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MP बोर्ड की खुली पोल, स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी ने दिए ये निर्देश

Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 18, 2019, 7:36 PM IST
MP बोर्ड की खुली पोल, स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी ने दिए ये निर्देश
मध्‍य प्रदेश बोर्ड की किताबों में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं.

भले ही प्रदेश में शिक्षा के स्‍तर को बेहतर करने के लिए स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी (School Education Minister Prabhuram Chaudhary) और तमाम अधिकारी विदेश दौरे कर रहे हों, लेकिन इसमें सुधार होने के बजाए पुस्तकों में ही गड़बड़ियां सामने आ रही हैं.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में विदेशों की तर्ज पर शिक्षा के स्तर को सुधारने की कवायद की जा रही है. इसके लिए मंत्री और तमाम अधिकारी विदेश दौरे कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा का स्तर सुधरने के बजाए पुस्तकों में ही गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. मध्य प्रदेश बोर्ड (Madhya Pradesh Board) की 12वीं की पुस्तक में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम (Former President APJ Abdul Kalam) के देहांत वर्ष को गलत अंकित कर दिया गया है. हालांकि अब सुधारने के लिए पत्र जारी किया जा रहा है. जबकि छपाई में चूक को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी (School Education Minister Prabhuram Chaudhary) का कहना है कि गलती हुई है. इसीलिए संज्ञान लेकर तुंरत सुधार के निर्देश दिए हैं.

12वीं की हिन्‍दी सामान्य मकरंद में गड़बड़ी
प्रदेश में शिक्षा सत्र 2019-20 के सामान्य हिन्‍दी (मकरंद) में गड़बड़ी सामने आई है. मेरे सपनों के भारत में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के पाठ में जीवन परिचय में गलती सामने आई है. उनके देहांत वर्ष को ही गलत छाप दिया गया है. 2015 के निधन वर्ष को 1915 छाप दिया गया है. अब स्कूलों में किताबों के पहुंचने पर राज्य शिक्षा केंद्र हरकत में आया है. राज्य शिक्षा केंद्र ने संशोधन के लिए पत्र जारी किए है. संशोधन के साथ पढ़ाने के लिए प्रदेश भर के हर जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी किए गए हैं.

2017-18 के संस्करण में देहांत वर्ष ही अंकित नहीं

मप्र शिक्षा बोर्ड की गलती सिर्फ 2019-20 के हिन्‍दी की पुस्तकों में एपीजे अब्दुल कलाम के देहांत वर्ष की गलत छापने में ही नहीं है बल्कि 2017-18 में उनके निधन के वर्ष को ही नहीं छापा गया है. पाठ में इस तरह दिखाया गया है कि वो अब भी उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं. इसको लेकर भी चूक राज्य शिक्षा केंद्र की सामने आई है. लगातार अपडेट होने के बाद भी साल 2016 और 2017-18 में निधन वर्ष को छापा ही नहीं गया है. अब तक ऐसे दिखाया गया है कि मानों वर्तमान में वो कार्य कर रहे हैं. ऐसे में गड़बड़ी को लेकर शिक्षकों ने भी सवाल खड़े किए हैं. राजधानी भोपाल में 2019-20 की ही किताबें नहीं पहुंची हैं तो वहीं पुराने सत्र की किताबों से ही छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं.

चूक में किया जा रहा सुधार
एक के बाद एक गड़बड़ी करने वाला स्कूल शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है. छपाई में चूक को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी का कहना है कि गलती हुई है. इसीलिए संज्ञान लेकर तुंरत सुधार के निर्देश दिए हैं.
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देशभक्तों के मामले में नजरिया बेहद गलत
भाजपा के पूर्व मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि कांग्रेस की सरकार और नेता केवल एक ही परिवार को महिमामंडित कर रहे हैं. उनके मन और मस्तिष्क में नेहरू परिवार ही है. अब्दुल कलाम जैसे देशभक्तों के मामले में इसी तरह का नजरिया है. ये कोई छोटी मोटी घटना नहीं है. जीवन परिचय को लेकर जन्म और मृत्य को लेकर वो भी राज्य शिक्षा केंद्र पत्र लिखकर इतिश्री कर दे ये बेहद आपत्तिजनक है. दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए.

बहरहाल, सवाल यही है कि देश के लिए प्रेरणास्त्रोत रही शख्सियतों के इतिहास को भी सही से नहीं पढ़ा पा रहा स्कूल शिक्षा विभाग, तो इस विभाग से और किस बात की उम्मीद की जाएं.
(रंजना दुबे के साथ टीकमगढ़ से राजीव रावत)

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First published: September 18, 2019, 7:36 PM IST
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