परिवारवाद का आरोप लगाने वाली बीजेपी खुद फंस गयी पुत्रमोह में

बीजेपी नहीं चाहती कि सिर्फ नेतापुत्र होने के नाते किसी को टिकट मिले. लेकिन समस्या ये है कि अगर एक नेता के बेटे को टिकट दिया जाता है तो दूसरे को कैसे मना करें

Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 7, 2018, 2:56 PM IST
परिवारवाद का आरोप लगाने वाली बीजेपी खुद फंस गयी पुत्रमोह में
कैलाश विजयवर्गीय
Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 7, 2018, 2:56 PM IST
बीजेपी में टिकट के लिए ऐसी मारामारी और घमासान पहले कभी नहीं रहा. इस बार नेता खुलकर अपने परिवारवालों के लिए टिकट मांग रहे हैं. यही वजह है कि 38 टिकट अब भी फंसे हुए हैं.

बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने बेटे आकाश को टिकट दिलाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं. पार्टी लाइन से हटकर अब उन्होंने बयान दिया है कि आकाश के लिए पार्टी विधायक रमेश मेंदोला अपनी सीट छोड़ने के लिए तैयार हैं. पार्टी की चुनाव समिति नामों पर मंथन कर रही है, लेकिन इंदौर के इन दोनों नेताओं का एलान क्या संदेश दे रहा है कि ये मामला किसी एक परिवार विशेष का है या पार्टी का.

मेंदोला इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 के विधायक हैं. विजयवर्गीय यहीं से अपने बेटे को खड़ा करना चाहते हैं. कैलाश विजयवर्गीय ने कहा मुझे टिकट मिले या न मिले आकाश को चुनाव लड़ाने के लिए मैं तैयार हूं. उन्होंने ये भी कहा कि महू से वहीं का कोई स्थानीय कार्यकर्ता चुनाव लड़ सकता है.

नेतापुत्रों को लेकर बीजेपी घमासान मचा हुआ है. इंदौर की कुछ सीटों को लेकर रस्साकशी देखने को मिल रही है. विजयवर्गीय अभी महू से विधायक हैं, लेकिन इस बार वो अपने बेटे के लिए लामबंदी कर रहे हैं.वहीं ताई यानि कि सुमित्रा महाजन अपने बेटे मंदार महाजन के लिए टिकट चाहती हैं.

ग्वालियर चंबल संभाग में भी एक सीट फंसी हुई है. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर अपने बेटे देवेंद्र तोमर को टिकट दिलाना चाहते हैं. वरिष्ठ नेताओं का ये दबाव ही पार्टी की सूची जारी करने में देरी का कारण माना जा रहा है. इन नेतापुत्रों को टिकट देने के लिए काफी मंथन चल रहा है.पार्टी नहीं चाहती कि सिर्फ नेतापुत्र होने के नाते किसी को टिकट मिले. लेकिन समस्या ये है कि अगर एक नेता के बेटे को टिकट दिया जाता है तो दूसरे को कैसे मना करें. तीनों ही पार्टी के वरिष्ठ और कद्दावर नेता हैं. हालांकि इससे पहले पार्टी गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार और हर्ष सिंह के बेटे विक्रम सिंह को  टिकट दे चुकी है.

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने नेतापुत्र को टिकट नहीं दिया है. कांग्रेस नेता महेश जोशी के बेटे अश्विन जोशी, कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया को टिकट दिया गया है. आने वाले 2 दिन में सूचियों में कुछ और नाम चौंका सकते हैं. लेकिन तथ्य ये है कि हमेशा परिवार और वंशवाद के नाम पर कांग्रेस को निशाना बनाने वाली बीजेपी खुद भी परिवारवाद की शिकार है.

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