नहीं बदलेगा अंग्रेजों के जमाने का पदनाम 'कलेक्टर', कमलनाथ सरकार की कवायद पर CM शिवराज ने लगाई रोक
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नहीं बदलेगा अंग्रेजों के जमाने का पदनाम 'कलेक्टर', कमलनाथ सरकार की कवायद पर CM शिवराज ने लगाई रोक
कमलनाथ सरकार ने साल 2018 में कलेक्टर पदनाम को बदलने के लिए पहल की थी. इस पर अब शिवराज सरकार ने रोक लगा दी है. (फाइल फोटो)

पिछली कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) की कलेक्टर (Collector) पदनाम बदलने की कवायद पर शिवराज सरकार (Shivaraj Government) ने रोक लगा दी है. इसके लिए गठित समिति को भी निरस्त कर दिया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में साल 2018 में सत्ता संभालते ही तत्कालीन सीएम कमलनाथ (Kamalnath) ने कलेक्टर (Collector) का पदनाम बदलने का ऐलान किया था. कमलनाथ ने कहा था कि अंग्रेजों के समय के इस नाम को बदलकर जिला प्रशासक यानी डिस्टिक एडमिनिस्ट्रेटर किया जा सकता है. इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पांच आईएएस अफसरों की एक समिति का भी गठन किया था. फरवरी 2020 में गठित समिति को इस बात की जिम्मेदारी दी गई थी कि वह कलेक्टर का पदनाम बदलने का सुझाव राज्य सरकार को देगी.

आईसीपी केशरी की अध्यक्षता में गठित हुई थी समिति 

सीनियर आईएएस अधिकारी आईसीपी केशरी की अध्यक्षता में गठित समिति में पांच आईएएस अफसरों को शामिल किया गया था. समिति के जिम्मे यह था कि वह बैठक कर राज्य सरकार को कलेक्टर का पदनाम बदलने के सुझाव देगी. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर गठित आईएएस अफसरों की कमेटी में आईसीपी केशरी के अलावा मलय श्रीवास्तव, मनीष रस्तोगी, विशेष गढ़पाले, प्रीति मैथिल को शामिल किया गया था.



शिवराज सरकार ने समिति को किया निरस्त
लेकिन पिछली सरकार के कलेक्टर का पदनाम बदलने की कवायद को प्रदेश की मौजूदा शिवराज सरकार ने झटका दिया है. शिवराज सरकार ने समिति के गठन को निरस्त करने का आदेश दे दिया है. इसके तहत अब यह पूरी कवायद पर रोक लग गई है.

पिछली सरकार की ये थी दलील 

दरअसल उस समय कमलनाथ सरकार में ये कहा गया था कि कलेक्टर का नाम बदलकर प्रशासक या कुछ और रखा जा सकता है. कलेक्टर नाम अंग्रेजों के लिए जो कलेक्ट करने का काम करते थे, उन्हें कलेक्टर कहा जाता था. और अभी तक यह नाम चलन में है. अब इस पद को धारण करने वाले व्यक्ति का काम भी अलग है. इसलिए जिला अध्यक्ष का नाम कलेक्टर बदलना जरूरी है और इसी मंशा के साथ कमलनाथ ने आईएएस अफसरों की कमेटी गठित कर पूरे मामले में पहल शुरू की थी. लेकिन अब प्रदेश की बीजेपी सरकार ने पूर्व की कांग्रेस सरकार की कवायद पर विराम लगाने का फैसला किया है.
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