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Opinion: गोडसे को राष्ट्रभक्त बताकर गांधीजी की छवि धूमिल करने की कोशिशें

सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा. (फाइल फोटो)
सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा. (फाइल फोटो)

गोडसे को महान बताकर और गांधीजी को देश विभाजन का जिम्मेदार बताने से नई पीढ़ी को भ्रमित भले ही किया जा सकता हो, लेकिन इसे गांधीजी के सत्य, अहिंसा, देश के प्रति समर्पण, स्वतंत्रता में उनकी महान अद्वितीय भूमिका, उनके प्रति सम्मान की वैश्विक छवि को धूमिल नहीं किया जा सकता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 5:28 PM IST
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भोपाल. 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की पुण्यतिथि से पहले एक बार फिर उनकी छवि को निशाना बनाते हुए भाजपा के चंद नेता अपने बयानों के तीर छोड़ रहे हैं. कोई गांधीजी के हत्यारे नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) को राष्ट्रभक्त (Patriot) बताते हुए महिमामंडित कर रहा है, तो कोई देश के विभाजन को गांधीजी की भूल बताकर कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है. इनमें से एक भोपाल की सांसद, संन्यासिन प्रज्ञा ठाकुर हैं, दूसरे हैं मप्र विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा. बता दें कि ये दोनों ही नेता हमेशा अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. वहीं दूसरी ओर, ग्वालियर में गोडसे को राष्ट्रभक्त के तौर पर प्रतिष्ठित करने के लिए ज्ञानशाला खोलने के प्रयास किए गए, जिस पर प्रशासन के दखल और इलाके में धारा 144 लगा दिए जाने के बाद फिलहाल ताला डल गया है.

पिछले तीन चार दिनों में महात्मा गांधी को लेकर राज्य में जिस तरह की गतिविधियां और बयान सामने आए हैं, उन्हें लोग एक सुनियोजित रणनीति के तहत किए जा रहे काम का हिस्सा मान रहे हैं. बता दें कि दो दिन पहले राजधानी भोपाल के गांधीनगर इलाके में एक कार्यक्रम में पहुंचे राज्य विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर, भाजपा के रामेश्वर शर्मा ने अपने पद की गरिमा और मर्यादा भूल कर एक सामान्य नेता की तरह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को 1947 में देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया. वह बोले कि देश का दो बार विभाजन हुआ, पहला विभाजन मो. अली जिन्ना ने किया था. इसके बाद 1947 में बापू से भूल हुई और देश का दूसरा विभाजन हुआ. दरअसल रामेश्वर शर्मा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को कोसते हुए जिन्ना और गांधीजी तक जा पहुंचे थे. वह उन्होंने दिग्विजय के काम को जिन्ना से भी ज्यादा खतरनाक और विभाजनकारी बताया.

कांग्रेस के बहाने गांधी पर प्रहार
इसके बाद किसी सवाल के जवाब में दिग्विजय सिंह के नाथूराम गोडसे को गांधीजी का हत्यारा और देश का पहला आतंकवादी बताने के बाद भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने बयान दिया. ठाकुर ने ताजा बयान में गोडसे को राष्ट्रभक्त बताते हुए टिप्पणी की कि कांग्रेस हमेशा से 'देशभक्तों' के साथ दुर्व्यवहार करती रही है. वह 'भगवा आतंक' (Saffron Terror) कहती है. इससे बुरा और क्या हो सकता है. ये कोई पहला मौका नहीं है, जब साध्वी प्रज्ञा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को राष्ट्रभक्त कहकर महिमामंडित न किया हो. इससे पहले 16 मई 2019 को भोपाल में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रज्ञा ने कहा था कि 'नाथूराम गोडसे देशभक्त था, है और रहेगा.' याद कीजिए प्रज्ञा को इस बयान के बाद भाजपा की हर जगह आलोचना हुई थी. खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ( PM Narendra Modi) ने गांधीजी पर इस कथन की आलोचना की थी.
लोकसभा में दिए बयान की भी हुई थी निंदा


27 सितंबर 2019 जब लोकसभा में एसपीजी संशोधन विधेयक(SPG Amendment Bill) पर चर्चा चल रही थी, और ए राजा नाथूराम गोडसे को लेकर अपनी बात कह रहे थे, तभी प्रज्ञा ने गोडसे का हवाला 'देशभक्त' के तौर पर दिया था और कहा था 'देशभक्तों का अपमान नहीं होना चाहिए.' इसके बाद विवाद और हंगामा पर प्रज्ञा को सफाई देनी पड़ी कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया.

ग्वालियर में गोडसे ज्ञानशाला
इन तीन चार दिनों में गोडसे को महिमा मंडित करने का एक और कृत्य ग्वालियर में हुआ. विश्व हिंदी दिवस पर 10 जनवरी रविवार के दिन हिन्दू महासभा (Hindu Mahasabha) ने गोडसे ज्ञानशाला का उद्घाटन कर डाला. महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जयवीर भारद्वाज के मुताबिक इस ज्ञानशाला में 'गोडसे ने कैसे महात्मा गांधी की हत्या की' और उनके सभी भाषण और लेख संबंधित साहित्य मौजूद हैं. ज्ञानशाला को दुनिया को ये बताने के लिए खोला गया है कि नाथूराम गोडसे कितने बड़े राष्ट्रवादी थे. इस ज्ञानशाला में गोडसे के अलावा राष्ट्र निर्माण दूसरे महापुरुषों जैसे छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, डॉ. हेडगेवार का इतिहास भी बताया जाएगा.

गोडसे ज्ञानशाला खुलने की खबर के बाद शांति भंग होने, हालात बिगड़ने की आशंका से प्रशासन हरकत में आया और दौलतगंज इलाके में धारा 144 लगा दी. इसके बाद प्रशासन से बातचीत के बाद महासभा के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को ज्ञानशाला में ताला डाल दिया. गोडसे को राष्ट्रभक्त के रूप में महिमामंडित करने का इस तरह का कृत्य महासभा पहले भी कर चुकी है. इससे पहले महासभा ने 15 नवंबर 2017 में यहां गोडसे का मंदिर बनाने के लिए प्रतिमा भी स्थापित कर दी थी, लेकिन उस समय प्रतिमा को जब्त कर लिया गया था.

बुद्धिजीवी और विश्लेषक मानते हैं कि आरएसएस, भाजपा के कतिपय नेताओं और हिन्दू महासभा जैसे संगठनों द्वारा गोडसे को महान बताकर और गांधीजी को देश विभाजन का जिम्मेदार बताने से नई पीढ़ी को भ्रमित भले ही किया जा सकता हो, लेकिन इसे गांधीजी के सत्य, अहिंसा, देश के प्रति समर्पण, स्वतंत्रता में उनकी महान अद्वितीय भूमिका, उनके प्रति सम्मान की वैश्विक छवि को धूमिल नहीं किया जा सकता. क्योंकि दुनिया भारत को गांधी के देश के नाम से जानती है. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं)
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