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एक साल में भोपाल में 5.5 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 1823 शिकायतों में से पुलिस निपटा पायी सिर्फ 7 केस

एक साल में भोपाल में 5.5 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 1823 शिकायतों में से पुलिस निपटा पायी सिर्फ 7 केस

cyber-fraud. बीते एक साल में भोपाल के लोगों से जालसाजों ने करीब 5.5 करोड़ ठगे हैं.

cyber-fraud. बीते एक साल में भोपाल के लोगों से जालसाजों ने करीब 5.5 करोड़ ठगे हैं.

बीते एक साल में भोपाल साइबर क्राइम पुलिस के पास 1823 शिकायतें आयीं. शहर की थाना पुलिस ने इनमें 263 एफआईआर दर्ज कीं, जबकि 1560 शिकायतों की जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई. इन शिकायतों को जिले के अलग-अलग थानों में जांच के लिए भेजा गया था. हैरत की बात है कि इतनी बड़ी संख्या में एफआईआर और शिकायत होने के बावजूद पुलिस महज सात मामलों में अब तक खुलासा कर पायी है.फाइनेंशियल फ्रॉड हमेशा लालच और अज्ञानता की वजह से होते हैं. अपराध बढ़ने का ये भी एक कारण है. बीते एक साल में भोपाल के लोगों से जालसाजों ने करीब 5.5 करोड़ ठगे हैं.

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भोपाल. मध्य प्रदेश पुलिस साइबर फ्रॉड केस सुलझाने में फिसड्डी साबित हो गई है. प्रदेश में तेजी से साइबर अपराध बढ़ रहा है एक साल में जितने मामले दर्ज किए गए उनमें पुलिस का इन्वेस्टिगेशन फेल रहा. जो शिकायतें मिलीं उनमें से पांच फीसदी मामलों को भी पुलिस नहीं सुलझा पायी है. हजारों शिकायतें फाइलों में दफन हो रही हैं जनता की गाढ़ी कमाई लौटाने में पुलिस विफल रही.

मध्यप्रदेश में साइबर अपराधी पुलिस से ज्यादा हाईटेक हो चुके हैं. पुलिस से हर बार एक कदम आगे रहने वाले साइबर अपराधी अब सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं. पुलिस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की राजधानी भोपाल में डबल डिजिट में साइबर अपराध बढ़ रहे हैं. इन अपराधों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है.

सिर्फ सात का खुलासा

बीते एक साल में भोपाल साइबर क्राइम पुलिस के पास 1823 शिकायतें आयीं. शहर की थाना पुलिस ने इनमें 263 एफआईआर दर्ज कीं, जबकि 1560 शिकायतों की जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई. इन शिकायतों को जिले के अलग-अलग थानों में जांच के लिए भेजा गया था. हैरत की बात है कि इतनी बड़ी संख्या में एफआईआर और शिकायत होने के बावजूद पुलिस महज सात मामलों में अब तक खुलासा कर पायी है.

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95 फ़ीसदी से ज्यादा मामले फाइल में बंद

भोपाल में डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस के अलावा स्टेट साइबर पुलिस का मुख्यालय भी है. अधिकांश मामले साइबर पुलिस मुख्यालय पहुंचते हैं लेकिन उन्हें थाने स्तर या फिर डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस के पास भेज दिया जाता है. ये सभी ऐसे मामले हैं, जिनमें एक लाख रुपए से कम की धोखाधड़ी हुई थी. पुलिस में दर्ज हो रहे इन साइबर अपराधों की मॉनिटरिंग पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी करते हैं. लेकिन मामलों का इन्वेस्टिगेशन हमेशा अधिकांश मामलों में फेल साबित होता है. 95 फ़ीसदी से ज्यादा मामलों का पुलिस खुलासा नहीं कर पाती है. यह शिकायतें जांच के नाम पर खानापूर्ति के बाद फाइलों में दफन हो जाती हैं.

एक साल में 5.5 करोड़ ठगे

एडिशनल डीसीपी भोपाल क्राइम ब्रांच शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि फाइनेंशियल फ्रॉड के अलावा भी सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के अपराध होते हैं. फाइनेंशियल फ्रॉड हमेशा लालच और अज्ञानता की वजह से होते हैं. अपराध बढ़ने का ये भी एक कारण है. बीते एक साल में भोपाल के लोगों से जालसाजों ने करीब 5.5 करोड़ ठगे हैं. जांच अधिकारियों का तर्क है कि साइबर क्राइम करने वाले अपराधी दूसरे राज्यों के रहते हैं. यही कारण है कि उन तक पहुंचने में पुलिस को काफी देरी हो जाती है. 95 प्रतिशत मामलों में आरोपी दूसरे राज्यों के होने का दावा किया जाता है. शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि साइबर अपराधों में फरियादी और अपराधियों की ज्योग्राफिकल सीमा की लिमिट नहीं होती. अपराधी किसी स्टेट या किसी देश में भी बैठा हो सकता है. इसकी जानकारी भी नहीं होती है जब तक जानकारियों को जुटाया जाता है तब तक बहुत देर हो जाती है. बैंकों में भी सीधे कार्रवाई नहीं की जाती. वहां से भी लोगों को पुलिस के पास भेजा जाता है.

Tags: Cyber Attack, Cyber Crime News, Cyber Fraud, Cyber security company, Cyber ​​Cell, Cyber ​​Thug

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