एक तरफ कांग्रेस के 'चाणक्य' मैदान में तो दूसरी तरफ 'मामा' मैदान से दूर!

डेढ़ दशक ने प्रदेश में बीजेपी की ध्वज पताका लिए शिवराज सिंह चौहान भले ही प्रमुख चेहरा बने रहे हों लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनकी भी निगाह लोकसभा चुनाव पर ही थी

News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 10:10 PM IST
एक तरफ कांग्रेस के 'चाणक्य' मैदान में तो दूसरी तरफ 'मामा' मैदान से दूर!
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Updated: April 17, 2019, 10:10 PM IST
पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान दिग्गज कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मैदान में थे. दोनों मिलकर कांग्रेस की तरफ से मोर्चा संभाले हुए थे. तब सिर्फ कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले दिग्विजय सिंह किस भूमिका में हैं और आगे किसा भूमिका में होंगे. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मैदान मारा, कमलनाथ मुख्यमंत्री बने तब जाकर तस्वीर साफ़ हुई कि आखिर दिग्विजय ने क्या दांव खेला.

दरअसल, नर्मदा यात्रा से वापस लौटे दिग्विजय ने विधानसभा चुनाव से तुरंत पहले ही मीडिया से बात करते हुए कह दिया कि मैं उंगली की गिनती पर बता दूंगा कि प्रत्येक विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कौन सा प्रत्याशी जिताऊ है. कहा भी जाता है कि विधानसभा चुनाव के दौरान दिग्विजय सिंह की परदे के पीछे प्रमुख भूमिका रही. यह दिखा भी जब कमलनाथ मंत्रियों की पहली बैठक कांग्रेस दफ्तर में ले रहे थे तो उनके बगल वाली सीट पर दिग्विजय ही थे.



लोकसभा चुनाव के लिए कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह की भूमिका के लिए मानो पहले ही सोच लिया था और उन्हें बीजेपी का गढ़ फतह करने के लिए भोपाल सीट से उतार दिया. उधर बीजेपी भोपाल सीट पर दिग्विजय का नाम आ जाने के बाद प्रत्याशी चयन में देर कर रही थी. कभी शिवराज का नाम, कभी कैलाश या उमा भारती का नाम चर्चा में आता रहा लेकिन इन तीनों ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया.

पिछले करीब डेढ़ दशक ने प्रदेश में बीजेपी की ध्वज पताका लिए शिवराज सिंह चौहान भले ही प्रमुख चेहरा बने रहे हों लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनकी भी निगाह लोकसभा चुनाव पर ही थी. उन्होंने बताया कि पार्टी जो भी कहेगी उस भूमिका के लिए तैयार हैं. पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया. एमपी की भोपाल और विदिशा लोकसभा सीट पर उनके नाम की चर्चा रही लेकिन वे मना करते रहे.

अब जबकि तस्वीर साफ़ हो गई है कि भोपाल से लड़ाई दिग्विजय बनाम साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की होगी तो यह कह सकते हैं कि कांग्रेस के चाणक्य मैदान में ना होने के बाद भी मैदान में आ गए हैं और मामा के नाम से मशहूर शिवराज सिंह चौहान मैदान में रहने के बावजूद मैदान से दूर हैं.

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