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ई टेंडरिंग घोटाला : 3 आरोपी गिरफ़्तार, बैंगलुरू से हुई थी टेंडर में टैम्परिंग!

ई टेंडरिंग घोटाला : 3 आरोपी गिरफ़्तार, बैंगलुरू से हुई थी टेंडर में टैम्परिंग!

फाइल फोटो

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शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौरान हुए इस ई-टेंडर घोटाले में कमलनाथ सरकार ने 5 विभागों के अधिकारियों और तत्कालीन ज़िम्मेदार नेताओं के खिलाफ बुधवार को भोपाल में एफआईआर दर्ज कराई है

मध्य प्रदेश के ई-टेंडरिंग घोटाले में जांच तेज़ हो गयी है. इस मामले से जुड़े 3 आरोपियों की गिरफ़्तारी की खबर है. आरोपियों ने पूछताछ में ये कबूला है कि ईं-टेंडर में टेम्परिंग की गयी थी.

सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर मिली है कि ई-टेंडर घोटाले से जुड़े 3 आरोपियों को एमपी पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. सूत्रों से पता चला है कि तीनों आरोपियों ने टेंडर में टेम्परिंग करने की बात कबूली है. पता चला है कि बंगलुरू की गेटवे  से ये टेम्परिंग की गयी थी. किनके कहने पर हुई टेम्परिंग, किनसे कनेक्शन हैं ऐसे तमाम बिंदुओं पर आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. Eow जल्द ही इन आरोपियों के कनेक्शन का खुलासा करने वाली है.

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शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौरान हुए इस ई-टेंडर घोटाले में कमलनाथ सरकार ने 5 विभागों के अधिकारियों और तत्कालीन ज़िम्मेदार नेताओं के खिलाफ बुधवार को भोपाल में एफआईआर दर्ज कराई है. जल निगम, लोकनिर्माण विभाग, पीआईयू, रोड डेवलेपमेंट और जल संसाधन विभाग पर टेंडर में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. इन मामलों में 7 कंपनियों पर फर्जीवाड़ा कर टेंडर लेने का आरोप है.
क्या है ई-टेंडरिंग घोटाला

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शिवराज सरकार ने अलग-अलग विभागों के ठेकों में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए 2014 में ई-टेंडर की व्यवस्था लागू की थी. उसके लिए एक निजी कंपनी से पोर्टल बनवाया गया. तब से मध्यप्रदेश में हर विभाग इसके माध्यम से ई-टेंडर कर रहा है. लेकिन शिवराज सरकार के दौरान ही इसमें घोटाला होने लगा.

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टेंडर की यह प्रक्रिया ऑनलाइन थी. लेकिन इसमें बोली लगाने वाली कंपनियों को पहले ही सबसे कम बोली का पता चल जाता था. और यहीं से इसमें घोटाले की शुरुआत हुई. ई-टेंडर प्रक्रिया में 3000 करोड़ के घोटाले की बात सामने आ रही है, लेकिन ये प्रक्रिया 2014 से लागू है. इसके तहत तकरीबन तीन लाख करोड़ रुपये के टेंडर दिए जा चुके हैं. ईओडब्ल्यू के अनुसार घोटाला 3 हजार करोड़ का बताया रहा है. जनवरी से मार्च 2018 के दौरान टेंडर प्रोसेस हुए थे. पिछले साल मई में घोटाले की जांच शुरू हुई थी औऱ फिर विधानसभा चुनाव के दौरान ये ठंडे बस्ते में डाल दी गयी.

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कुल मिलाकर 2014 से अब तक करीब तीन लाख करोड़ रुपए के ई-टेंडर संदेह के दायरे में आ गए हैं. आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले की जांच भी शुरू की थी. लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान यह मामला धीमा हो गया था. कमलनाथ की सरकार ने ऐलान किया कि इस मामले कि फिर जांच होगी.

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इसी क्रम में अब नया खुलासा हुआ है. ईओडब्ल्यू का कहना है ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ की गई. 9 टेंडरों के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया, जिनमें जल निगम के 3, लोक निर्माण विभाग के 2, जल संसाधन विभाग के 2, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम का 1 और लोक निर्माण विभाग की पीआईयू का 1 टेंडर शामिल है.

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Tags: Kamal nath, Madhya pradesh news, Shivraj singh chauhan, Telecom scam, Vyapam Scam

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