NLIU: फेल छात्रों को दी लॉ की डिग्री, दो की जज के पद पर हो गई पोस्टिंग

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में गड़बड़ियों के रोज नए खुलासे हो रहे हैं. अबकी बार फेल छात्रों को भी लॉ की डिग्री देने का मामला सामने आया है

Arun Kumar Trivedi | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: November 17, 2017, 8:13 PM IST
NLIU: फेल छात्रों को दी लॉ की डिग्री, दो की जज के पद पर हो गई पोस्टिंग
(National Law Institute University, Bhopal)
Arun Kumar Trivedi | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: November 17, 2017, 8:13 PM IST
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में गड़बड़ियों के रोज नए खुलासे हो रहे हैं. अबकी बार फेल छात्रों को भी लॉ की डिग्री देने का मामला सामने आया है.

दरअसल, प्रारंभिक जांच में पिछले 4 बैच के ऐसे 15 छात्रों के नाम सामने आए हैं, इसमें दो ऐसे नाम भी मिले जो बीए, एलएलबी की इसी गलत डिग्री का उपयोग कर जज की नौकरी भी पा गए.
इतना ही नहीं चयनित जजों में से एक भानु पंडवार की पोस्टिंग तो छिंदवाड़ा में हो भी चुकी है, वहीं इसी वर्ष सिविल जज-2 के पद पर चयनित अमन सूलिया की पोस्टिंग होनी बाकी है.

एनएलआईयू में परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की प्रारंभिक जांच में 2015 के 5,सन 2014 के 1 छात्र, सन 2014 के तीन और 2013 के एक छात्र को गलत ढंग से डिग्री देना पाया गया है. कमेटी की रिपोर्ट के बाद रिजल्ट तैयार करने का जिम्मा देख रहे असिस्टेंट रजिस्ट्रार (परीक्षा) रंजीत सिंह को निलंबित कर दिया गया.

संस्थान की अंदरुनी जांच में मिले पुख्ता तथ्यों के बाद रिटायर हाई कोर्ट जस्टिस को जांच का जिम्मा सौंपा गया है. संस्थान के डायरेक्टर एसएस सिंह को छुट्टी पर भेज दिया गया है और रजिस्ट्रार रवि पांडे भी स्वीकार कर रहे है कि रिजल्ट तैयार करने में गड़बड़ी के साक्ष्य मिले हैं. उनकी रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट जस्टिस ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय गोहिल को जांच का जिम्मा सौंपा है.

गलत ढंग से डिग्री देने का खुलासा खुद विश्वविद्यालय की आंतरिक कमेटी की जांच रिपोर्ट में सामने आया. प्रो. घयूर आलम, प्रो. यूपी सिंह और लाइब्रेरियन छत्रपाल सिंह की तीन सदस्यीय कमेटी ने पाया कि पिछले चार सत्रों में 15 ऐसे छात्रों को डिग्री दी गई है, जो कई विषयों में फेल थे.

संस्थान में सेमेस्टर के बजाय ट्राइमेस्टर सिस्टम लागू है. ऑटोनॉमस दर्जा होने के चलते, परीक्षा लेने से लेकर रिजल्ट तैयार करने तक का काम यही होता है, डिग्री भी यही देता है. सालों से रिजल्ट टेबल तैयार करने और गोपनीय कार्यों का जिम्मा असिस्टेंट रजिस्ट्रार (एग्जाम) रंजीत सिंह के पास था. जब रिजल्ट की अंतिम टेबल तैयार हो जाती थी तो उसमें औपचारिक तौर पर प्रोफेसर यूपी सिंह के हस्ताक्षर होते थे.
Loading...

इसी फाइनल रिजल्ट टेबल के आधार पर डिग्रियां तैयार की जाती थी. फाइनल रिजल्ट टेबल तैयार करते समय फेल छात्रों को भी पास की कैटेगरी में रख दिया गया. इसके अलावा री-वैल्यूएशन में भी गड़बड़ी पाए जाने के प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं.

बहरहाल जिन छात्रों को गलत डिग्री दी गई, उनमें से भानु पंडवार और अमन सूलिया शामिल हैं. दोनों को फेल होने के बावजूद डिग्री मिल गई. इसी का उपयोग कर वे जज बने हैं. कुछ डिग्रीधारियों के कई बड़े प्रतिष्ठानों में भी काम करने की खबरें आ रहीं हैं. साल 2014 के पास आउट अमन सूलिया इसी साल जज बने. अभी पोस्टिंग होनी बाकी है. ये पुराने ट्राइमेस्टर के कुछ विषयों में फेल थे. वहीं भानु पंडवार ने 2015 की 14वें ट्राइमेस्टर की रिजल्ट शीट में इंटरप्रिटेशन ऑफ स्टेच्यू और प्रोफेशनल इथिक्स विषय में फेल हैं. सिविल जज की 2016 में हुई परीक्षा में वे चयनित हुईं,फिलहाल छिंदवाड़ा में सिविल जज हैं.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए भोपाल से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 17, 2017, 8:01 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...