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MP के शिक्षा मंत्री स्कूल चलें हम के बजाए कह रहे हैं 'विदेश चले हम'

MP के शिक्षा मंत्री स्कूल चलें हम के बजाए कह रहे हैं 'विदेश चले हम'

उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी विदेश दौरे पर

उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी विदेश दौरे पर

मध्य प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक पढ़ाई के स्तर का बुरा हाल है. शिक्षा की ज़मीनी तस्वीर देखें तो एमपी में करीब 1.30 लाख सरकारी स्कूल हैं. उनमें 3.10 लाख शिक्षक पढ़ाते हैं. 22 हजार स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे हैं. 451 स्कूल एक कमरे में चल रहे हैं

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    भोपाल. मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों Mminister()में इन दिनों शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए विदेश जाने की होड़ मची है. स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी के दक्षिण कोरिया (south kiorya)दौरे के बाद अब उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी लंदन (landon)दौरे पर गए हैं. वहां वो कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अलग अलग कार्यक्रमों में शामिल होंगे. इन दौरों के बीच सवाल ये खड़ा हो रहा है कि मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए क्या वाकई में विदेश दौरों की ज़रूरत है. या शिक्षा क्षेत्र में जो खामियां हैं उन्हें ज़मीन पर काम करके दूर किया जा सकता है.

    मध्य प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक पढ़ाई के स्तर का बुरा हाल है. शिक्षा की ज़मीनी तस्वीर देखें तो एमपी में करीब 1.30 लाख सरकारी स्कूल हैं. उनमें 3.10 लाख शिक्षक पढ़ाते हैं. 22 हजार स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे हैं. 451 स्कूल एक कमरे में चल रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों के हाल और ज्यादा बुरे हैं. प्रदेश भर में शिक्षकों के 45 हजार से ज्यादा पद खाली हैं.
    बीते साल स्कूल शिक्षा के बजट में 5 हजार करोड़ की राशि लैप्स हो गयी. शिक्षा के मामले में देश भर में मध्य प्रदेश का 23वां नंबर है. बुनियादी सुविधाओं के मामले में मध्य प्रदेश का 23वां नंबर है. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा के स्तर पर बात करें तो 2500 से ज्यादा प्रोफेसरों की कमी है. विश्वविद्यालयों में स्तरीय शिक्षा की कमी है.
    देश की टॉप 100 यूनिवर्सिटी में एमपी की एक भी नहीं
    मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा का हाल क्या है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क की ओर से जारी सूची में ये बात सामने आई थी कि देश के टॉप 100 यूनिवर्सिटी में मध्य प्रदेश की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है.

    स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी भी विदेश दौरा कर चुके हैं


    विदेश में मंत्री अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल - विश्वविद्यालय
    किसी और विश्वविद्यालय की बात तो छोड़िए देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर राजधानी भोपाल में खोले गए अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय का हाल भी बेहाल है. आलम ये है कि विश्वविद्यालय में एक भी स्थायी शिक्षक-कर्मचारी नहीं है. स्थायी कर्मचारियों के नाम पर केवल 2 चपरासी और 8 ड्राइवर हैं. विश्वविद्यालय संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है.
    किसने क्या कहा ?
    बीजेपी का कहना है-दुर्भाग्य है कि मध्य प्रदेश में स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं. जो विदेश सीखने गए हैं उन्हें विदेश जाने की ज़रूरत नहीं है. जो निर्धारित सुविधाएं हैं अगर वही उपलब्ध हो जाएं तो यही सबसे बड़ा काम होगा.
    कांग्रेस ने उल्टा सवाल किया कि बीजेपी वाले सवाल किस आधार पर उठा रहे हैं, जो खुद 15 साल सत्ता में रहे. उन्होंने शिक्षा के लिए क्या किया. जहां तक बात मंत्रियों के विदेश दौरे की है तो दक्षिण कोरिया के बच्चे पीसा के एग्जाम में दुनिया में सबसे बेहतर करते हैं. अगर वहां से हम कुछ सीख सकें तो क्या गलत है .

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    Tags: Government primary schools, Jitu Patwari, Madhya pradesh news, Private School, School Admission

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