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लोकयुक्त संगठन में डीएसपी और इंस्पेक्टर के 50 फीसदी पद खाली

 प्रभारी लोकायुक्त यूसी माहेश्वरी.

प्रभारी लोकायुक्त यूसी माहेश्वरी.

मध्य प्रदेश में सीएम शिवराज सिंह चौहान के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर बड़ा सवाल उठ गया है. वजह है राज्य के लोकायुक्त संगठन में छापा मारने वाले अफसरों की कमी के चलते भ्रष्ट बाबुओं पर कार्रवाई प्रभावित होना.

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मध्य प्रदेश में सीएम शिवराज सिंह चौहान के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर बड़ा सवाल उठ गया है. वजह है राज्य के लोकायुक्त संगठन में छापा मारने वाले अफसरों की कमी के चलते भ्रष्ट बाबुओं पर कार्रवाई प्रभावित होना.

प्रभारी लोकायुक्त जस्टिस माहेश्वरी के बार-बार पत्र लिखे जाने के बाद भी डीएसपी और इंस्पेक्टर के पचास फीसदी पद खाली हैं.

नाराज प्रभारी लोकायुक्त यूसी माहेश्वरी का कहना है कि खाली पदों पर नियुक्तियां सरकार को प्राथमिकता के आधार करनी चाहिए. सरकारी महकमें में भ्रष्टाचार के जंग को मिटाने के लिए बने एंटी करप्शन एजेंसी लोकायुक्त संगठन में इन दिनों भ्रष्टों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है.

छापेमारी करने वाले डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों का टोटा होने से ऐसी स्थिति बनी है. दरअसल, मुख्यालय के अलावा लोकायुक्त संगठन के सात संभागों भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में दफ्तर हैं, जो विशेष पुलिस स्थापना के एसपी के नाम से जाने जाते हैं.

विशेष पुलिस स्थापना यानि लोकायुक्त पुलिस को ही छापा मारने का अधिकार है. खाली पदों पर नजर डाले तो प्रदेश में डीएसपी के कुल 33 पद स्वीकृत हैं इस में से 16 पद खाली है. इसी तरह इंस्पेक्टर के कुल 51 पद स्वीकृत हैं.

इसमें से 33 भरे हैं जबकि 18 रिक्त हैं. आंकड़ों के मुताबिक भोपाल संभाग में डीएसपी स्तर के तीन, इंदौर में तीन, जबलपुर में 2, उज्जैन में 2, ग्वालियर में 4, सागर संभाग में 2 पद खाली हैं. खाली पदों को भरने के लिए प्रभारी लोकायुक्त जस्टिस यूसी माहेश्वरी ने राज्य सरकार को कई बार पत्र लिखा, लेकिन अब तक रिक्त पदों को नहीं भरा गया है.

नाराज माहेश्वरी का कहना है कि सरकार की अपनी मजबूरियां हैं, लेकिन रिक्त पदों पर नियुक्तियां प्राथमिकता में होना चाहिए. लोकायुक्त संगठन के जनवरी 2016 से अप्रैल 2017 के आंकड़ों के मुताबिक सरकारी दफ्तरो में काम के बदले या फिर फाइल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वतखोरी बढ़ी है.

हालांकि इस अवधि में भोपाल संभाग में 18 घूसखोर, सागर में 12 , इंदौर में 20, रीवा 7, जबलपुर में  15, ग्वालियर में 9 और उज्जैन संभाग में 12 घूसखोर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी लोकायुक्त हाथों गिरफ्तार किये गए.

लेकिन छापेमारी न के बराबर रही. भोपाल संभाग, इंदौर, उज्जैन,सागर और रीवा संभाग में एक भी भ्रष्ट अफसरों पर छापे की  कार्रवाई नहीं हुई. फिलहाल, शिवराज सिंह चौहान ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संकल्प लिया था.

ऐसे में एंटी करप्शन एजेंसी लोकायुक्त संगठन में डीएसपी और इंस्पेक्टरों की कमी से साफ है, जिम्मेदार अधिकारी सीधेतौर से सीएम से जुड़े मसले पर गंभीर नहीं रहते.

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