होम /न्यूज /मध्य प्रदेश /Navratri : मेला लगता है, लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं पर यहां दुर्गा जी की झांकियां नहीं लगतीं! जानिए क्यों

Navratri : मेला लगता है, लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं पर यहां दुर्गा जी की झांकियां नहीं लगतीं! जानिए क्यों

अक्सर ऐसा होता है कि जहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, उस मंदिर के साथ कोई न कोई मान्यता जुड़ी ही होती है. हज़ा ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट – अंकुश मोरे

    बुरहानपुर. ज़िला मुख्यालय से 25 किमी दूर एक गांव है इच्छापुर. यहां सतपुड़ा पर्वत शृंखला पर स्थित मां इच्छा देवी का मंदिर मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है. यहां बड़ी संख्या में भक्तों का जमावड़ा लगता है. शारदीया और चैत्र नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु दूरदराज़ से दर्शन करने के लिए आते हैं. नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में यहां लोग पहुंचते हैं, लेकिन खास बात यह है कि इच्छापुर और उसके आसपास के गांवों में इन दिनों में देवी दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना नहीं की जाती. यहां आपको कोई अस्थायी पंडाल नज़र नहीं आएगा. इसके पीछे एक विश्वास आधारित कहानी है.

    नवरात्रि पर्व के अवसर पर इच्छापुर गांव में 9 दिनों तक मेला लगा रहता है. दूर-दूर से लोग देवी के दर्शनों के लिए इन नौ दिनों में आते हैं फिर भी नवरात्रि में गांव में कहीं भी मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित नहीं की जाती. पूरा गांव केवल मां इच्छा देवी की उपासना में लीन रहता है. इच्छादेवी का यह मंदिर 60 साल पुराना बताया जाता है. इस मंदिर के निर्माण को लेकर एक प्रसंग यहां पुजारी, मंदिर ट्रस्ट के अधिकारी और स्थानीय लोग बताते हैं.

    एक मराठा सूबेदार ने मां इच्छा देवी से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी थी, जब उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई तो उन्होंने सतपुड़ा की पहाड़ी में मां इच्छा देवी के मंदिर और कुएं का निर्माण करवाया. इसके बाद मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण भुसकुटे परिवार ने करवाया. गौरतलब है कि मां इच्छा देवी के दर्शन करने जाने के लिए 176 प्राचीन सीढ़ियां हैं और उतरने के लिए पर्यटन विभाग ने 225 सीढ़ियां बनाई हैं. साथ ही, इच्छा देवी मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों के बैठने के लिए व्यवस्था और शादी ब्याह के लिए मंगल भवनों का निर्माण भी करवाया है.

    क्यों नहीं सजते प्रतिमाओं के पंडाल?

    इच्छा देवी मंदिर के पुजारी दिवाकर तिवारी महाराज ने बताया कि यहां कई सालों पहले देवीदास नामक ब्राह्मण ने कड़ी तपस्या कर माता को प्रसन्न किया था. देवी ने प्रसन्न होकर ब्राह्मण से वरदान मांगने को कहा. तब ब्राह्मण ने वरदान में इच्छा देवी से ग्राम इच्छापुर में विराजित होने का वरदान मांगा. मान्यता है कि तबसे आज तक माता यहीं विराजित हैं. पूरे क्षेत्र में इच्छामाता के प्रति इतनी श्रद्धा है कि और किसी देवी की उपासना यहां पारंपरिक तौर पर नहीं की जाती.

    Tags: Mp news, Navratri festival

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें