ई टेंडरिंग घोटाला: फोरेंसिक रिपोर्ट नहीं दे रही है CERT, कांग्रेस-BJP आमने सामने

मध्य प्रदेश में हुए 3 हज़ार करोड़ रुपए के ई टेंडरिंग घोटाले का न्यूज़ 18 इंडिया ने पर्दाफ़ाश किया है. केंद्र के IT मंत्रालय के अधीन CERT सबूत लेकर जा चुकी है, मगर एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अब तक फॉरेन्सिक रिपोर्ट नहीं दी है.

News18 Madhya Pradesh
Updated: January 15, 2019, 10:41 AM IST
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Updated: January 15, 2019, 10:41 AM IST
मध्य प्रदेश में हुए 3 हज़ार करोड़ रुपए के ई टेंडरिंग घोटाले का न्यूज़ 18 इंडिया ने पर्दाफ़ाश किया है. केंद्र के IT मंत्रालय के अधीन CERT यानी Computer Emergency Response Team सबूत लेकर जा चुकी है. मगर एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अब तक फॉरेन्सिक रिपोर्ट नहीं दी है, जिसकी वजह से ई टेंडरिंग घोटाले में हुई छेड़छाड़ के आरोपियों के खिलाफ़ केस दर्ज नहीं हो पा रहा है. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि ई टेंडर घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नाम है इसलिए केंद्र सरकार इसकी रिपोर्ट कभी सामने नहीं आने देगी. वहीं राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही ई टेंडरिंग घोटाले का आरोप लगाते हुए कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर हो गई है.

फॉरेन्सिक रिपोर्ट नहीं मिलने से E-Procurement Portal में हुई छेड़छाड़ के आरोपियों के खिलाफ़ केस दर्ज नहीं हो पा रहा है. दिग्विजय सिंह का आरोप है कि ई टेंडर घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फंसे हैं इसलिए केन्द्र सरकार कभी रिपोर्ट सामने नहीं आने देगी. कहने को तो भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए MP में ऑनलाईन टेंडरिंग शुरू हुई लेकिन अब ये ई टेंडरिंग की प्रक्रिया ही भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई. जिसे चुनाव के पहले राहुल गांधी ने जमकर मुद्दा बनाया.

17 सितंबर 2018 को राहुल गांधी ने कहा था कि अगर एमपी में कांग्रेस की सरकार आई तो ई टेंडरिंग के बारे में पूरा एमपी जानता है कि किसने चोरी की. व्यापम और ई टेंडरिंग के चोरों को हम विजय माल्या की तरह भागने नहीं देंगे.



अब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन गई है, लेकिन फिर भी ई टेंडर घोटाले के आरोपियों के खिलाफ़ एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है. साइबर फ्राड की जांच करने वाली Computer Emergency Response Team (CERT) को पांच महीने पहले ई टेंडर घोटाले का ब्यौरा भेजा गया था. लेकिन CERT की टीम ने भोपाल आना ज़रूरी नहीं समझा. वजह साफ है. 28 नवंबर को मध्य प्रदेश में चुनाव होने थे. व्यापम की तरह चुनाव के पहले तत्कालीन शिवराज सरकार ई टेंडरिंग घोटाले का जिन्न बोतल से बाहर निकालना ही नहीं चाहती थी. नतीजा यह हुआ कि CERT के दफ्तर में मध्य प्रदेश के ईओडब्लू की चिट्ठियां धूल खाती रहीं.

Ministry of Electronic & Information Technology के अधीन CERT देश की इकलौती ऐसी संस्था है जो साइबर क्राइम में होने वाले डाटा से छेड़छाड़ का वैज्ञानिक विश्लेषण करती है. एमपी में चुनाव हो गए, लेकिन CERT की रिपोर्ट आना तो दूर की बात, CERT की टीम सबूत जमा करने के लिये भोपाल तक नहीं आई. 28 नवंबर को वोटिंग समाप्त होने के बाद CERT की टीम 4 दिसंबर से 7 दिसंबर तक भोपाल आई औऱ तमाम विभागों से Forensic Image लेने का काम हुआ. बीजेपी के चुनाव हारने के बाद जिस दिन नए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ ली, उस दिन यानी 17 दिसंबर को फिर ईओडब्लू ने CERT को चिट्ठी भेजी कि CERT की टीम जो सबूत जमा कर ले गई है, उसके आधार पर जल्दी से जल्दी फोरेंसिक एनालिलिस रिपोर्ट दी जाए.

