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ANALYSIS: रायशुमारी से चुना जाएगा मध्य प्रदेश BJP का नया अध्यक्ष, पार्टी ने राम माधव को सौंपी ज़िम्मेदारी

News18 Madhya Pradesh
Updated: December 11, 2019, 8:35 PM IST
ANALYSIS: रायशुमारी से चुना जाएगा मध्य प्रदेश BJP का नया अध्यक्ष, पार्टी ने राम माधव को सौंपी ज़िम्मेदारी
पार्टी ने प्रदेश बीजेपी का नया मुखिया चुनने की ज़िम्मेदारी राम माधव को सौंपी है (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश बीजेपी (Madhya Pradesh BJP) के नए अध्यक्ष की नियुक्ति पिछले कुछ दिनों से लगातार टल रही है. दरअसल पार्टी रायशुमारी से ये नियुक्ति करना चाहती है. बीजेपी ने इसका ज़िम्मा राम माधव (Ram Madhav) को सौंपा है. राम माधव के बीच में आने से मामला और रोचक हो गया है.

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दिनेश गुप्ता
भोपाल. भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश भाजपा का नेतृत्व ऐसे हाथों में सौंपना चाहता है, जो सर्व स्वीकार्य और सभी को साथ लेकर चलने में माहिर हो, ऐसे चेहरे की तलाश की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को सौंपी गई है. राम माधव पार्टी के कोर ग्रुप के सदस्यों से पहले दौर की रायशुमारी कर चुके हैं. पार्टी का एक धड़ा मौजूदा अध्यक्ष राकेश सिंह (Rakesh Singh) के स्थान पर नए चेहरे को जिम्मेदारी देने की वकालत कर रहा है.

रायशुमारी कर बनाए गए हैं मंडल और जिला अध्यक्ष
मध्य प्रदेश में मंडल से लेकर जिला स्तर तक अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया पिछले सप्ताह ही समाप्त हो चुकी है. दिसंबर के पहले सप्ताह में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो जानी चाहिए थी, लेकिन मामला लगातार टलता जा रहा है. शिवराज सिंह चौहान प्रदेश भाजपा की राजनीति में बड़ा नाम हैं. वे अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार भी माने जाते हैं. हालांकि चौहान अपनी दावेदारी से इनकार कर रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'ये काल्पनिक प्रश्न है, मैं दूर-दूर तक दौड़ में नहीं हूं.'

पूर्व मुख्यमंत्री खुद को भले ही दौड़ से बाहर बता रहे हों, लेकिन वे पार्टी पर अपनी पकड़ को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने देना चाहते. शिवराज सिंह चौहान जब से राज्य के मुख्यमंत्री बने थे, संगठन पर भी उन्होंने अपनी पकड़ बरकरार रखी है. विधानसभा के दो चुनावों में पार्टी का नेतृत्व नरेन्द्र सिंह तोमर ने किया. तोमर पूर्व मुख्यमंत्री चौहान के हितेषी माने जाते हैं. तोमर केन्द्र सरकार में मंत्री हैं और मंत्रीपद छोड़कर अध्यक्ष नहीं बनना चाहते. लेकिन अध्यक्ष के चयन में तोमर की राय काफी मायने रखती है. पार्टी लोकप्रियता के बजाए राय शुमारी कर नया अध्यक्ष नियुक्त करना चाहती है. राय शुमारी के आधार पर ही पार्टी ने 33 जिलों के अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं.

मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक जिलों की संख्या 57 है. जहां सहमति नहीं बन पाई वहां अध्यक्षों की नियुक्ति रोक दी गई है. मध्य प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष एवं चुनाव सह अधिकारी विजेश लूनावत के अनुसार, 20 जिलों के अध्यक्षों की नियुक्ति जल्द की जाएगी. 4 जिलों में प्रक्रियात्मक कारणों से चुनाव रोके गए हैं.

News - पार्टी रायशुमारी से प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति करना चाहती है
पार्टी रायशुमारी से प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति करना चाहती है (फाइल फोटो)
नियुक्ति में संघ को देना पड़ सकता है दखल
पूरे देश में मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी का संगठन सबसे ज्यादा अनुशासित माना जाता है. पिछले एक दशक से पार्टी का संगठन शिवराज सिंह चौहान अपने हिसाब से चला रहे हैं. पिछले विधानसभा चुनावों के ठीक पहले चौहान के करीबी माने जाने वाले नंदकुमार सिंह चौहान को हटाकर पार्टी ने जबलपुर के सांसद राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी थी. टिकट वितरण के समय शिवराज सिंह चौहान और राकेश सिंह के बीच मतभेद भी उभरकर सामने आए थे. चुनाव में पार्टी की हार की एक वजह इस टकराव को भी माना गया. राकेश सिंह ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश भी की थी, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व ने इसे नामंजूर कर दिया.

राकेश सिंह आज भी पार्टी नेतृत्व की पहली पंसद बताए जाते हैं. लेकिन सहमति बन नहीं पाई है. शिवराज सिंह चौहान, राकेश सिंह के पक्ष में नहीं हैं. राकेश सिंह से उनका टकराव भी लगातार चल रहा है. चौहान की लाइन संगठन से अलग दिखाई दे रही है. सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन और आंदोलन के लिए जगह भी शिवराज सिंह चौहान अपनी मर्जी से ही तय कर रहे हैं. पार्टी नए अध्यक्ष के जरिए टकराव को समाप्त करने का रास्ता तलाश कर रही है. इसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भूमिका भी काफी अहम हो सकती है. प्रदेश भाजपा के नेताओं से रायशुमारी के लिए राम माधव को मध्य प्रदेश भेजे जाने को संघ की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है.

रायशुमारी की टीम अलग और पर्यवेक्षक अलग
खजुराहो के सांसद विष्णु दत्त शर्मा की अध्यक्ष पद पर दावेदारी को संघ की पसंद के तौर पर देखा जा रहा है. शर्मा विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि से आए हैं. पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा के नाम भी चर्चा में हैं. दोनों बड़े कद के नेता हैं और राष्ट्रीय नेतृत्व के करीब हैं. ये दोनों ही शिवराज सिंह चौहान के प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं. विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव के नाते पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं. राज्य में प्रतिपक्ष के नेता गोपाल भार्गव हैं. इस कारण ही विष्णु दत्त शर्मा और नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कहा जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष और अध्यक्ष दोनों पदों पर ब्राह्मण नहीं रखे जाएंगे.

राकेश सिंह भी इसी कारण अपनी नियुक्ति को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान की ओर से अपने करीबी पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है. लेकिन वे उसी सागर जिले से आते हैं, जहां से गोपाल भार्गव हैं. मामला उलझा हुआ है, इसी कारण पहले राय शुमारी की जा रही है. राम माधव पहले दौर में कोर ग्रुप के कुछ नेताओं से देवास में अलग-अलग बात कर चुके हैं. बचे हुए नेताओं से दिल्ली में बात की जा रही है. चुनाव के लिए दो पर्यवेक्षक भी तय किए जा चुके हैं. मुख्तार अब्बास नकवी और अश्विनी चौबे पर्यवेक्षक हैं. राम माधव के साथ रायशुमारी के लिए प्रवक्ता विजय शास्त्री को लगाया गया है. चुनाव सह प्रभारी लूनावत कहते हैं कि चुनाव की प्रक्रिया तीसरे सप्ताह तक पूरी कर ली जाएगी.

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First published: December 11, 2019, 6:51 PM IST
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