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Ganesh Chaturthi: गाय के गोबर से बनी गणेश की मूर्तियों की डिमांड, जानिए खासियत

एमपी की राजधानी भोपाल में गोबर गणेश की धूम मची हुई है. ये ईको फ्रेंडली होने के साथ-साथ कैरी करने में आसान हैं.

एमपी की राजधानी भोपाल में गोबर गणेश की धूम मची हुई है. ये ईको फ्रेंडली होने के साथ-साथ कैरी करने में आसान हैं.

Madhya Pradesh: एमपी की राजधानी भोपाल में गोबर गणेश की मांग बढ़ रही है. ये ईको फ्रेंडली गोबर गणेश कैरी करने में आसान हैं और इनसे पर्यावरण की सुरक्षा भी हो रही है. गाय के गोबर से बनी गोबर गणेश की प्रतिमाओं को इस गणेश उत्सव पर खास तौर पर तैयार किया गया है.

  • News18Hindi
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भोपाल. विघ्नहर्ता गणपति बप्पा शुक्रवार से घरों में विराजित हो रहे हैं. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में इस बार इको फ्रेंडली गणपति (Eco Friendly Ganapati) लोगों को पसंद आ रहे हैं. गाय के गोबर से बनी गोबर गणेश की मूर्तियों को इस गणेश उत्सव पर खास तौर पर  तैयार किया गया है. इन गणेश मूर्तियों की आज से धूमधाम से पूजा होगी.

पुराने शहर में रहने वाले जितेंद्र राठौर का परिवार गणेश प्रतिमाओं को गाय के गोबर से तैयार कर रहा है. जितेंद्र का कहना है कि गाय का गोबर पवित्र और शुद्ध होता है. लोग पवित्रता के साथ घरों में गणपति बप्पा को विराजित करते हैं. इस बार गाय के गोबर में थोड़ी सी माटी को मिलाकर गोबर गणेश को तैयार किया गया है. माटी और गोबर के मिश्रण को सांचे में भरकर हर प्रकार की गणेश प्रतिमा बनाई गई है. इसके बाद इको फ्रेंडली और हर्बल कलर से गणपति की प्रतिमाओं की साज-सज्जा की गई. उन्होंने बताय कि ईको फ्रेंडली गणपति प्रतिमाओं की खासी डिमांड है. अब तक करीब 300 से ज्यादा बड़ी प्रतिमाएं और 200 से ज्यादा छोटी प्रतिमाएं लोग घर ले जा चुके हैं. अब लोगों के ऑर्डर के बाद 100 से ज्यादा छोटी प्रतिमाओं को तैयार किया जा रहा है.

स्व सहायता समूह की महिलाओ को भी मिल रहा रोजगार

जितेंद्र राठौर के साथ स्व सहायता समूह की महिलाएं भी गोबर गणेश बना रही हैं. इन प्रतिमाओं के जरिए स्व सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है. इससे पहले गोबर से बनी हुई राखियां भी तैयार की गई थीं. इसके बाद दीपावली पर गोबर के दिए, तोरण, महालक्ष्मी की प्रतिमाएं, ओम और स्वास्तिक भी बनाने की तैयारियां शुरू की जाएंगी.

गोवंश को बचाने का संकल्प लें लोग

जितेंद्र राठौर का कहना है कि गोबर से गणेश की प्रतिमाओं को तैयार करने के पीछे एक उद्देश्य है. उद्देश्य है कि लोग गोवंश की रक्षा का संकल्प लें. अपनी संस्कृति और विरासत को सहेजने की दिशा में आगे बढ़ें. हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश दें. हमने शुरुआत वैदिक राखियों से की, अब इसे आगे ले जाएंगे. राठौर ने बताया कि लोग अब इस तरह की मूर्तियों की मांग करने लगे हैं. ये ईको फ्रेंडली भी हैं और इन्हें कैरी करने में परेशानी भी नहीं होती.

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