ऐसी है एमपी की परिवहन व्यवस्था, दो अधिकारियों के भरोसे चलता है दफ्तर

लापरवाही बरतने वाले आरटीओ को हटाने से लेकर स्कूल बसों की चेकिंग की जा रही है

Sharad Shrivastava | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 9, 2018, 2:49 PM IST
ऐसी है एमपी की परिवहन व्यवस्था, दो अधिकारियों के भरोसे चलता है दफ्तर
लापरवाही बरतने वाले आरटीओ को हटाने से लेकर स्कूल बसों की चेकिंग की जा रही है
Sharad Shrivastava | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 9, 2018, 2:49 PM IST
इंदौर बस हादसे के बाद हरकत में आई सरकार ने आनन-फानन में स्कूल बसों को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं. लापरवाही बरतने वाले आरटीओ को हटाने से लेकर स्कूल बसों की चेकिंग की जा रही है. हादसों के बाद सरकार की इस संजदीगी पर सवाल खड़े होते हैं. सवाल ये कि अगर सरकार को परिवहन व्यवस्था को सुधारने की इतनी ही चिंता है तो परिवहन विभाग की व्यवस्थाओं को दुरुस्त क्यों नहीं किया जाता.

आंकड़ो पर नजर डालें तो पता चलता है कि मध्य प्रदेश में गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है बावजूद इसके सड़क हादसे रोकने के लिए परिवहन विभाग के पास पर्याप्त अमला ही नहीं है. ऐसे में मुख्यमंत्री हादसे के बाद पीड़ितों से मुलाकात कर सख्ती का ऐलान करते हैं तो क्या करते हैं.

मध्य प्रदेश में कुल वाहनों की संख्या 1 करोड़ 18 लाख से ज्यादा पहुंच चुकी है. अकेले 2016-17 में 7 लाख नई गाड़ियां प्रदेश में रजिस्टर्ड हुई. अकेले राजधानी भोपाल में गाड़ियों की संख्या 12 लाख को पार कर चुकी है. लेकिन उन गाड़ियों की चेकिंग और फिटनेस के लिए केवल दो अधिकारियों की ही नियुक्ति आरटीओ दफ्तर में है.

इतना ही नहीं निचले स्तर के सरकारी अमले का भी हाल कुछ ऐसा ही है. मौजूदा वक्त में भोपाल के आरटीओ दफ्तर में 3 इंस्पेक्टर, 6 सब इंस्पेक्टर, 6 हेडकॉन्स्टेबल और 12 कॉन्स्टेबल के स्टाफ की ज़रुरत है. लेकिन स्टाफ के तौर पर हेडकॉन्स्टेबल की नियुक्ति दफ्तर में नहीं है जबकि इंस्पेक्टर के नाम पर नियुक्ति न के बराबर है.

साल 2014 में एमपीपीएससी के जरिए भर्ती हुए एआरटीओ के आधा दर्जन से ज्यादा उम्मीदवारों को सरकार अब तक नियुक्ति नहीं दे पाई है. ऐसे में सवाल ये कि हर हादसे के बाद कार्रवाई का दिखावा क्यों. आखिर क्यों सरकार सिस्टम को इतना दुरुस्त नहीं करती ताकि कोई इंदौर बस हादसा फिर हो ही न पाए.
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