दमोह विधानसभा उप चुनाव: नीति आयोग की रिपोर्ट को मुद्दा बनाएगी कांग्रेस, बीजेपी ने किया पलटवार

उपचुनावों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने चुनाव जीतने के लिये एक बार फिर से परिवारवाद का कार्ड खेला है.

उपचुनावों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने चुनाव जीतने के लिये एक बार फिर से परिवारवाद का कार्ड खेला है.

दमोह विधानसभा उप चुनाव: नीति आयोग की रिपोर्ट आई है. आयोग ने दमोह जिले को पिछड़ा बताया है. इस बात कांग्रेस चुनावी मुद्दा बनाएगी. वो पूर्व वित्त मंत्री सहित पूरी भाजपा को घेरेगी.

  • Last Updated: March 27, 2021, 12:59 PM IST
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भोपाल. दमोह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी नीति आयोग की रिपोर्ट को चुनावी मुद्दा बनाएगी. पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि बीजेपी सरकार में भी नीति आयोग की रिपोर्ट में दमोह जिले को पिछड़ा बताया गया है. दमोह जिले का विकास ही कांग्रेस पार्टी चुनाव में मुद्दा बनाएगी.  कांग्रेस दमोह की जनता को बताएगी कि लंबे समय तक वित्त मंत्री के कब्जे वाली सीट कैसे पिछड़े जिलों में शामिल हो गई?

दूसरी ओर, बीजेपी ने कांग्रेस के इस प्लान पर पलटवार किया है. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री प्रभु राम चौधरी ने कहा है कि शिवराज सरकार में बीते 1 साल में दमोह के विकास को लेकर कई बड़े फैसले हुए हैं. दमोह मेडिकल कॉलेज मंजूर किया गया है. साथ ही कॉलेज के लिए सरकार ने बजट में राशि का प्रावधान भी कर दिया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दमोह जिले के विकास को लेकर करोड़ों रुपए की सौगात दी है. आने वाले दिनों में दमोह का पिछड़ापन दूर हो जाएगा.

नीति आयोग की रिपोर्ट में दमोह आकर्षित जिला, न कि पिछड़ा- बीजेपी

बीजेपी के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा है कि केंद्रीय नीति आयोग की रिपोर्ट में दमोह को आकर्षित जिलों में शामिल किया गया था न कि पिछड़े जिलों में. केंद्र से मिलने वाली राशि के तहत दमोह का विकास तेजी के साथ हो रहा है. ऐसे में कांग्रेस के पास उपचुनाव में कोई मुद्दा नहीं है. इसलिए जनता को गुमराह करने के लिए बेवजह के मुद्दों उठाने की कोशिश हो रही है. कांग्रेस ने सत्ता में 15 महीने रहने पर दमोह के विकास को लेकर कोई फैसला नहीं किए.
ये कहती है नीति आयोग की रिपोर्ट

दरअसल नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश के 8 जिलों को पिछड़ा जिला बताया था. इसमें सिंगरौली, बड़वानी, गुना, विदिशा, खंडवा, छतरपुर, दमोह और राजगढ़ शामिल हैं. केंद्र नीति आयोग की रिपोर्ट में दमोह क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या रोजगार और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की हालत ठीक नहीं होना पाया गया था. यही कारण है कि केंद्र और राज्य सरकार अब पिछड़े जिलों में हालात सुधारने के लिए कई बड़े फैसले ले रही है.
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