं बन पा रही बात
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Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 11, 2018, 3:13 PM IST
टिकिट बंटवारे के लिए दिल्ली में कांग्रेस कई दिन से मंथन कर रही है. अगले एक हफ्ते में पहली लिस्ट के ऐलान की उम्मीद है. ख़बर है कि कांग्रेस के दिग्गज प्रत्याशियों के नाम पर एक राय नहीं हो पा रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ फिर से आमने-सामने हैं. इसमें कमलनाथ को दिग्विजय और अजय सिंह का साथ मिल गया है.

कांग्रेस में कई दिन से टिकिट बंटवारे को लेकर जद्दोजहद जारी है. प्रदेश कांग्रेस के सारे दिग्गज पिछले की दिनों से लगातार उम्मीदवारों के नाम तय करने की माथापच्ची कर रहे हैं, लेकिन नाम तय नहीं हो पा रहे हैं,क्योंकि ये दिग्गज की दो फाड़ हैं.

भोपाल में कार्यकर्ता संवाद में राहुल गांधी ने प्रदेश पदाधिकारियों को ताकीद की थी कि कांग्रेस पार्टी एक होकर चुनाव लड़ेगी. लेकिन प्रदेश के ये दिग्गज चुनाव की पहली एक्साइज में ही गुत्थम-गुत्था हुए जा रहे हैं. स्क्रीनिंग कमेटी में हाल ही में 2 नए चेहरों को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया. ये दो चेहरे हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह. बताया जा रहा है दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, अजय सिंह कई नामों को लेकर एकमत हो चुके हैं लेकिन मालवा में कुछ सीटों को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया राज़ी नहीं हैं.

1- करीब 100 सीटों से ज़्यादा पर नाम फाइनल हो चुके हैं.

2- मालवा क्षेत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ नाम पर सहमत नहीं.
3- मालवा की उन सीटों पर सिंधिया अपना उम्मीदवार चाहते हैं.लेकिन कमलनाथ, अजय सिंह और दिग्विजय उन नामों पर राजी नहीं हैं.
4- पहली फेहरिस्त में मालवा की विवादित सीटों को छोड़कर करीब 80 सीटों पर नामों के ऐलान की संभावना.
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5- इस लिस्ट में लगभग 45 वर्तमान विधायकों के नाम होंगे.
6- करीब 10 नाम बीते चुनाव में हारे हुए उन उम्मीदवारों के हैं जिनकी हार का अंतर सिर्फ 1 से 2 हज़ार था.
7- पहली लिस्ट में उन सीटों के लिए भी प्रत्याशी घोषित किए जा सकते हैं, जहां पार्टी लगातार 3 या उससे ज़्यादा वक्त से हार रही है. ।

नाम तय होने में देर हो रही है. लेकिन कांग्रेस इसे गुटबाज़ी से जोड़कर नहीं देख रही है. उसका कहना है रायशुमारी में अपनी अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, इसे गुटबाज़ी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. हालांकि बीजेपी का कहना है कांग्रेस पार्टी अपने चुनाव चिह्न की तरह है. जैसे पंजे में पांच उंगलियां समान नहीं होतीं, वैसे ही कांग्रेस में 5 क्षत्रप हैं जो कभी एक नहीं हो सकते.

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