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OPINION : कांग्रेस की कर्जमाफी घोषणा ने बदल दी चुनाव की फिज़ा? बीजेपी फिक़्रमंद!

OPINION : कांग्रेस की कर्जमाफी घोषणा ने बदल दी चुनाव की फिज़ा? बीजेपी फिक़्रमंद!

File Photo.

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मंडियों में 19 से 29 नवंबर तक अब तक की सबसे लंबी छुट्‌टी है. 30 नवंबर के बाद यहां काम शुरू होगा.

    मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को वोटिंग होनी है.  दो ख़ास घटनाएं बता रही हैं कि मध्यप्रदेश के सत्तर फीसदी किसानों को लेकर भाजपा के अंदरूनी खेमे में घबराहट है. कांग्रेस के वचन पत्र में  किसानों की कर्जमाफी की घोषणा भाजपा को भारी पड़ रही है.

    प्रदेश की मंडियों में धान आने का वक्त है. लेकिन पिछले साल की तुलना में इस साल अब तक 80 फीसदी से भी कम आवक यहां हुई है. अलग- अलग जगहों पर पिछले सात दिन से मंडियां बंद पड़ी हैं.  माना जा रहा है कि प्रदेश का किसान नई सरकार की आस  में मंडी नहीं पहुंच रहा है.  इसे एक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है कि किसान,  कांग्रेस की कर्ज़माफ़ी के इंतज़ार में है.

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    धान लेकर घर बैठा किसान

    मध्यप्रदेश में धान की फसल कम होती है. बावजूद इसके मार्कफेड के आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले साल नवंबर के आख़िरी सप्ताह  में 71 हजार मिट्रिक टन धान यहां आ गई थी. जबकि इस साल अभी तक मात्र 11 हजार मिट्रिक टन धान पहुंच पाई है. किसान धान बेचता है तो उसे मिलने वाली राशि उसके खाते में जमा होती है और सहकारी बैंक उसके खाते में जमा राशि से हिस्सा काट कर उसके कर्ज़ का भुगतान कर लेता है. लेकिन इस बार कर्ज़माफी की उम्मीद में किसान अब तक धान लेकर घऱ पर ही बैठा हुआ है..

     किसान तय करेंगे

    प्रदेश की सत्तर फीसदी आबादी खेती- किसानी से जुड़ी है. आख़िरी दौर के चुनाव विश्लेषण बता रहे हैं कि किसान और ग्रामीण इलाका इस चुनाव में निर्णायक साबित होने वाला है. मंदसौर किसान आंदोलन की आग में झुलसा ये चुनाव इस बार प्रदेश की सरकार तय करेगा. 

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    शिवराज के ऐलान

     मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए  अपनी आख़िरी चुनावी सभाओं में कांग्रेस की कर्ज़माफी की घोषणा पर खुला निशाना साधा और आनन- फानन में कुछ ऐलान भी किए हैं. उन्होंने दावा किया है कि वे अगले पांच साल में इतना  बांट देंगे कि कोई किसान कर्ज़दार नहीं रहेगा. इससे साफ महसूस हो रहा है कि मध्यप्रदेश का चुनाव किसान और कर्ज़माफी के इर्द- गिर्द टिक गया. 

    हाईकमान नहीं चाहता था कर्ज़माफ़ी

    भाजपा के अंदरूनी खेमे से जुड़े नेता बताते हैं कि शिवराज सरकार भावांतर, समर्थन मूल्य जैसी लोकप्रिय योजनाएं किसानों को दे रही है. इसके बाद कर्ज़माफी की घोषणा हमारे एजेंडे से बाहर थी. एक चर्चा ये भी है कि भाजपा हाईकमान नहीं चाहता था कि किसानों की कर्ज़माफ़ी जैसी चुनावी घोषणाएं की जाएं.

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    मंडियों में रिंग बन गई

    किसान महासंघ के नेता और प्रदेश में किसान आंदोलन की अगुवाई करने वाले शिवकुमार शर्मा कक्जाजी ने न्यूज 18 को बताया कि शिवराज सरकार की भावांतर योजना किसानों की बजाय बिचौलियों को फायदा पहुंचाने वाली रही है. मंडियों में एक रिंग बन गई है. किसान को कम दाम मिल रहे हैं और वही माल जब बाहर आता है तो आढ़तिए कमाई कर रहे हैं.  ये लोग इतने दबंग हैं कि इनसे सरकारी एजेंसी वाले भी डरते हैं. प्रदेश में हाल ही के वर्षों में किसान आत्महत्या की घटनाएं 43 फीसदी कर बढ़ी हैं. किसान अपनी धान को मंडी नहीं ले जा रहा है तो इसका सीधा कारण यही है कि वो कर्ज़माफी के इंतज़ार में है.

    गैर संस्थागत कर्ज़ ज़्यादा

    किसानों के बीच काम करने वाले सोशल एक्टिविस्ट सचिन जैन कहते हैं कि इस चुनाव को किसान ही तय करने वाला है. वो बुरे दौर में है. वो अपने जीवनयापन को लेकर संकट में है. जितना संस्थागत कर्ज़ में वो डूबा है उतना ही बड़ा आंकड़ा उसके गैर संस्थागत कर्ज़ का है. किसी भी राजनीतिक दल के पास किसानों को लेकर विजन डॉक्यूमेंट नहीं है.

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    कर्ज़माफ़ी का असर नहीं

    भाजपा किसान मोर्चा के महामंत्री विनोद सिंह जादौन कहते हैं कि कांग्रेस के कर्ज़माफ़ी ऐलान का कोई असर नहीं है. हमने गांव-गांव में चौपाल लगाकर किसानों की समस्याएं सुनी हैं और सरकार की योजनाओं का लाभ दिलवाया है.

    चुनाव के कारण बंद

    19 नवंबर से 29 नवंबर तक सबसे लंबी छुट्‌टी घोषित करने वाले विदिशा कृषि उपज मंडी के सचिव कमल बगवैया ने कहा है कि चुनाव के कारण मंडी बंद है. 30 नवंबर के बाद अब यहां उपज नीलामी होगी.मंडियों का स्टाफ चुनावी ड्यूटी पर है.

    Tags: All India Congress Committee, Assembly Elections 2018, Bank Loan, BJP, Farmer Agitation, Farmer suicide attempt, Kamal nath, Madhya Pradesh Assembly Election 2018, Shivraj singh chauhan

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