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भोपाल: स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने ही विभाग पर भरोसा नहीं! उठ रहे हैं ये सवाल
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News18Hindi
Updated: April 9, 2020, 8:57 PM IST
भोपाल: स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने ही विभाग पर भरोसा नहीं! उठ रहे हैं ये सवाल
एम्स भोपाल (फाइल फोेटो)

स्वास्थ्य आयुक्त फैज अहमद किदवई ने एम्स (AIIMS) प्रबंधन को भेजे पत्र में 11 कर्मचारियों को शिफ्ट करने की बात लिखी है. इनमे एनएचएम के आईटी कंसल्टेंट राजकुमार पांडे सहित 11 कर्मचारी को निजी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने के लिए कहा गया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है और राज्य के अब तक 19 जिले करोना की चपेट में आ चुके हैं .कोरोना के बढ़ते मरीजों की संख्या में दिनों दिन इजाफा देख अब स्वास्थ्य विभाग और सरकार सब परेशान और चिंतित हैं. राजधानी भोपाल की बात करें तो अब तक एम्स (AIIMS) के अलावा किसी भी सरकारी अस्पताल में कोरोना पोजिटिव मरीजों को इलाज के लिए नहीं भेजा गया है. जबकि हमीदिया और बीएमएचआरसी में 15 दिन पहले 800 से ज्यादा मरीजों की छुट्टी कर उन्हें खाली करा दिया गया था.

हॉस्पिटल स्टाफ इसलिए है नाराज
एम्स में शहर के पहले दो पोजिटिव मरीज पत्रकार और उनकी बेटी को छुट्टी मिल चुकी है. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अपने 11 कर्मचारियों को एम्स से चिरायु शिफ्ट करने के लिए एम्स प्रबंधन को पत्र लिखा है. इससे एम्स में कोरोना के पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर्स और स्टाफ में खासी नाराजगी है. डॉक्टर्स और स्टाफ की मानें तो उनका कहना है कि हम दिन-रात जान जोखिम में डालकर इलाज कर रहे हैं और अधिकारी डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के खिलाफ पॉजिटिव मरीज को एक जगह से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश जारी कर रहे हैं.

आइसोलेशन वार्ड और स्पेशल अस्पताल में एक भी कोरोना मरीज नहीं पहुंचा



कोरोना के संदिग्ध और पोजिटिव मरीजों के लिए आइसोलेशन और ट्रीटमेंट सेंटर बनाने के लिए हमीदिया और बीएमएचआरसी को खाली करा लिया गया. लेकिन अब तक मिले संदिग्ध मरीज जेपी अस्पताल में ही रखे जा रहे हैं और पॉजिटिव मरीजों को एम्स भेजा जा रहा है. हमीदिया अस्पताल के इमरजेंसी ब्लाक को कोरोना के लिए तैयार भी कर लिया गया. लेकिन अब तक एक भी पॉजिटिव मरीज हमीदिया और बीएमएचआरसी में नहीं भेजा गया बल्कि स्वास्थ्य अधिकारियों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती किया जाने लगा. अधिकारियों के इस रवैए को देख आज जनता भी हैरत में पड़ गई थी. क्या सरकारी स्वास्थ विभाग प्रदेश की जनता के इलाज के लिए सक्षम है क्योंकि बीमारी वीआईपी या सामान्य देख कर तो नहीं आएगी.



इन कर्मचारियों को शिफ्ट करने का हेल्थ कमिश्नर ने भेजा फरमान
स्वास्थ्य आयुक्त फैज अहमद किदवई ने एम्स प्रबंधन को भेजे पत्र में 11 कर्मचारियों को शिफ्ट करने की बात लिखी है. इनमे एनएचएम के आईटी कंसल्टेंट राजकुमार पांडे सहित 11 कर्मचारी को निजी मेडिकल कालेज में शिफ्ट करने के लिए कहा गया है. सूत्रों के माने तो दो- तीन दिन से स्वास्थ्य विभाग के अफसर एम्स से मरीजों को शिफ्ट करने का दबाव बना रहे हैं. एम्स के डॉक्टर्स ने डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन का हवाला देते हुए एक बार भर्ती हुए मरीज को कहीं भी शिफ्ट करने से मना कर दिया था. क्योंकि ऐसे में एम्बुलेंस और दोनों अस्पतालों के स्टाफ के संक्रमित होने का खतरा रहता है.

सीएम का आश्वासन
स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव पल्लवी जैन के कोरोना संक्रमित होने पर उन्हें होम क्‍वारंटाइन किया गया ना कि किसी अस्पताल में भर्ती. सोशल मीडिया पर यह बात भी खूब चली कि पल्लवी जैन को वीआईपी ट्रीटमेंट उनके घर पर दिया जा रहा है रोजाना डॉक्टरों की टीम उनके घर पर जाती है और उनका उपचार करती है. इसके साथ ही हेल्थ कॉरपोरेशन के एमडी जे विजय कुमार भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए. करुणा का संक्रमण लगने पर विजय कुमार ने खुद को एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया और ट्रीटमेंट लिया. जिसके बाद प्रदेश की जनता कई सवाल उठाने लगी. मामला जब पीएम के संज्ञान में आया तो शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर अफवाह फैलाने की चेतावनी दी. सीएम ने अपने ट्वीट में लिखा कि कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं कि प्रदेश के कोरो ना संक्रमित कुछ अधिकारियों को देखभाल में ज्यादा तवज्जो दी जा रही है और बाकी लोगों को सही इलाज नहीं दिया जा रहा है सीएम ने जनता को आश्वासन दिया कि उनके लिए प्रदेश का हर एक व्यक्ति एक समान है .हर एक नागरिक सीएम शिवराज के लिए भगवान है.

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First published: April 9, 2020, 8:57 PM IST
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