संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने खोला कमलनाथ सरकार के ख़िलाफ मोर्चा

इन संविदा कर्मचारियों ने ट्ववीटर अभियान शुरू किया है. इसमें वो लिख रहे हैं कि मुख्यमंत्रीजी मध्यप्रदेश में जिस तरह जनता को right to health का हक दे रहे है , उसी प्रकार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी right to regular होने का हक है.

Puja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 29, 2019, 9:10 AM IST
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने खोला कमलनाथ सरकार के ख़िलाफ मोर्चा
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन
Puja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 29, 2019, 9:10 AM IST
मध्य प्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी शिवराज के बाद अब कमलनाथ सरकार के लिए नई चुनौती बन गए हैं. अपनी मांगें पूरी ना होने से ख़फा इन कर्मचारियों ने अब कमलनाथ सरकार के ख़िलाफ मोर्चा खोल दिया है. इन्हीं संविदा कर्मचारियों ने शिवराज सरकार की सत्ता पलट में अहम भूमिका निभाई थी. सरकार से इनकी नाराज़गी की वजह ये है कि वचन पत्र में वादे के बाद भी सरकार उस पर अमल नहीं कर रही है.

इन संविदा कर्मचारियों ने ट्ववीटर अभियान शुरू किया है. इसमें वो लिख रहे हैं कि मुख्यमंत्रीजी, मध्यप्रदेश में जिस तरह जनता को right to health है , उसी प्रकार  संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी right to regular होने का हक है.

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने 27 जुलाई 2018 से 28 सितम्बर 2018 तक संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को 90 प्रतिशत वेतन देने की जानकारी दी थी लेकिन हक़ीक़त ये है कि कर्मचारियों को 10 महीने से वेतन नहीं मिला है. नियमित करने की मांग भी अब तक अधर में है.
क्या है मसला

-मध्य प्रदेश में 19 हज़ार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी हैं.
-नियमितिकरण की मांग को लेकर 2018 में 42 दिन तक आंदोलन चलाया था
-शिवराज सरकार के आश्वासन पर हड़ताल ख़त्म की थी.
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-शिवराज सरकार ने 5 जून 2018 की नीति में राज्य/जिला स्वास्थ्य समिति ,एनएचएम के संविदा कर्मचारियों को नियमित समकक्ष पद के 90 प्रतिशत का वेतन लागू करने ,
नियमित भर्ती में 20 प्रतिशत आरक्षण लागू करने,
नेशनल पेंशन स्कीम, ईपीएफ, 62 वर्ष के पूर्व किसी भी संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त न करने के साथ ही किसी भी संविदा कर्मचारी पर गम्भीर आरोप लगने के बाद जांच में दोषी पाए जाने पर नौकरी से निकालने की नीति बनायी थी.

ये है हक़ीक़त
-इस नीति को एनएचएम में आज तक लागू नहीं किया गया है.
-संविदा कर्मचारियों का आरोप है 1 साल बीतने के बाद भी
विधान सभा में इसी प्रश्न के जवाब पर स्वास्थ्य मंत्री ने गलत जानकारी दी.
-वचनपत्र पर आज तक कांग्रेस ने कोई काम नहीं किया है.
संविदा कर्मचारियों की मानें तो कहीं भी 51 जिलों में या एनएचएम भोपाल से पुष्टि की जा सकती कि आज तक एनएचएम कर्मचारियों का 90 प्रतिशत आदेश लागू नहीं हुआ है .19 हज़ार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने 27 से 29 जनवरी 2019 में कांग्रेस सरकार आने के बाद 3 दिन की हड़ताल भी इसी 90 प्रतिशत के लिए की थी जो अब तक पूरी ना हो सकी.
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर सरकार का ध्यान खींचना शुरू कर दिया है. इनका कहना है एनएचएम के विसंगतिपूर्ण इंक्रीमेंट आदेश के कारण 1500 कर्मचारी वार्षिक वेतन वृद्धि से वंचित हैं. बिना देर किए इंक्रीमेंट दिया जाए. डीडीसी और अन्य सपोर्ट स्टाफ को वेतन वृद्धि समेत समस्त कर्मचारी हित के लाभ दिया जाए.
-संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने कल 28 जुलाई 2019 से चरण बद्ध आंदोलन शुरू कर दिया है. प्रदेश के सभी जि़ला मुख्यालयों में बैठक और विरोध प्रदर्शन किया गया. नियमितिकरण और निष्कासित लोगों की बहाली के लिए मुख्यमंत्री के नाम पर प्रति जिला कम से कम 100 पोस्ट कार्ड अभियान भेजे जाएंगे. इसमें वचन पत्र और चुनाव पहले किए गए वचन याद दिलाए जाएंगे.

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First published: July 29, 2019, 9:05 AM IST
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