भोपाल: कोरोना संकट के दौरान इलाज के लिए दर-दर भटकती रही महिला, आखिर में मिली मौत
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भोपाल: कोरोना संकट के दौरान इलाज के लिए दर-दर भटकती रही महिला, आखिर में मिली मौत
मीडिया को इसकी जानकारी मिलने के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया. (प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोना आपदा (Corona Crisis) के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भोपाल (Bhopal) में इलाज के लिए एक महिला दर-दर भटकी. लेकिन उसका कहीं भी सही तरीके से इलाज नहीं किया गया.

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भोपाल. कोरोना आपदा (Corona Crisis) के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भोपाल (Bhopal) में इलाज के लिए एक महिला दर-दर भटकी. लेकिन उसका कहीं भी ठीक तरीके से इलाज नहीं किया गया. साथ ही हॉस्पिटल में भर्ती करने से इनकार कर दिया. इस कारण महिला की मौत हो गई. इससे पहले एक प्राइवेट हॉस्पिटल ने परिजनों को लंबा खर्च बताकर संकट खड़ा कर दिया था. जानकारी मिली है कि जब इस महिला को इलाज के लिए सरकारी हॉस्पिटल ले जाया गया. तब वहां कोरोना जांच का हवाला देकर महिला की सिर्फ मलहम पट्टी की गई और उसे दवा देकर भेज दिया गया. महिला की तबीयत फिर से बिगड़ने पर घरवाले उसे पास के गैस राहत अस्पताल ले गए. वहां भी महिला की मलहम पट्टी कर और दवाई देकर घर वापस भेज दिया गया. इस महिला ने घर वापस जाने के दौरान ठीक तरीके से इलाज नहीं होने की वजह से दम तोड़ दिया.

प्राइवेट अस्पताल ने बताया 60 था हजार का खर्चा
बालगंगा निवासी आशा नामक इस महिला की उम्र 47 साल बताई जा रही है. उनके पोते अयान ने बताया कि 3 मई को आशा को शरीर में फुंसी होने की वजह से स्थानीय डॉक्टर सीमा को बताया. उन्होंने शरीर के उस हिस्से की सिकाई करने के लिए कहा. लेकिन आराम नहीं मिला तो परिजन आशा को प्राइवेट हॉस्पिटल एलबीएस ले गए. हॉस्पिटल में डॉक्टर ने 5 दिन की दवा दी. पांच दिन की दवा खाने के बाद जब परिजन आशा को लेकर फिर अस्पताल लेकर पहुंचे तो उन्हें ऑपरेशन का खर्चा 60000 रुपए बताया गया. लेकिन इतनी बड़ी रकम नहीं होने की वजह से परिजन ने आशा को अस्पताल में भर्ती नहीं किया और वे उसे घर लेकर आ गए.

हमीदिया अस्पताल में नहीं किया भर्ती



अयान ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल का खर्चा नहीं उठाने की वजह से परिवार के सदस्य आशा को सरकारी हॉस्पिटल कमला नेहरू ले गए. लेकिन वहां के डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल में इलाज कराने के लिए कहा. इसके बाद परिजन फिर आशा नामक इस महिला को 26 मई को हमीदिया अस्पताल ले गए. अयान का आरोप है कि हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों ने कहा कि यहां पर कोरोना मरीज का इलाज चल रहा है, इसलिए वे आशा को भर्ती नहीं कर सकते हैं. अयान का आरोप है कि डॉक्टरों ने मलहम पट्टी की और दवा देकर उन्हें घर भेज दिया.



गैस राहत अस्पताल में भी नहीं किया भर्ती
आशा के परिजनों ने कहा कि जब हमीदिया अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया तो घर पर आशा को लेकर आ गए. 27 मई को आशा की तबीयत बिगड़ने लगी तो परिजन उसे गिन्नौरी बगिया स्थित गैस राहत अस्पताल ले गए. उस अस्पताल में भी सिर्फ मलहम पट्टी और दवा दी गई. आशा ने घर वापस जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया.

 

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First published: May 28, 2020, 1:05 PM IST
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