MP की जेलों में शुरू हुई ई-मुलाकात : भाइयों को देखकर भावुक हुईं पूनम और रज़िया
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MP की जेलों में शुरू हुई ई-मुलाकात : भाइयों को देखकर भावुक हुईं पूनम और रज़िया
घर बैठे ही वीडियो कॉन्प्रेंसिंग से अपने बेटों-भाइयों या पिता को देख पाएंगे.

बंदी के परिवार अपने घर से ही एक स्मार्ट फोन (smart phone), डेस्कटॉप, टैब या किसी mponline सेंटर से, वीडियो कॉन्फ्रेंस कर बंदी को सीधे देख और बात कर सकेंगे.

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भोपाल.मध्य प्रदेश (madhya pradesh) की जेलों में अब कैदी अपने परिवार से ई मुलाकात कर रहे हैं. कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन (lockdown) के कारण प्रदेश सरकार ने मुलाकात की ये नयी व्यवस्था शुरू की है. इसमें जेल (jail) में बंद कैदी से उनके परिवार अपने घर बैठे ही मोबाइल फोन, टैब या लैपटॉप के ज़रिए बात कर सकेंगे. कोरोना संक्रमण के कारण तीन महीने से मुलाकात बंद थी. आज जब परिवार ने अपने बेटों-भाइयों और पिता को देखा तो वो भावुक हो गए.

एमपी की जेलों में ई-मुलाकात आज से शुरू हो गयी. गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस सिस्टम की शुरुआत करते हुए कई कैदियों से उनके परिवार वालों की मुलाकात कराई. मोबाइल फोन के ज़रिए परिवार ने जेल में बंद अपने बेटे-पिता और भाई से बात की. कोरोना के कारण रक्षा बंधन और ईद पर भाइयों और बेटों से मुलाकात न हो पाने की वजह से मोबाइल पर बात करते हुए कई परिवार भावुक हो गए.

कोरोना के कारण 3 महीने से जेल में मुलाकात बंद है. जेलों में कैदियों को उनके परिवार से समय-समय पर मिलवाने के लिए अब ई मुलाकात की व्यवस्था की गयी है.



ऐसे होगी मुलाकात
प्रदेश की जेलों में बंदियों की जानकारी को भारत सरकार के एनआईसी के ई प्रिंट सॉफ्टवेयर के माध्यम से कम्प्यूटर पर अपलोड किया जाता है. इस सॉफ्टवेयर में ई-मुलाकात व्यवस्था का प्रावधान है. इस ई-मुलाकात के लिए बंदियों के परिवार www.e-prisons.nic.in वेबसाइट पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए आवेदन दे सकते हैं. उनके आवेदन को जेल अधीक्षक मंजूरी देगा.मंजूरी मिलने पर बंदी के परिवार अपने घर से ही एक स्मार्ट फोन, डेस्कटॉप, टेब या किसी mponline सेंटर से, वीडियो कॉन्फ्रेंस कर बंदी को सीधे देख और बात कर सकेंगे.

एक महीने में एक मुलाकात
जेल मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि ई मुलाकात शुरू होने से कोविड महामारी की इस कठिन परिस्थिति में कैदियों के परिवारों को जेल आने की ज़रूरत नहीं होगी. वो घर बैठे ही वीडियो कॉन्प्रेंसिंग से अपने बेटों-भाइयों या पिता को देख पाएंगे. इससे बंदियों के तनाव, अवसाद में कमी आएगी और कैदियों के परिवार का समय, श्रम और पैसे की बचत होगी.

भावुक हुए परिवार
रक्षाबंधन से पहले भोपाल की रहने वाली पूनम ने जेल में बंद अपने भाई से ई मुलाकात की. उन्होंने भाई का हाल-चाल जाना. बातचीत के दौरान पूनम भावुक हो गईं. इसके अलावा ईद से पहले एक मुस्लिम परिवार ने भी जेल मंत्री के बंगले से अपने बेटे से ई मुलाकात कर हालचाल जाना. यह परिवार भी बातचीत करते हुए भावुक हो गया था  क्योंकि 3 महीने से वो अपने बेटे से नहीं मिल पाए हैं.
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