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Exclusive: कमलनाथ को गुस्सा क्यों आता है?

बहत्तर की उम्र में जोश और जज्बे से भरे कमलनाथ के साथ दिन भर घूमने के बाद यह पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या वाकई 'वक्त है बदलाव का'? यह देखना दिलचस्प होगा कि 11 दिसंबर को मध्य प्रदेश में फिर से कमल खिलेगा या कमल नाथ!

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गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ मध्य प्रदेश में 15 साल पुरानी शिवराज सरकार को चुनौती दे रहे हैं. रविवार को कमलनाथ का जन्मदिन था. बहत्तर की उम्र में जोश और जज़्बे से भरे कमलनाथ के साथ दिन भर घूमने के बाद यह पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या वाकई 'वक्त है बदलाव का'? यह देखना दिलचस्प होगा कि 11 दिसंबर को मध्य प्रदेश में फिर से कमल खिलेगा या कमल नाथ! (इसे पढ़ें- यही है लोकतंत्र की ताक़त : चायवाला पीएम, किसान का बेटा सीएम - शिवराज)

राजनीति में जो जुबान से कहा जाता है वो अक्सर सच नहीं होता लेकिन कमलनाथ की यही अदा है, जिसकी वजह से राहुल गांधी ने छह महीने पहले कमलनाथ को मध्य प्रदेश में बीजेपी का किला भेदने की जिम्मेदारी सौंपी थी. चालीस साल का सियासी तजुर्बा रखने वाले कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के घर के बगल में यानी 9 सिविल लाईन्स श्यामला हिल्स पर डेरा जमाया. कमलनाथ को सीएम हाऊस यानी छह श्यामला हिल्स की मंज़िल पर पहुंचाने की ख्वाहिश उनके करीबी छिपा नहीं पाते.

होशंगाबाद से कांग्रेस नेता हजारी लाल रघुवंशी कहते हैं कि कमलनाथ की जितनी भी तारीफ की जाए कम है, 28 तारीख को वोट डलेंगे और 11 दिसंबर को नतीजे आएंगे और मध्य प्रदेश के मुखिया कमलनाथ बनेंगे.

खास बात यह है कि कमलनाथ खुद कहते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की भूख नहीं है वह बस इतना चाहते हैं कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने. चुनाव के बाद सीएम पर फैसला राहुल गांधी करेंगे.


भोपाल के घर में रोज सुबह छह बजे कमलनाथ के दिन की शुरुआत होती है. सुबह दस बजे तक बंगले पर लोगों के आने-जाने का सिलसिला चलता है. अमूमन रोज़ सुबह साढ़े दस बजे कमलनाथ का उड़नखटोला आसमान से बातें करना शुरू कर देता है. (यह भी पढ़ें- एमपी चुनाव में अब RSS संभालेगी मोर्चा, उतरेगी स्वयंसेवकों की फौज)

कमलनाथ का कारवां रोज़ इस तरह निकल जाता है मध्य प्रदेश में. अलग-अलग जगह पर हैलीकॉप्टर से कमलनाथ तमाम इलाकों को कवर करने की कोशिश कर रहे हैं. चुनाव के पहले कोशिश ये है कि कोई ऐसी विधानसभा ना बचे जहां कमलनाथ की सभा न हो पाए.

हैलीकॉप्टर जब हवा से बातें करता है उस वक्त कमलनाथ के दिमाग में एमपी की 230 सीटों का गुणा भाग चलता है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी की 15 साल पुरानी सरकार के खिलाफ नए-नए नारे गढ़े जाते हैं. इस तरह कमलनाथ का उड़नखटोला रोज़ उड़ता है नए-नए नारों के साथ


कमलनाथ कहते हैं, "शिवराज सिंह कैसे किसान के बेटे हैं, पेट में मारते हैं लात और छाती पर गोली. हमने तो साफ कहा कि किसानों का कर्जा माफ. पूरी बिजली बिल हाफ और बीजेपी साफ़. अफ़्रीका से ज्यादा किसानों की ख़ुदकुशी एमपी में होती है. विज्ञापन में दिखे विकास. और ज़मीन पर भूख और प्यास."

निशाने पर सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हों ऐसा नहीं है. प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी पर भी कमलनाथ जमकर तंज कसते है. कमलनाथ की तुकबंदी पर जनता जमकर तालियां पीटती है. कमलनाथ कहते हैं, "कैसे नारे दिये थे याद है मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, यहां कोई है मेक अप और डिजिटल इंडिया वाला? मोदीजी भी बहुत बढ़िया कलाकार हैं."

वे आगे कहते हैं,  "काला धन लाएंगे. 15 लाख की बात छोड़िए, खाता 600 रुपये में खुलवाया तो उसके 500 हो गए तब कहेंगे कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी. हमको बताइए अच्छे दिन किसके आए हैं. ये समय तो हिसाब और जवाब का है. ये तो लूट और झूठ की सरकार रही है."

इतना ही नहीं कभी-कभी तो मोदी-शिवराज की जोड़ी ही चुनावी कविता के सारे रस लिए कमलनाथ के निशाने पर आ जाती है. वे कहते हैं, "कांग्रेस लड़ी थी गोरों से. अब हम लड़ेंगे चोरों से, मैं तो पूछता हूं मोदी और शिवराज से. किसान बिना दाम के, नौजवान बिना काम के, जनता पूछे शिवराज मोदी किस काम के!"

चुनाव का मौसम है. दोपहर बारह बजे हैलीकॉप्टर में ही कमल नाथ का नाश्ता होता है. दोपहर के खाने के लिए वक्त ही नहीं. इसके बाद सीधे रात में ग्यारह बजे डिनर. चुनाव की चकल्लस ने कमल नाथ की सुबह की एक्सरसाईज़ औऱ योग से फिलहाल तौबा करा दी है.

