Covid-19 : Unlock में लोगों के घर से बाहर निकलने पर बढ़ रहा है कोरोना का संक्रमण

मास्क पहन कर खांसने या छींकने से उसकी फिल्टर क्षमता पर बुरा असर होता है.
मास्क पहन कर खांसने या छींकने से उसकी फिल्टर क्षमता पर बुरा असर होता है.

जब सरकार ने अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने के लिए शहर को धीरे-धीरे खोलने की शुरुआत की तो जनता की वायरस (virus) को लेकर लापरवाही और बढ़ गई.लोग न तो मास्क (mask) लगाना ज़रूरी समझ रहे हैं न ही सोशल डिस्टेंस (social distance) बनाकर चल रहे हैं

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भोपाल.कोरोना की नयी खबर हमें चिंता में डाल सकती है. अनलॉक के दौरान शहर में कोरोना (corona) का संक्रमण बढ़ रहा है. इसकी वजह लोगों का मेल-जोल और घर से बाहर निकला है. फेज 1 के दौरान अब जो पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखते .लेकिन जांच करने पर रिपोर्ट पॉजिटिव (positive) आती है. एक बात और कि कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति अपने संपर्क में आने वाले 18 लोगों के लिए कैरियर बन रहा है.

कोरोना के लक्षण नहीं, लेकिन रिपोर्ट पॉज़िटिव
मध्यप्रदेश में कोरोना पेशेंट्स के रिकवरी रेट में भले ही सुधार आया हो,लेकिन ये भी एक तथ्य है कि भोपाल में अनलॉक में कोरोना पैर पसार रहा है. लॉकडाउन से अगर अनलॉक फेज 1 की तुलना करें तो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना पॉजिटिव हुआ व्यक्ति अपने संपर्क में आने वाले 18 लोगों को संक्रमित कर रहा है. भोपाल शहर का इन्फेक्शन रेशियो अनलॉक के दौरान 4% हो गया है.खास बात ये भी कि अनलॉक फेज 1 के दौरान अब जो पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिख रहे लेकिन जांच करने पर रिपोर्ट पॉजिटिव मिल रही है.

अनलॉक 1 में हेल्थ डिपार्टमेंट ने राजधानी की मॉनिटरिंग कर एक रिपोर्ट तैयार की है.इसमें कोरोना के 22 मार्च को मिले पहले मरीज़ से लेकर अब तक 23 सौ पार पहुंचे मरीज़ों के आंकड़ों को लेकर विभाग ने मॉनिटरिंग की है.लॉकडाउन में लोग सीमा क्षेत्र में रहते थे. लेकिन अनलॉक होने पर लोगों की आवाजाही बढ़ी तो संक्रमण का दायरा बढ़ गया.स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट की केस स्टडी में ये बात सामने आई है कि 22 मार्च 2020 को भोपाल में कोरोना का पहला मरीज मिला था.धीरे-धीरे संक्रमण हेल्थ वर्कर्स और पुलिसकर्मियों को अपनी चपेट में लेता गया.इसके बाद कोरोना का कैरियर जमाती वर्ग भी बना.
रिपोर्ट में सामने आए फैक्टस


अनलॉक 1 के दौरान राजधानी में कोरोना इन्फेक्शन रेशियो 4 फीसदी हो गया.
-भोपाल में एक कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति 18 लोगों के लिए बनता है कोरोना कैरियर
-अनलॉक फेज 1 में लगभग 65 फीसदी पॉजिटिव शख्स वो हैं जो प्रथम संपर्क वाले हैं
-बढ़ते मरीज़ों की संख्या में से 80 फीसदी मरीजों को कोई लक्षण नहीं
-70 प्रतिशत पॉजिटिव मरीज की नहीं हो पा रही कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग,मरीज कॉन्टेक्ट हिस्ट्री बताने में असमर्थ
-सर्दी-खांसी और बुखार की जांच कराने वाले संदिग्धों में 2 फीसदी मरीज मिल रहे पॉजिटिव
-श्वास नली में संक्रमण वाले मरीजों की जांच कराने पर 2 फीसदी मरीज मिल रहे पॉजिटिव
-शहर के अनलॉक की शुरूआत होने के बाद से भोपाल में सबसे ज्यादा ऑफिस और परिवार के लोग संक्रमित हो रहे हैं.

जान पर हावी लापरवाही 
इन आंकड़ों को देखने के बाद आपके के मन में एक सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर चूक हुई कहां. तो आपको बता दें जब सरकार ने अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने के लिए शहर को धीरे-धीरे खोलने की शुरूआत की तो जनता की वायरस को लेकर लापरवाही और बढ़ गई.लोग ना तो मास्क लगाना ज़रूरी समझ रहे हैं न ही फिजिकल डिस्टेंस बनाकर चल रहे हैं.

मास्क और सोशल डिस्टेंस रखें
आज की तारीख में पूरे शहर में कोरोना संक्रमण ने शासन और प्रशासन के साथ राजधानी की जनता की नाक में दम कर रखी है.73 लोग जिंदगी से हाथ धो चुके हैं और ऐसे ही हालत रहे तो ना जाने कितनी जिंदगियां खतरे में पड़ जाएंगी.

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