दमोह उपचुनाव: जब अचानक चर्चा में आ गए थे BJP प्रत्याशी, जानिए कौन हैं राहुल लोधी?

बीजेपी के नए नेता राहुल सिंह लोधी ने विस पद से इस्तीफा देकर सुर्खियां बटोरी थीं. (फाइल)

बीजेपी के नए नेता राहुल सिंह लोधी ने विस पद से इस्तीफा देकर सुर्खियां बटोरी थीं. (फाइल)

दमोह उपचुनाव: बीजेपी के प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी अचानक चर्चा में आ गए थे, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस से अचानक इस्तीफा दे दिया था. जब वह जीते थे तब उन्होंने कमलनाथ का साथ नहीं छोड़ने की बात कही थी.

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भोपाल. दमोह उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी इन दिनों सुर्खियों में हैं. कांग्रेस का दामन छोड़ कर बीजेपी में आए राहुल को तीखी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था. उन्होंने 15 महीने में ही पाला बदल लिया था. कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने बीजेपी के दिग्गज नेता जयंत मलैया को हराया था. इस जीत ने उन्हें कई नेताओं से मीलों आगे कर दिया.

राहुल सिंह लोधी 2018 के विधानसभा चुनाव में पहली बार दमोह विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. उन्होंने शुरुआत में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का हाथ थामा था और 7 बार से लगातार चुनाव जीत रहे बीजेपी के कद्दावर नेता और तत्कालीन वित्तमंत्री जयंत मलैया को शिकस्त दी थी. दोनों के बीच जीत का अंतर महज 798 वोटों का था.

15 महीने में ही छोड़ी कांग्रेस

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही अजीबो-गरीब स्थिति बन गई थी. महज 15 महीने में ही कांग्रेस की सरकार गिर गई थी. प्रदेश में हो रही राजनीतिक उठा-पटक के बीच उपचुनाव के दौरान राहुल सिंह लोधी विधायक पद से अचानक इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए थे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल को बीजेपी की सदस्यता दिलाई थी.
राहुल लोधी को मिली थी बड़ी जिम्मेदारी

पूर्व विधायक राहुल सिंह लोधी को हाल ही में बड़ी जिम्मेदारी दी गयी थी. शिवराज सरकार ने उन्हें वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन का चेयरमैन बनाया है. इसके बाद अब दमोह विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी की तरफ से प्रत्याशी बनाया गया.

कांग्रेस नहीं छोड़ने से किया था वादा



राहुल सिंह लोधी बड़ामलहरा से भाजपा विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी के चचेरे भाई हैं. प्रद्युम्न भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे. तब राहुल ने कहा था कि कांग्रेस ने ही उन्हें राजनीतिक रूप से सक्षम बनाया है. इसलिए वह हमेशा कांग्रेस के साथ रहेंगे. परिस्थितियां कैसी भी आ जाएं, वह कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ेंगे.

कांग्रेस छोड़ने की यह थी वजह

विधायक पद से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने पर राहुल सिंह ने स्पष्टीकरण भी दिया था. उन्होंने कहा था कि क्षेत्र के विकास और दमोह में मेडिकल कॉलेज लाने के लिए कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ली है. कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में उन्होंने अनेक बार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से मेडिकल कॉलेज के लिए आग्रह किया था. क्योंकि, उन्होंने जनता से दमोह में मेडिकल कॉलेज खुलवाने का वादा किया था.

कमलनाथ ने उनकी बात को कई बार नजरअंदाज किया, जिसे लेकर वह जनता के सामने खुद को छला हुआ महसूस कर रहे थे. इसके अलावा क्षेत्र के सभी विकास कार्य भी रुक गए थे. उन्होंने यह भी कहा था कि क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से चर्चा की और उनसे दमोह में मेडिकल कॉलेज लाने और दमोह को विशेष जिले का दर्जा देने की मांग रखी थी, जिसे शिवराज सिंह ने स्वीकार कर लिया.
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