दमोह उपचुनाव: हारे हुए पुराने साथी पर कांग्रेस ने क्यों किया भरोसा, आखिर कौन हैं अजय टंडन?

अजय टंडन पहले भी भाजपा के दिग्गज नेता को चुनौती दे चुके हैं. (फाइल)

अजय टंडन पहले भी भाजपा के दिग्गज नेता को चुनौती दे चुके हैं. (फाइल)

दमोह उपचुनाव: दमोह उपचुनाव में कांग्रेस ने अपने पुराने हारे हुए साथी अजय टंडन पर भरोसा जताया है. टंडन पर तीसरी बार भरोसा जताया गया है. वे पहले भी पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया को चुनौती दे चुके हैं.

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भोपाल. दमोह उपचुनाव में कांग्रेस ने  अजय टंडन को अपना प्रत्याशी बनाया. अजय कांग्रेस के पुराने साथी हैं. राहुल लोधी के पार्टी छोड़ने के बाद पार्टी ने अपने पुराने साथी पर भरोसा जताया. अजय टंडन पर पार्टी ने तीसरी बार भरोसा जताया है.

पूर्व के विधानसभा चुनावों में भी टंडन दो बार पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया से मुकाबला कर चुके हैं. हालांकि, टंडन की जीत हासिल नहीं हुई. बता दें, अजय टंडन दमोह जिला कांग्रेस की कमान लगातार संभाले हुए हैं. जिला अध्यक्ष होने के नाते उनका क्षेत्र में अच्छा खासा होल्ड है.

पार्टी के पक्ष में टंडन ने बनाया माहौल

बताया जाता है कि दमोह उपचुनाव कांग्रेस-बीजेपी का नहीं, बल्कि राहुल-अजय का है. यहां के स्थानीय निवासी प्रत्याशी देखकर वोट देंगे. दमोह सीट पर अपना कब्जा बरकरार करने के लिए अजय ने माइक्रोमैनेजमेंट प्लान तैयार किया. टंडन ने कांग्रेस के संगठन पदाधिकारियों के साथ मिलकर दमोह में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया.
महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं की टीम तैनात की

टंडन के कहने पर एमपी महिला कांग्रेस ने हर वार्ड में 10 महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं की टीम तैनात की. ये कार्यकर्ता आपके द्वार कार्यक्रम के जरिए महिलाओं को बढ़ती महंगाई के प्रति जागरुक करती रहीं और कमलनाथ सरकार की उपलब्धियां गिनाती रहीं.

2018 के चुनाव में दिखाया था दम



टंडन ने 2018 के चुनाव में भी पार्टी के लिए जबरदस्त काम किया था. कांग्रेस की रणनीति से 2018 में बीजेपी प्रत्याशी जयंत मलैया हार गए थे. लेकिन  यह हार बड़े ही कम अंतर से थी. पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया को 2018 के विधानसभा चुनाव में 78199 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के राहुल सिंह लोधी को 78997 वोट मिले थे. वहीं 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से जयंत मलैया को जीत मिली थी लेकिन यह जीत महज 5000 वोट से ही मिली थी. इसी तरह 2008 के विधानसभा चुनाव में भी जयंत मलैया मात्र 130 वोटों से ही जीते थे. इस चुनाव में हार जीत में सिर्फ 0.1 फ़ीसदी वोटों का ही अंतर रहा.
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