दमोह उपचुनाव : कौन हैं राहुल लोधी जिन्होंने दलबदल कर बीजेपी के इस दिग्गज का कटवा दिया टिकट

राहुल लोधी 2018 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे. फिर 2020 में दलबदल लिया

राहुल लोधी 2018 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे. फिर 2020 में दलबदल लिया

Bhopal. राहुल लोधी (Rahul Lodhi) ने कहा था कांग्रेस ने ही उन्हें राजनीतिक रूप से सक्षम बनाया है. इसलिए वह हमेशा कांग्रेस के साथ रहेंगे. परिस्थितियां कैसी भी आ जाएं, वह कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ेंगे.

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भोपाल. दमोह विधानसभा सीट (Damoh Assembly by election) के लिए आज हो रहे मतदान में इस बार मुकाबला बहुत दिलचस्प है. यहां बीजेपी ने अपने दिग्गज नेता जयंत मलैया को दरकिनार कर दलबदल कर आए नौजवान राहुल लोधी को उतारा है. राहुल लोधी ने ही 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर बीजेपी के इस दिग्गज नेता जयंत मलैया को हराया था. उससे पहले मलैया इस सीट से लगातार 7 बार विधायक रह चुके थे.

दमोह विधान सभा सीट पर उप चुनाव दरअसल दलबदल का परिणाम है. मध्य प्रदेश में पिछले साल हुए महा दलबदल अभियान के दौरान राहुल सिंह लोधी कांग्रेस का हाथ छोड़ कर बीजेपी में आए हैं. उन्होंने हवा का रुख देखकर पाला बदला और बीजेपी के साथ हो लिए. बीजेपी ने अपना वादा निभाया और लोधी को टिकट दे दिया.

कौन हैं राहुल लोधी

राहुल सिंह लोधी 2018 के विधानसभा चुनाव में पहली बार दमोह विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. उन्होंने उस चुनाव में दमोह की पहचान बन चुके और इस सीट से 7 बार से लगातार चुनाव जीत चुके बीजेपी के कद्दावर नेता और तत्कालीन वित्तमंत्री जयंत मलैया को शिकस्त दी थी. हालांकि दोनों के बीच जीत का अंतर महज 798 वोटों का था.
15 महीने में ही छोड़ी कांग्रेस

2018 में सत्ता में आयी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार सिंधिया के दलबदल के कारण महज़15 महीने में ही गिर गयी थी. जब सिंधिया के नेतृत्व में महा दलबदल हुआ उसके कुछ समय बाद राहुल लोधी भी बीजेपी के साथ हो लिये. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल को बीजेपी की सदस्यता दिलाई थी.इस तरह दमोह सीट खाली हो गयी थी.

राहुल लोधी को मिली थी बड़ी जिम्मेदारी...



पूर्व विधायक राहुल सिंह लोधी को दल बदलने का इनाम मिला और शिवराज सरकार ने उन्हें वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन का चेयरमैन बना दिया. और फिर दमोह विधानसभा सीट उप चुनाव का ऐलान होते ही पार्टी ने लोधी को अपना प्रत्याशी बना दिया.

कांग्रेस नहीं छोड़ने का था वादा...

राहुल सिंह लोधी बड़ामलहरा से भाजपा विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी के चचेरे भाई हैं. प्रद्युम्न भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे. तब राहुल ने कहा था कि कांग्रेस ने ही उन्हें राजनीतिक रूप से सक्षम बनाया है. इसलिए वह हमेशा कांग्रेस के साथ रहेंगे. परिस्थितियां कैसी भी आ जाएं, वह कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ेंगे.



दल बदलने के बाद...

लेकिन राहुल कांग्रेस के न हो सके. पार्टी से इस्तीफा देने की उन्होंने भी कई वजह बतायीं. वो बोले क्षेत्र के विकास और दमोह में मेडिकल कॉलेज लाने के लिए कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ली है. उन्होंने यह भी कहा था कि क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से चर्चा की और उनसे दमोह में मेडिकल कॉलेज लाने और दमोह को विशेष जिले का दर्जा देने की मांग रखी थी, जिसे शिवराज सिंह ने स्वीकार कर लिया.
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