गणेशोत्‍सव: भोपाल में गोबर से तैयार होती हैं भगवान गणेश की इको फ्रेंडली प्रतिमाएं, महाराष्ट्र में बंपर सप्लाई
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गणेशोत्‍सव: भोपाल में गोबर से तैयार होती हैं भगवान गणेश की इको फ्रेंडली प्रतिमाएं, महाराष्ट्र में बंपर सप्लाई
भोपाल में गोबर से बनी गणेश प्रतिमाओं की डिमांड महाराष्ट्र में खूब है. सांकेतिक फोटो.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गौशाला में काम करने वाले एक शख्स ने गोबर के सही उपयोग के लिए गणेश (Ganesh) की प्रतिमाएं बनानी शुरू कर दीं. उनकी बनाई प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ती गई.

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भोपाल. पर्यावरण (Environment) को बचाने एक तरफ जहां माटी की गणेश (Ganesh) प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं. वहीं, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) में हुकुम सिंह पाटीदार और उनका परिवार गोबर से भगवान गणेश की 100 फीसदी इको फ़्रेंडली प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं. गोबर से तैयार इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं आकर्षक होने के साथ ही लोगों को पसंद भी आ रही हैं. मध्य प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों में इन प्रतिमाओं की खासी डिमांड होने का दावा किया जा रहा है.

गोबर से अब तक सभी लोगों ने कंडे और खाद ही बनते हुए देखा है, लेकिन हुकुम सिंह पाटीदार गोबर से भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमा तैयार कर रहे हैं. हुकुम सिंह का कहना है कि मूर्तियां तैयार करने के लिए दिसंबर के महीने से ही काम शुरू कर देते हैं. पहले गोबर से कंडे तैयार किए जाते हैं. कंडों के सूख जाने पर मशीन में पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है.

इस तरह तैयार होती है मूर्ति
एक किलोग्राम गोबर के पाउडर में 50 ग्राम मैदा यानी लकड़ी का पाउडर मिलाया जाता है. फिर इसे पानी से अच्छी तरह से गूथ कर लोई तैयार की जाती है. लोई को सांची में तेल लगा कर प्रतिमा का आकार देते हैं. सांचे से निकालकर बनी प्रतिमा को तैयार होने में करीब 15 दिन लगते हैं. मूर्ति के अच्छी तरह से सूख जाने के बाद इसमें हर्बल रंगों से ही सजावट की जाती है.
हर साल महाराष्ट्र से आते हैं 5 हज़ार ऑर्डर


हुकुम सिंह बीते 6 सालों से गोबर से भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार कर रहे हैं. इससे पहले हुकुम सिंह शारदा विहार स्थित कामधेनु गौशाला संभालते थे. हुकुम सिंह का कहना है कि गोबर का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा था. गोबर के सही उपयोग के लिए इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा तैयार करने का विचार आया. इस पहल में पत्नी, बेटे और बेटियों का भी साथ मिल रहा है. गोबर से तैयार गणेश प्रतिमाओं की मध्य प्रदेश के कई शहरों के साथ ही महाराष्ट्र में भी खासी डिमांड है. हर साल महाराष्ट्र से करीब 5000 प्रतिमाओं के आर्डर आते थे, लेकिन इस बार कोरोना संकट काल के चलते ट्रांसपोर्ट सुविधाएं शुरू न होने से मूर्तियों के आर्डर पर असर पड़ा है. उन्‍होंने इस बार केवल 1500 प्रतिमाएं ही तैयार की हैं.
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