मार्मिकः मां के धुआं बनकर उड़ जाने के बाद बेटी ने लिखी भावुक करने देने वाली कविता, आप भी पढ़ें

भोपाल में कोरोना की भयावहता को दिखाती एक तस्वीर वायरल हुई थी.

भोपाल में कोरोना की भयावहता को दिखाती एक तस्वीर वायरल हुई थी.

भोपाल में कुछ दिनों पहले कोरोना की भयावहता दिखाती एक तस्वीर वायरल हुई थी, इसमें श्मशान में जलती चिताओं से उठ रहे धुंये की एक लंबी लकीर दिख रही है. जिसे अपनी मां का अंतिम संस्कार करने पहुंची बेटी ने रिक्वेस्ट करके फोटोग्राफर से खिंचवाई थी. अब बेटी ने मां को कविता के जरिये याद किया है.

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  • Last Updated: April 21, 2021, 10:28 PM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश के भोपाल में कुछ दिनों पहले कोरोना की भयावहता दिखाती एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें कोविड से पीड़ित अपनी मां को खो चुकी एक बेटी श्मशान पहुंचे फोटोग्राफर संजीव गुप्ता से लगभग चीखते हुए कहती है कि भैया ओ भैया, वो मेरी मां का फोटो निकालो देखो वो उस धुयें के बीच में बैठकर जा रहीं हैं. आप जल्दी उनकी फोटो उतारो जल्दी करो, नहीं तो वो दूर हो जायेंगी. उसी बेटी दिव्या ने मां को खोने का दर्द शब्दों में उतारा है. उन्होंने एक कविता लिखी है, जिसे मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश राजपूत ने शेयर किया है. बेटी लिखती है कि परलोक जाकर भी मुझ पर एक अहसान करना कि हर जन्म में तुम ही मेरी मां बनना.

कोरोना की विभीषिका को अपने कैमरे की नजर से देख रहे फोटोग्राफर संजीव के लिये ये अचानक आयी चुनौती थी. संजीव ने विद्युत शवदाह गृह से निकल रहे धुएं की लंबी लकीर की फोटो तो ली ही साथ मे शोक में डूबे एक दूसरे का हाथ थामे खड़े पति-पत्नी दीपक और दिव्या की फोटो भी खींच ली. दीपक और दिव्या की जिंदगी दो दिन में ही उजड़ गयी. कोतमा में रहने वाले डॉक्टर दीपक की शादी दिव्या से हुयी थी जो खंडवा की रहने वाली थीं.

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भोपाल में श्मशान की ये तस्वीर वायरल हुई थी.


खंडवा में दिव्या के पिता रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर जेके जैन हैं, पत्नी मीना के साथ रहते हैं. अचानक जेके जैन और उनकी पत्नी मीना की तबीयत बिगड़ती है. दोनों को भोपाल लाकर हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अपने माता-पिता को देखने दिव्या अपने पति दीपक के साथ कोतमा से अपने दो बच्चों को लेकर भोपाल आते हैं। जैन की तबियत और बिगड़ती है, उनको वेंटिलेटर पर रखा गया था. मगर सुबह भर्ती करायी गयी मीना कोविड का इलाज शुरू होते ही शाम तक हार्ट अटैक के कारण दम तोड़ देती हैं.
कविता के जरिये जताया दुख

तेरा सफर इतना ही था

अब लो वो तो अपने घर चली



मेरी सिसकियाँ तुझे बुला रहीं..

लो वो कह के विदा चली...

देखते ही देखते वो..

देखो धुआँ बन कर उड़ चली...

मै जब भी देखूं आसमां..

दिखती मुझे है मेरी माँ

याद आते हैं वो बचपन के

हर एक पल मुझको माँ

अनगिनत अहसान मुझ पर

करके तू यूं कहां चली

देखते ही देखते... उड़ चली

ये कोरोना काल है

तुझको तो माँ मालूम था

वंदना करने की तीन

दिल में ये अरमान था..

अब करुँगी देवो के संग

कह के दो ही कर चली

देखते ही देखते.. उड़ चली.

माँ हमारा ये प्रणाम

आखिरी स्वीकर कर..

परलोक जाकर भी

मुझ पर एक और अहसान कर

हर जन्म मेरी तू मां हो

मेरी अरज स्वीकर कर..

हाथ रख कर सर में मेरे

अलविदा वो कर चली

देखते ही देखते वो..

देखो धुआँ बन कर उड़ चली...

आपकी बेटी

चिंकी उर्फ दिव्या
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