ई-टेंडरिंग घोटाला: मध्य प्रदेश में BJP नेताओं पर लटकी तलवार!

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आयकर विभाग के छापेमार कार्रवाई के बाद अब एमपी सरकार एक्शन में आ गई है. ईओडब्ल्यू ने ई टेंडरिंग घोटाले में कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम की तकनीकी जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज की है

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मध्यप्रदेश के बहुचर्चित तीन हजार करोड़ के ई-टेंडरिंग घोटाले में पहली एफआईआर दर्ज की गई है. ईओडब्ल्यू ने पांच सरकारी विभागों, सात कंपनियों के डायरेक्टर समेत अज्ञात राजनेताओं और नौकरशाहों पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

दरअसल, आयकर विभाग के छापेमार कार्रवाई के बाद अब एमपी सरकार एक्शन में आ गई है. ईओडब्ल्यू ने ई टेंडरिंग घोटाले में कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम की तकनीकी जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज की है.

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ईओडब्ल्यू का कहना है कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ की गई. 9 टेंडरों के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर कंपनियों को लाभान्वित किया, जिनमें जल निगम के 3, लोक निर्माण विभाग के 2, जल संसाधन विभाग के 2, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम का 1 और लोक निर्माण विभाग की पीआईयू का 1 टेंडर शामिल है.

ईओडब्ल्यू के अनुसार घोटाला 3 हजार करोड़ का बताया रहा है. जनवरी से मार्च 2018 के दौरान टेंडर प्रोसेस हुए थे. मई में घोटाले की जांच शुरू हुई थी. इन पर हुई है FIR?
-हैदराबाद की कंस्ट्रक्शन कंपनी मेसर्स जीवीपीआर लिमिटेड, मैसर्स मैक्स मेंटेना लिमिटेड, मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी दी ह्यूम पाइप लिमिटेड, मेसर्स जेएमसी लिमिटेड, बड़ौदा की कंस्ट्रक्शन कंपनी सोरठिया बेलजी प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स माधव इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड, भोपाल की कंस्ट्रक्शन कंपनी मेसर्स राजकुमार नरवानी लिमिटेड डायरेक्टरों पर एफआईआर.

-भोपाल की सॉफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टरों पर एफआईआर
-एमपीएसईडीसी के अज्ञात कर्मचारी एफआईआर
-जल निगम, लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग, सड़क विकास निगम, लोक निर्माण विभाग की पीआईयू के अधिकारियों-कर्मचारियों पर एफआईआर
-साफ्टवेयर कंपनी एंट्रेस प्राइवेट लिमिटेड बैंगलोर, टीसीएस के अधिकारी-कर्मचारियों समेत मामले से जुड़े अज्ञात राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स पर एफआईआर

बीजेपी सरकार के दौरान के राजनेताओं के शामिल होने के सवाल पर ईओडब्ल्यू डीजी केएन तिवारी ने कहा कि उसी दौरान के राजनेता और नोकरशाह हैं. प्रशासनिक स्वीकृति देने वाले राजनेताओं और नौकरशाहों की जांच की जा रही है.

उन्होंने कहा कि जांच में सबूत मिलने के बाद राज नेताओं और नौकरशाहों के नामों का खुलासा किया जाएगा. सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 120 बी, 420, 468, 471, आईटी एक्ट 2000 की धारा 66, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 सहपठित धारा 13(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई.

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