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भोपाल में पहली बार व्हाइट टॉपिंग तकनीक से सड़क बनेगी, बार-बार मेंटेनेंस से मिलेगा छुटकारा

भोपाल में पहली बार व्हाइट टॉपिंग तकनीक से सड़क बनेगी, बार-बार मेंटेनेंस से मिलेगा छुटकारा

व्हाइट टॉपिंग से करीब 20 साल तक सड़कें खराब नहीं होंगी और सरकार का हर साल के मेंटेनेंस का खर्चा भी बचेगा. (सांकेतिक फोटो)

व्हाइट टॉपिंग से करीब 20 साल तक सड़कें खराब नहीं होंगी और सरकार का हर साल के मेंटेनेंस का खर्चा भी बचेगा. (सांकेतिक फोटो)

भोपाल में सूरज नगर से बिशनखेड़ी तक 7.4 किमी की लंबाई में पुरानी डामर की सड़क पर व्हाइट टॉपिंग (White topping) के जरिए सीमेंट कांक्रीट (Cement-concrete) की परत चढ़ेगी. पीडब्ल्यूडी (PWD) का दावा है कि कम लागत में ज्यादा मजबूत सड़क बनेगी.

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भोपाल. राजधानी में बार-बार सड़कों के मेंटेनेंस से बचने के लिए अब व्हाइट टॉपिंग की नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इस तकनीक के जरिए पुरानी डामर की सड़क पर सीमेंट कांक्रीट की नई परत चढ़ाई जाएगी. यह पुरानी सड़क के मुकाबले ज्यादा मजबूत और नई सीमेंट कांक्रीट से सस्ती होगी.

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी, PWD) ने सूरज नगर से विशनखेड़ी शूटिंग रेंज तक 7.4 किमी की लंबाई में मौजूदा डामर की सड़क पर व्हाइट टॉपिंग का टेंडर जारी किया है. इसमें पीडब्ल्यूडी मौजूदा डामर की सड़क को बेस के रूप में इस्तेमाल करेगा. यानी अलग से बेस तैयार नहीं करना पड़ेगा. और मौजूदा सड़क के इसके ऊपर 20 सेंटी मीटर की सीमेंट कांक्रीट की नई परत बिछा दी जाएगी. पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर संजय मस्के ने बताया कि टेंडर की मंजूरी मिलते ही यहां काम शुरू हो जाएगा. करीब एक साल में व्हाइट टॉपिंग का काम पूरा हो जाएगा.
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सवाल भी…सीएस का घर इसलिए अच्छी सड़क पर नई परत क्यों
सूरज नगर वाली सड़क पर हाल ही में डामर हुआ था. यह मौजूदा हालात में अच्छी सड़क है. फिर भी, इस पर 5 करोड़ रुपए खर्च करके व्हाइट टॉपिंग की जा रही है. गौरतलब है कि यहां पर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस समेत कई अफसरों के बंगले, फार्म हाउस और प्लॉट है.
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यह दावा भी..20 साल तक सड़कें खराब नहीं होंगी
विभाग का दावा है कि इस तकनीक में करीब 20 साल तक सड़कें खराब नहीं होंगी और सरकार का हर साल के मेंटेनेंस का खर्चा भी बचेगा. यही नहीं सीमेंट कांक्रीट की नई सड़क निर्माण से इसकी लागत भी एक तिहाई कम है. गौरतलब है कि भोपाल में कई स्थानों पर सड़कें पानी की वजह से खराब होती हैं. इससे सड़कों पर गड्‌ढे हो जाते हैं, लेकिन, यह सड़कें धंसती नहीं हैं. ऐसी सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग का उपयोग करने से उनकी लाइफ बढ़ जाएगी.
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एक किमी पर 50 लाख रुपए तक की बचत
व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़क सामान्य डामर रोड की तुलना करीब ढाई गुना महंगी है. अधिकारियों के मुताबिक 7 मीटर चौड़ी एक किलोमीटर टूलेन डामर रोड पर 30 लाख रुपए खर्च आता है. व्हाइट टॉपिंग तकनीक से इसे बनाने पर करीब 70 लाख प्रति एक किमी का खर्चा आएगा. जबकि नई सीमेंट कांक्रीट की सड़क बनाने पर लागत बढ़कर एक से सवा करोड़ रुपए प्रति किमी तक हो जाती है.

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