झोलाछाप डॉक्टरों को दें ट्रेनिंग, वही गांव में कर सकेंगे इलाज, जानिए कांग्रेस विधायक ने क्यों की ऐसी अजीबो-गरीब मांग

प्रदेश के कांग्रेस विधायक ने झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर सरकार से चौंकाने वाली मांग की है. (सांकेतिक तस्वीर)

प्रदेश के कांग्रेस विधायक ने झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर सरकार से चौंकाने वाली मांग की है. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश के आगर मालवा से विधायक हैं विपन वानखेड़े. इन कांग्रेस विधायक ने मांग की है कि झोलाछाप डॉक्टरों को कोरोना का इलाज करने की ट्रेनिंग दी जाए. ताकि, गांव में लोगों का इलाज समय पर हो सके.

  • Last Updated: May 14, 2021, 3:15 PM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मरीजों के बीच ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी भी सामने आ रही है. डॉक्टर न होने से ग्रामीण मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं. इस बीच आगर से कांग्रेस विधायक विपिन वानखेड़े ने झोलाछाप डॉक्टरों को कोरोना के इलाज के लिए  ट्रेनिंग देने की मांग की है. ताकि, गांव में लोगों का समय पर इलाज किया जा सके.

आगर मालवा विधायक विपिन वानखेड़े ने कहा है कि झोलाछाप डॉक्टरों को प्रतिबंधित न किया जाए, बल्कि उनका इस्तेमाल किया जाए. ये आधा-अधूरा इलाज जानते हैं, इसलिए इन्हें ट्रेनिंग देना आसान होगा. इन झोलाछाप डॉक्टरों का ट्रेनिंग के बाद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के रूप में उपयोग किया जा सकता है. वानखेड़े ने ये भी कहा कि ग्रामीणों के प्राथमिक उपचार के लिए इन लोगों को दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाएं.

स्वास्थ्य विभाग की न मानें तो करें कड़ी कार्रवाई

कांग्रेस विधायक विपिन वानखेड़े ने मांग की है कि झोलाछाप डॉक्टरों के साथ पटवारी, पंचायत सचिव व अन्य सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी भी गांव में लगानी चाहिए. सरकारी कर्मचारियों के साथ झोलाछाप डॉक्टरों की गांव में उपलब्ध होने की समय सीमा भी सुनिश्चित की जाए. वानखेड़े ने कहा कि अगर ये झोलाछाप डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन न करें तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए.
मेडिकल और नर्सिंग के फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को करेंगे तैयार

गौरतलब है कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने और कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग के थर्ड ईयर और फाइनल ईयर के छात्रों को भी जल्द फील्ड में उतारने की तैयारी कर रहा  है. थर्ड ईयर- फाइनल ईयर के छात्रों को कोरोना के इलाज में सहयोग करने से लिए पहले ट्रेनिंग दी जाएगी. मॉड्यूल के आधार पर फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देकर कोविड वार्ड में जिम्मेदारियां दी जाएगी. ये स्टूडेंट्स ग्रामीण इलाकों में भी ट्रेनिंग के बाद मरीजों का इलाज करेंगे.

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