MP: केवल नाम के लिए हुआ चक्काजाम, किसानों से ज्यादा नेताओं ने किया प्रदर्शन

किसानों का प्रदर्शन कहीं भी असर नहीं छोड़ सका.

किसानों का प्रदर्शन कहीं भी असर नहीं छोड़ सका.

प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर सहित अन्य जिलों में किसान नेता दोपहर 12 से 3 के बीच हाईवे पर चक्काजाम करेंगे. हालांकि जाम के दौरान एंबुलेंस और स्कूल बस जैसी जरूरी सेवाओं को छूट रहेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 6, 2021, 5:21 PM IST
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भोपाल. पूरा प्रदेश शनिवार को अलर्ट पर था. वजह रही, कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का चक्काजाम.  दिल्ली बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे 40 किसान यूनियनों ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर और सागर जिलों में चक्का जाम किया. हालांकि, कुछ जगहों को छोड़कर और कहीं भी गंभीर स्थिति नहीं हुई.

इंदौर, विदिशा, उज्जैन, बैतूल सहित कई जगहों पर सिर्फ 15 से 20 किसान चक्का जाम करने पहुंचे थे. कई जगहों पर किसान ज्ञापन सौंपकर औपचारिकता निभाकर चले गए. उज्जैन में किसानों ने सड़क पर चूल्हा जलाकर रोटी बनाई और डेढ़ घंटे में ही आंदोलन समाप्त कर दिया.

जब तक कानून वापस नहीं, हम किसानों के साथ रहेंगे- तनखा

जानकारी के मुताबिक, जबलपुर में किसान आंदोलन को कांग्रेस का जबरदस्त समर्थन मिला. कांग्रस और किसानों के 500 से ज़्यादा ट्रैक्टर दमोह हाईवे पर दिखाई दिए. किसान ट्रैक्टर मार्च का नेतृत्व राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने किया. इस दौरान विधायक विनय सक्सेना और पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी भी मौजूद थे. इस मौके पर तनखा ने कहा कि आज का दिन एतिहासिक है. जब तक काले क़ानून वापस नहीं होंगे, तब तक कांग्रेस किसानों के साथ सड़कों पर रहेगी.
इंदौर-मुम्बई हाइवे को जाम कराने किसान पहुंचे राऊ

दोपहर में इंदौर-मुम्बई हाइवे को जाम कराने किसान राऊ पहुंचे थे. किसानों ने सड़क पर बैठकर विरोध किया था.  ये सभी किसान कृषि बिल को वापिस लिए जाने की मांग कर रहे थे.  हालांकि, किसान ज्यादा संख्या में नहीं थे. पुलिस ने चक्काजाम के थोड़ी देर बाद ही किसानों को हटा दिया था. पुलिस की दबाव की नीति यहां काम कर गई, क्योंकि  कोई भी संगठन खुलकर चक्काजाम करने की बात लेकर सामने नहीं आया.  किसान नेताओं का भी कहना है कि सभी प्रमुख और बड़े किसान नेता शहर से बाहर हैं. वे खातेगांव में महापंचायत कर रहे हैं. ऐसे में राजधानी में प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए कोई बड़ा नेता नहीं है, इसलिए यहां पर चक्काजाम या बड़ा प्रदर्शन किए जाने की संभावना काफी कम थी.



ग्वालियर-उज्जैन के हालत



थोड़ी देर के लिए किसानों ने आगरा-झांसी हाईवे, आगरा-मुंबई हाईवे पर चक्काजाम लगा दिया था. इनके अलावा निरावली और बड़ागांव में हाईवे पर भी जाम लगा था. कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी कर रही थी इस चक्काजाम का नेतृत्व. वहीं, उज्जैन में किसान आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस और किसान यूनियन के नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर दिखाई दिए.
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