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ज़िलाध्यक्षों के लिए बीजेपी के दिग्गजों में तकरार, पूर्व मंत्री और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 27, 2019, 11:28 AM IST
ज़िलाध्यक्षों के लिए बीजेपी के दिग्गजों में तकरार, पूर्व मंत्री और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने
बीजेपी ज़िलाध्यक्ष चुनाव के लिए सीनियर लीडर्स में तकरार

सागर (sagar) में पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह (bhupendra singh) और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव (gopal bhargav) आमने-सामने हैं, तो दमोह में पूर्व मंत्री जयंत मलैया और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के बीच पटरी नहीं बैठ पा रही है

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भोपाल.मध्य प्रदेश (madhya pradesh) में ज़िलाध्यक्षों के चुनाव को लेकर बीजेपी (bjp) के दिग्गज आपस में भिड़े हुए हैं.ज़ोरदार दावे और तकरार जारी है. हर दिग्गज नेता अपने ज़िले में अपने ख़ासमख़ास को इस ओहदे पर बैठाना चाहता है. यही वजह है कि अपने को अनुशासित पार्टी कहने वाली बीजेपी में ज़िलाध्यक्षों की नियुक्ति पर टकराहट जारी है.

बीजेपी ज़िलाध्यक्षों के चुनाव को लेकर पार्टी के दिग्गज नेताओं के बीच ज़बरदस्त तकरार चल रही है. कई ज़िलों में ये दिग्गज नेता ज़िलाध्यक्ष पद के लिए एक नाम पर एक राय नहीं हो पा रहे हैं. सागर में पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव आमने-सामने हैं, तो दमोह में पूर्व मंत्री जयंत मलैया और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के बीच पटरी नहीं बैठ पा रही है.वहीं बालाघाट में पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन का बाकी नेताओं के साथ तालमेल नहीं है.शिवपुरी में पूर्व मंत्री यशोधरा राजे की सहमति बाकी नेताओं के साथ नहीं बन रही है.

भार्गव और भूपेंद्र सिंह के बीच विवाद
प्रदेश में जिला अध्यक्षों को लेकर मंथन जारी है.जिलों में ही दिग्गज नेता आपस में उलझ रहे हैं.सागर ज़िले का भी यही हाल है. सागर में जिलाध्यक्ष के चुनाव को लेकर दोनों ही दिग्गज नेता आमने-सामने हैं.मौजूदा जिलाध्यक्ष प्रभुदयाल पटेल उम्र और परफॉरमेंस दोनों कारणों से दौड़ से बाहर हो गए हैं.अब जिला महामंत्री शैलेष केशरवानी अपनी दावेदारी कर रहे हैं.केशरवानी नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के करीबी हैं.इस दौड़ में जाहर सिंह का नाम भी चर्चा में है.सिंह पहले ज़िलाध्यक्ष भी रह चुके हैं.वहीं पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और सांसद राजबहादुर सिंह के करीबी लक्ष्मण सिंह को भी दावेदार माना जा रहा है.अनुराग पयासी और श्याम तिवारी भी ज़िलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं.प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का कहना है कि संगठन मजबूत है और कोई भी विवाद नहीं है.सभी नियुक्तियां तय मापदंड के अनुसार की जाएंगी.

यहां भी खींचतान जारी
दमोह में केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष राजेंद्र गुरु को अब तक जिलाध्यक्ष पद का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उम्र के कारण वे दौड़ से बाहर हो गए हैं.अब किसान मोर्चा के अध्यक्ष गोपाल पटेल और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल के समर्थक आकाश गोस्वामी, मनीष सोनी सहित मलैया समर्थक रमन खत्री और निर्गुट सतीश तिवारी दौड़ में शामिल हैं.दमोह में संगठन पर अब तक मलैया का कब्ज़ा रहा है.पहला ऐसा अवसर है जब केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल का गुट पूर्व मंत्री के गुट पर भारी पड़ रहा है.

उम्र के कारण दायरा बदला
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बालाघाट में नरेंद्र रंगलानी भी उम्र के दायरे के कारण बदले जाएंगे.पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपने खास समर्थक पूर्व विधायक रमेश भटेरे पर दांव लगा सकते हैं.भटेरे पहले भी ज़िलाध्यक्ष रह चुके हैं.वहीं संघ समर्थक होने के कारण रंगलानी गुट आनंद कोचर का नाम आगे बढ़ा रहा है.युवा कोटे से सुरजीत सिंह ठाकुर को भी समझौता प्रत्याशी बनाया जा सकता है.

सांसद को कोई और पसंद है
सतना में नरेंद्र त्रिपाठी को वैसे तो पार्टी बदलने की इच्छुक नहीं है, लेकिन सतना सांसद गणेश सिंह त्रिपाठी से खुश नहीं हैं.नारायण त्रिपाठी और बाकी सभी लोग त्रिपाठी को ही रिपीट करवाना चाहते हैं.

मुन्ना और तोमर में ज़ोर आजमाइश
खंडवा में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के समर्थक अरुण सिंह मुन्ना और राजपाल सिंह तोमर के बीच ज़ोर आजमाइश चल रही है.इसके अलावा जिला महामंत्री नंदन करोड़ी और दो बार चुनाव हारे नरेंद्र सिंह को भी जिलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल माना जा रहा है.

दरबार की चलेगी
देवास में गायत्री राजे पंवार के समर्थक ईश्वर सिंह दरबार, पुष्पेंद्र सिंह बग्गा के नाम फिलहाल चर्चा में हैं.नंदकुमार पाटीदार को भी पार्टी दोहरा सकती है.

कांग्रेस ने कसा तंज
ज़िलाध्यक्षों को लेकर मची खींचतान पर कांग्रेस ने तंज कसा है.प्रदेश कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा,उम्र का मामला हो या फिर दूसरे मामले, सभी में बीजेपी फर्ज़ीवाड़ा करती है.मंडल अध्यक्षों के बाद अब ज़िलाध्यक्षों को लेकर माथापच्ची जारी है.संगठन को मज़बूत करने की कवायद के बीच जिलों के दिग्गज नेताओं के आपसी मतभेद सामने आ रहे हैं.आपसी खींचतान की वजह से अब अध्यक्षों को चुनना संगठन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.

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First published: November 27, 2019, 11:28 AM IST
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