EXCLUSIVE : कहीं इसरो, इनकम टैक्स और नोट प्रेस के डाटा से भी तो नहीं हुई छेड़छाड़!

EOWकी जांच मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रह गई है. इस घोटाले के तार दूसरे 13 राज्यों से जुड़ते देख कंपनी ने उन राज्यों को जांच के लिए पत्र लिखकर सतर्क किया है.

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 12, 2019, 12:58 PM IST
EXCLUSIVE : कहीं इसरो, इनकम टैक्स और नोट प्रेस के डाटा से भी तो नहीं हुई छेड़छाड़!
EOWकी जांच मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रह गई है. इस घोटाले के तार दूसरे 13 राज्यों से जुड़ते देख कंपनी ने उन राज्यों को जांच के लिए पत्र लिखकर सतर्क किया है.
Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 12, 2019, 12:58 PM IST
मध्यप्रदेश मे शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में हुए बहुचर्चित ई टेंडर महाघोटाले के तार अब दूसरे राज्यों से भी जुड़ते दिख रहे हैं. जिस एंट्रेस सिस्टम कंपनी ने टेंपरिंग कर फर्जीवाड़ा किया है,उस कंपनी के पास 15 राज्यों के 29 सार्वजनिक उपक्रमों के डाटा और सॉफ्टवेयर का काम है. EOW को शक है कि कंपनी ने कहीं बाकी राज्यों में भी तो डाटा से छेड़छाड़ नहीं की गयी.
ई-टेंडर घोटाला-EOW ने ई-टेंडर घोटाले में एफआईआर दर्ज की थी. इस मामले में एंट्रेस सिस्टम कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट मनोहर एमएन को गिरफ्तार भी किया गया था. एंट्रेस कंपनी का दफ्तर बंगलुरु में है और ये टीसीएस की सहयोगी कंपनी है. मप्र में ई-प्रिक्योरमेंट पोर्टल के काम का ठेका इसी कंपनी के पास था.कंपनी के खिलाफ शिकायत है कि उसने पोर्टल की गोपनीयता भंग कर उसका डाटा सुरक्षित नहीं रखा. एंट्रेस के पदाधिकारियों ने ऑस्मो के डायरेक्टर विनय और वरुण को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल की यूजर आईडी एवं पासवर्ड की जानकारी दी थी.
जांच में जानकारी- जांच में पता चला कि आरोपियों ने MPSEDC के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया था.इसके ज़रिए विभिन्न विभागों के ई-टेंडर्स की बिड राशि में हेरा-फेरी कर हजारों करोड़ का घोटाला किया गया.


कई राज्यों से जुड़े तार-आरोपी मनोहर एमएन से पूछताछ में ईओडब्ल्यू के हाथ कई महत्वपूर्ण जानकारी लगी है.ई-टेंडर घोटाले में शामिल एंट्रेस सिस्टम्स लिमिटेड कंपनी मध्यप्रदेश ही नहीं बिहार, गोवा, केंद्र शासित राज्यों लक्षद्वीप, अंडमान सहित देश के 29 सार्वजनिक उपक्रमों में सॉफ्टवेयर का काम करती है.EOW को शक है कि मध्यप्रदेश की तरह कंपनी की कार्यप्रणाली से दूसरे राज्यों और सार्वजनिक उपक्रमों में भी ई-टेंडर टेंपरिंग तो नहीं हुई.मुख्यालय ने संबंधित राज्यों और सार्वजनिक उपक्रम के अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच करवाने की सलाह दी है.इन सार्वजनिक उपक्रमों में इसरो, आयकर, नोट प्रेस से लेकर भारतीय स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक जैसे देश के अति महत्वपूर्ण संस्थान शामिल हैं.

एंट्रेस का नेटवर्क
-एंट्रेस कंपनी बिहार, गोवा, केंद्र शासित राज्य लक्षद्वीप और अंडमान की सरकार के लिये काम कर रही है.
-नॉर्दन कोलफील्ड, महानदी कोलफील्ड, नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो), भारत नोट मुद्रण प्रिंटिंग लिमिटेड, आयकर विभाग के पंचकुला, चंडीगढ़, अमृतसर कार्यालय, इलाहाबाद बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम, सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (सीपीडब्ल्यूडी),
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नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन, अमृतसर स्मार्ट सिटी लिमिटेड, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन, लखनऊ नगर निगम, मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी, ईडीसीआईएल इंडिया लिमिटेड, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बीएसएनएल नई दिल्ली, इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (आईआरसीटीसी), अंडमान लक्षद्वीप हरबोर वर्क्स, केरल फीड लिमिटेड, केरल स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड, केरल स्टेट को-ऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन लिमिटेड, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट पुडुचेरी जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों का काम भी एंट्रेस कंपनी कर रही है.
EOWकी जांच मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रह गई है. इस घोटाले के तार दूसरे 13 राज्यों से जुड़ते देख कंपनी ने उन राज्यों को जांच के लिए पत्र लिखकर सतर्क किया है.

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