कमल नाथ हेलीकॉप्टर में आगे की सीट पर को पायलट की तरह बैठते हैं. हेलीकॉप्टर में पूरे समय गुणा भाग चलता है. किस सीट पर कौन खड़ा है. क्या खूबियां है औऱ क्या कमजोरी. हज़ारों फीट की उंचाई पर दिल और दिमाग सिर्फ चुनाव के बारे में सोचता रहता है.

कमल नाथ के काम करने का जज्बा ही है जो बीजेपी से बगावत कर कांग्रेस में आए सरताज सिंह को भी शायर बना देता है. बीजेपी से बागी हुए सरताज कहते हैं कि, उमर भले ही कुछ भी हो जाए लेकिन खून में गर्मी चाहिए. हम तो एक बात दोहराते हैं. मिटे नहीं अरमान सरफरोशी के, सरों पर मुल्क की वफा का जुनून अभी बाकी है. वतन पर मांग में भरना है जो सिंदूर, हमारी रगो में वो खून अभी बाकी है.

कमल नाथ वक्त के बड़े पाबंद हैं. हर रैली में तय वक्त पर पहुंचते हैं. फूलों की-बड़ी बड़ी मालाओं से स्वागत तो मेहमान की तरह होता है लेकिन सूबे में कहीं भी जाएं कमल नाथ एक मेजबान की तरह इलाके से रिश्ता जोड़ने की कोशिश ज़रूर करते हैं.

वे कहते हैं कि होशंगाबाद आता हूं तो जवानी याद आती है. 40 साल पहले जब छिदवाड़ा से भोपाल जाते थे तो होशंगाबाद ज़रूर रूकते थे चाय पीने खाना खाने. वे तंज कसते हैं, 'वाह रे शिवराज मान गए, ऐसी कलाकारी! महीने में पच्चीस दिन अपनी फोटो छपवाते हैं. खर्चा 200 करोड़. मैं तो शिवराज को कहता हूं कि एक महीने विज्ञापन मत छपाईये, वो 200 करोड़ होशंगाबाद के नौजवानों को दे दीजिए कोई व्यवसाय कर लेंगे. विज्ञापन में तो दिखे विकास पर मैदान में भूख औऱ प्यास.

होशंगाबाद में कमलनाथ


मध्य प्रदेश में कमल खिलेगा या कमल नाथ ये तो मध्य प्रदेश की जनता 28 नवंबर को तय करेगी. लेकिन अभी बड़ा मुद्दा ये है कि कमल नाथ शिवराज सरकार से 15 साल का हिसाब मांग रहे हैं. बीजेपी कांग्रेस से राम मंदिर का हिसाब मांगती है, क्या सोचती है कांग्रेस राम मंदिर पर. बीजेपी चुनाव को आरएसएस औऱ कांग्रेस के बीच का चुनाव बनाती है. ये मुद्दे जब उठते हैं तो कमल नाथ के सामने चुनाव में एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है.

दफ्तर से लेकर घर तक कमल नाथ की ज़िन्दगी में गांधी परिवार का असर साफ दिखता है. दून स्कूल में कमल नाथ औऱ संजय गांधी एक साथ पढ़े हैं. संजय गांधी ने ही कलकत्ता से कमल नाथ को छिंडवाड़ा में लोकसभा चुनाव लड़ने साल 1980 में भेजा था. वो नौ मर्तबा छिंदवाड़ा से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. घर औऱ या दफ्तर गांधी परिवार की तस्वीरें बड़े करीने से सजाई गई हैं. हर सभा में कमल नाथ गांधी परिवार की वकालत करते ज़रूर नज़र आते हैं.

कमलनाथ कहते हैं कि मोदी जी आएंगे औऱ कहेंगे कि सोनिया गांधी राहुल गांधी ये हैं. परिवार ये है. उनकी छोडिए अपनी बात करिए. आप जनता को गुमराह करना चाहते हैं. आधा भाषण होगा, किसके अच्छे दिन आए? मैं बताऊंगा किसके अच्छे दिन आए. बड़े-बड़े व्यापारी औऱ उद्योगपतियों के अच्छे दिन आए हैं. किसान और नौजवान के सामने तो अंधेरा है


अभी कांग्रेस ने सूबे में पार्टी का सेहरा कमल नाथ के सिर बांधा है. लेकिन बड़ा सवाल ये है क्या जनता कमल नाथ के सिर पर सेहरा पहनाना चाहती है. वोटर्स की बात अगर की जाए तो होशंगाबाद से कंचन कहती हैं, 'हम लोग सोच रहे हैं कि कांग्रेस जीतना चाहिए. जॉब की बहुत ज़रूरत है. रोज़गार नहीं है. हम अपना भविष्य बनाएं.'

कमल नाथ छह महीने पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे, तब से लगातार एमपी की सरज़मीं को नापने की कोशिश कर रहे हैं. खुद बहुत अच्छे पायलट हैं. इसलिए हमेशा हैलीकॉप्टर में सामने बैठते हैं औऱ रोज़ सुबह हैलीकॉप्टर से चुनाव प्रचार पर निकल जाते हैं. लेकिन फिलहाल बड़ा सवाल ये है कि मध्य प्रदेश की जनता कमल नाथ को सरकार का पायलट बनाती है या नहीं.

अभी कांग्रेस ने सूबे में पार्टी का सेहरा कमल नाथ के सिर बांधा है. लेकिन क्या जनता कमल नाथ के सिर पर सेहरा पहनाना चाहती है. इंतज़ार करिए वोटिंग की तारीख़ 28 नवंबर तक औऱ 11 दिसंबर को चुनाव के नतीजे सब साफ़ कर देंगे.

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