Corona Warriors: दो बच्चियों को घर छोड़ ऐसे अपना फर्ज निभा रही हैं ये आशा कार्यकर्ता
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Corona Warriors: दो बच्चियों को घर छोड़ ऐसे अपना फर्ज निभा रही हैं ये आशा कार्यकर्ता
कोरोना के जंग में आशा कार्यकर्ता अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं. (Demo Pic)

दो छोटी बेटियों की मां रेणुका पर परिवार का भी दायित्व है. वे अपनी दोनों बच्चियों को अपनी मां के पास छोड़कर सुबह से अपने कार्य क्षेत्र में निकल जाती हैं.

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इंदौर. कोरोना (Coronavirus) का हॉटस्पॉट (Hot Spot) बने इंदौर (Indore) में कई लोग अपना फर्ज बड़ी ईमानदारी से निभा रहे हैं. ऐसी ही एक आशा कार्यकर्ता हैं रेणुका दहके, जो कोरोना संवेदनशील क्षेत्र में सतत अपनी सेवाएं दे रही हैं. रेणुका लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से निजात दिलाने में सक्रिय रूप से तैनात हैं. वे कबूतरखाना क्षेत्र, जो कि कोरोना संवेदनशील क्षेत्र है,वहां बिना रुके, बिना थके कार्य कर रही हैं.

काम मे आड़े नहीं आती मां की ममता

दो छोटी बेटियों की मां रेणुका पर परिवार का भी दायित्व है. वे अपनी दोनों बच्चियों को अपनी मां के पास छोड़कर सुबह से अपने कार्य क्षेत्र में निकल जाती हैं. कई बार शुरुआत में मां नाराज भी हुईं. उनकी मां ने कहा, बच्चियां छोटी हैं, यह काम मत करो. तब रेणुका ने अपनी मां से कहा कि मेरा एक और परिवार है और उसे भी देखभाल की जरुरत है. क्षेत्र के लोगों को हौसले और देखभाल की जरुरत है. उन्हें लगता है कि उन्हें समझाए, उनकी मदद करें. तो ऐसे में वे पीछे कैसे हट सकती हैं.



लोगों को दे रहीं समझाइश
रेणुका कहती हैं कि कुछ समय पहले तक जब वे लोगों को कोरोना से बचने की समझाइश देतीं थी तो लोग नाराज होते थे और बात नहीं मानते थे. लेकिन बाद में रेणुका ने उसी क्षेत्र के  मोहम्मद मोहसिन की मदद से लोगों तक अपनी बात पहुंचाई. सोशल डिस्टेंसिंग, बार-बार साबुन से हाथ धोना और मास्क पहनने की अपील की जिसे लोगों ने मानना शुरू कर दिया. वे बताती हैं कि कोरोना की स्क्रीनिंग सरकार मोबाइल एप के जरिए करा रही है. ऐसे में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में मोबाइल पर जानकारी डालते देख पहले लोग शंका करते थे लेकिन अब सहयोग करते हैं.

'इस खुशी को मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती'.


मरीज ठीक हो रहे हैं इससे सुकून मिलता है

रेणुका दहके कहती हैं कि मैं सीमा पर तो लड़ाई करने नहीं जा सकत. पर जब मेरी मदद से लोग समय पर अस्पताल पहुंच कर ठीक हो जाते हैं, तो सुकुन मिलता है. इस खुशी को मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती.

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