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MP में लव जिहाद विधेयक का मसौदा तैयार, ये होंगे कानून में प्रावधान

प्रतीकात्मक
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प्रस्तावित अधिनियम के अनुसार स्वतंत्र इच्छा से धर्म परिवर्तन की दशा में धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति और धार्मिक पुजारी या व्यक्ति को, जिस ज़िले में धर्म परिवर्तन किया जाना है, वहां के जिला मजिस्ट्रेट को एक महीने पहले सूचना पत्र देना होगा.

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भोपाल.एमपी में लव जिहाद (Love jihad) विधेयक का मसौदा तैयार हो गया है. सीएम शिवराज (CM Shivraj) ने शनिवार को हुई बैठक में मसौदे के अंतिम रूप पर मुहर लगा दी. बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश में कोई भी व्यक्ति अब किसी को बहला-फुसलाकर, डरा-धमका कर विवाह के माध्यम से अथवा अन्य किसी कपटपूर्ण तरीके से प्रत्यक्ष अथवा अन्यथा धर्म परिवर्तन नहीं करा पाएग. ऐसा प्रयास करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी. मध्यप्रदेश सरकार इस संबंध में "म.प्र. धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2020" लाने वाली है.

कौन कर सकेगा शिकायत ?
प्रस्तावित अधिनियम के तहत कोई व्यक्ति अगर किसी का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश करता है तो पीड़ित व्यक्ति खुद, उसके माता-पिता अथवा रक्त संबंधी शिकायत कर सकेंगे. यह अपराध संज्ञेय, गैर जमानती और सत्र न्यायालय इस पर विचार कर सकेगा. उप पुलिस निरीक्षक से कम श्रेणी का पुलिस अधिकारी इसकी जांच नहीं कर सकेगा. धर्मान्तरण नहीं किया गया है यह अभियुक्त को खुद साबित करना होगा. जिहाद हुआ तो शादी शून्य

अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक अगर ये साबित होता है कि शादी धर्म परिवर्तन के आशय से की गई है तो विवाह शून्य माना जाएगा. इस प्रयोजन के लिए कुटुम्ब न्यायालय अथवा कुटुम्ब न्यायालय के अधिकारिता में आवेदन करना होगा.
सज़ा के प्रावधान


किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम की धारा 03 का उल्लंघन करने पर 01 वर्ष से 05 वर्ष का कारावास और कम से कम 25 हजार रुपये का अर्थदण्ड होगा.
नाबालिग, महिला, अ.जा, अ.ज.जा के प्रकरण में 02 से 10 वर्ष के कारावास और कम से कम 50 हजार रुपये अर्थदण्ड का प्रस्ताव है.
इसी प्रकार अपना धर्म छुपाकर ऐसा प्रयास करने पर 03 वर्ष से 10 वर्ष का कारावास एवं कम से कम 50 हजार रूपए अर्थदण्ड होगा।
सामूहिक धर्म परिवर्तन (02 या अधिक व्यक्ति का) का प्रयास करने पर 05 से 10 वर्ष के कारावास और कम से कम 01 लाख रुपये के अर्थदण्ड का प्रावधान किया जा रहा है.

यह कहती है धारा-03
प्रस्तावित "म.प्र. धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम" की धारा 03 के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति दूसरे को दिगभ्रमित कर, प्रलोभन, धमकी, बल, दुष्प्रभाव, विवाह के नाम पर अथवा अन्य कपटपूर्ण तरीके से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष उसका धर्म परिवर्तन अथवा धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकेगा.कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन  षड़यंत्र नहीं  करेगा.


धर्म परिवर्तन के पूर्व घोषणा
प्रस्तावित अधिनियम के अनुसार स्वतंत्र इच्छा से धर्म परिवर्तन की दशा में धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति और धार्मिक पुजारी या व्यक्ति को, जिस ज़िले में धर्म परिवर्तन किया जाना है, वहां के जिला मजिस्ट्रेट को एक महीने पहले सूचना पत्र देना होगा.
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