केंद्रीय आईटी मंत्रालय क्यों नहीं दे रहा है CERT की रिपोर्ट
दो दिन बाद यानी 19 दिसंबर को फिर ईओडब्लू ने CERT को रिमाइंडर भेजा कि ई टेंडरिंग के आरोपियों के खिलाफ़ केस दर्ज करने के लिए फोरेंसिक एनालिलिस रिपोर्ट ज़रूरी है, मगर अभी तक CERT की रिपोर्ट का इंतज़ार है. सवाल यह है कि केन्द्र का आईटी मंत्रालय CERT की रिपोर्ट जल्दी क्यों नहीं दे रहा है जिससे ई टेंडरिंग के आरोपियों के खिलाफ़ एफआईआऱ दर्ज हो सके.
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रविशंकर प्रसाद के अधीन है CERT
CERT केन्द्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद के अधीन है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का आरोप है कि केन्द्र सरकार कभी रिपोर्ट नहीं देगी क्योंकि ई टेंडरिंग घोटाले में बीजेपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनके मंत्री औऱ चहेते गले तक फंसे हुए हैं.

दरअसल CERT की जांच कछुए की रफ़्तार को भी मात दे रही है. 16 मई 2018 में Economic Offence Wing ईओडब्लू ने पीई यानी प्रारंभिक जांच दर्ज करने के बाद पहली बार Computer Emergency Response Team (CERT) India के महानिदेशक को 5 जुलाई 2018 को चिट्ठी लिखी थी. न्यूज़ 18 इंडिया के पास मौजूद ईओडब्लू की चिट्ठी में कहा गया था कि प्रदेश में जल निगम मर्यादित, PWD, जल संसाधन विभाग औऱ मध्य प्रदेश रोड डिवेलपमेंट कार्पोरेशन के ई टेंडरों में गड़बड़ी की गई है. ई टेंडर के लिए E-Procurement पोर्टल चलाने का काम एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवेलपमेंट कॉर्पोरेशन करता था.

CERT को बताया गया कि भोपाल के स्टेट डाटा सेंटर में डाटा सर्वर बना है. गड़बड़ी करने वालों ने अवैध तरीके से कम्प्यूटर फ्रॉड को अंजाम दिया. Tender Opening Authorities के डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल करते हुए कई टेंडर के डाटा के साथ छेड़छाड़ की.

पीडब्लूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने बताया कि इस मामले में बिल्कुल कार्रवाई चल रही है. मैं पहली बैठक में ही कह चुका हूं कि हम ई टेंडरिंग की जांच करा रहे है. हमारे विभाग के कुछ अफ़सर प्रथम दृष्टया लिप्त पाये गये हैं. कुछ ठेकेदार लिप्त पाये गये हैं उसमें कार्रवाई चल रही है. हमने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त एमपी बनायेंगे हम उससे पीछे हटने वाले नहीं हैं. हम दबाव में नहीं आयेंगे. पहले तो खुद का पोर्टल था. अब सीधे सेंटर के पास चला गया है. कुछ अधिकारियों ने रिकॉर्ड गायब करने की कोशिश भी की है. डाटा गायब करने की कोशिश की है. मैंने कहा कि मुझे अगली बैठक में वो सारे डाटा चाहिए. जब डाटा आ जायेंगे तो फिर देर नहीं लगेगी जांच रिपोर्ट बनने में.

शिवराज सरकार में मंत्री रहे भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि, इस तरह की बातें सरकार की तरफ से आएंगी. अगर कहीं उनको लगता है कि गड़बड़ी हुई है तो जो लोग दोषी हैं जांच करें औऱ कार्रवाई करें. सरकार ने अपनी तरफ से उस वक्त ठीक किया होगा. अगर कमलनाथ सरकार को लगता है कि गड़बड़ी हुई है तो ये सरकार में हैं जांच करें औऱ कार्रवाई करें.

Computer Emergency Response Team (CERT) को कंप्यूटर डाटा की फॉरेंसिक जांच करना है. Madhya Pradesh State Electronic Development Corporatio (MPSEDC) के सर्वर से डाटा ज़ब्त किया गया था. CERT ने 11 हार्डडिस्क में ज़ब्त डाटा ज़ब्त किया है. 9 सरकारी टेंडर में फर्ज़ीवाड़े की जांच हो रही है. सभी 9 टेंडर शिवराज सरकार ने रद्द कर दिए थे. मगर फर्ज़ीवाड़े को अंजाम देने वाले आज़ाद हैं.

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रिपोर्ट - मनोज शर्मा
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