राहुल गांधी के करीबी नेता का छलका दर्द, बोले-मैंने कभी किसी से एक कप चाय नहीं पी
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राहुल गांधी के करीबी नेता का छलका दर्द, बोले-मैंने कभी किसी से एक कप चाय नहीं पी
दीपक बावरिया

प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है तो इसमें दीपक बावरिया का भी बड़ा रोल है. लेकिन राहुल गांधी के करीबी नेता का दर्द बताता है कि जल्द ही उनकी सूबे से विदाई हो सकती है.

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस का वनवास ख़त्म करने के लिए राहुल गांधी ने अपने करीबी दीपक बावरिया को प्रदेश प्रभारी बनाकर भेजा था.लेकिन बावरिया अपने बयानों और फैसलों को लेकर सुर्खियों में रहे.आलम ये रहा कि कि बावरिया को कहीं कार्यकर्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ा तो कई बार अपने फैसलों को वापिस भी लेना पड़ा.लेकिन बावरिया पर लगे ताजा आरोपों से अब पार्टी में हड़कंप है.

हाल ही में विदिशा से कांग्रेस विधायक शशांक भार्गव ने दीपक बावरिया पर कांग्रेस नेताओं में फूट डालने का आरोप लगाया. बावरिया अपने ऊपर लगे नये आरोप से परेशान हो उठे. भोपाल में उन्होंने एक आयोजन में अपना दर्द बयां कर दिया. वो भावुक हो गए और बोले- प्रदेश से विदाई के लिए सिर्फ राहुल गांधी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.

दीपक बावरिया के सुर्खियों में रहे बयान



- साठ पार वाले नेताओं को टिकट नहीं देने का बयान बाद में यू टर्न



-दो बार लगातार चुनाव हारने वाले नेताओं को पार्टी टिकट नहीं देगी विवाद के बाद फैसला पलटा
-टिकट के दावेदारों से पचास हजार रुपए जमा कराना. शिकायत हुई तो बावरिया बैकफुट पर आ गए
-विंध्य में पार्टी नेताओं के विरोध का सामना
-विंध्य में बावरिया के साथ मारपीट
-पीसीसी में भी बावरिया के खिलाफ नारेबाज़ी
-विधानसभा चुनाव में टिकट बेचने का आरोप. बाद में आरोप लगाने वाले प्रत्याशी ने बयान बदल लिया.
-विधानसभा चुनाव के बाद भी ये विवाद खत्म नहीं हुए हैं. बावरिया ने विधानसभा चुनाव हारने वालों को लोकसभा का टिकट नहीं देने का बयान देकर नयी मुसीबत मोल ले ली. हालांकि बवाल मचने के बाद बावरिया ने अपना बयान बदल लिया.

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लेकिन इस बार विदिशा विधायक शशांक भार्गव के आरोप और फिर टिकट बेचने और कुछ सीट हरवाने के आरोप पर सफाई बावरिया विचलित हो गए. उनका दर्द शब्दों में छलक उठा. वो बोले-मैंने कभी पद के लिए कोई काम नही किया. मैंने कभी किसी की एक चाय नही पी. अगर किसी को परेशानी है तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं. राहुल गांधी के आदेश पर एमपी आया था, मेरा कोई स्वार्थ नहीं अब मैं यहां नहीं रहना चाहता. बस राहुल गांधी के निर्देश का इंतज़ार कर रहा हूं. बावरिया का ये बयान आते ही उनके साथ पार्टी के कई नेता आ खड़े हुए.

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प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है तो इसमें दीपक बावरिया का भी बड़ा रोल है. लेकिन राहुल गांधी के करीबी नेता का दर्द बताता है कि जल्द ही उनकी सूबे से विदाई हो सकती है.
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