Bhopal : फर्ज़ी ज़मानतदारों का गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा, अब तक करा चुरा है 58 की ज़मानत
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Bhopal : फर्ज़ी ज़मानतदारों का गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा, अब तक करा चुरा है 58 की ज़मानत
ये गिरोह इस काम की बकायदा वहीं रिहर्सल करता था.

आरोपियों (accussec) से जाली बही, सील, इंक पैड और आधार कार्ड ज़ब्त किए गए हैं. ये लोग दो साल से इस अवैध धंधे में लिप्त हैं और अब तक 58 से ज़्यादा मामलों में ज़मानतदार (bail) बन चुके हैं.

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भोपाल. भोपाल की क्राइम ब्रांच (crime branch) पुलिस ने फर्जी जमानतदार गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गिरोह के 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे भारी मात्रा में जाली ऋण पुस्तिका (बही), सील और मुद्रा जब्त की हैं.पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग भोपाल जिला अदालत  के बाहर फर्जी जमानत का काम कर रहे हैं. उसके बाद पुलिस (police) ने विशेष अभियान के तहत कोर्ट के बाहर अवैध तरीके से जमानत कराने वाले गिरोह के लोगों को पकड़ा. इसमें 2 महिला और 8 पुरुष हैं, जो सड़क किनारे बैठे अपना धंधा चला रहे थे. इनसे जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि आरोपी या उसके परिवार को जब ज़मानत की जरूरत पड़ती थी तो वह  फर्जी बही लेकर  जमानत कराते थे. इसका उन्हें पैसा मिलता है.

फर्जी बही गणेश मकवाना नाम का युवक देता था. अन्य आरोपियों के नाम संजय श्रीवास्तव, दुर्गेश उर्फ कपिल, माया बाई यादव, नरेश उर्फ कालीचरण, संदीप, रमेश यादव, लोकेश मीणा,राजेन्द्र सिंह मीणा और आशिया मीणा हैं. इनके पास से जाली बही, सील, इंक पैड और आधार कार्ड ज़ब्त किए गए हैं. ये लोग दो साल से इस अवैध धंधे में लिप्त हैं और अब तक 58 से ज़्यादा मामलों में ज़मानतदार बन चुके हैं.

कैसे करते थे काम
राजेन्द्र मीणा यह तय करता था कि ज़मानतदार कौन बनेगा. जब यह तय हो जाता है कि यह काम कौन करेगा, उसके बाद राजेन्द्र मीणा जिस आरोपी की जमानत लेना है उसके परिवार वालों से मिलवाता था और जिसकी जमानत लेना है उसके बारे में उसके परिवार से पूरी जानकारी लेता था. जानकारी लेने के बाद जमानतदार, जिसकी जमानत लेना होती है उसका रिश्तेदार या पारिवारिक संबंध वाला बन जाता था. ये गिरोह इस काम की बकायदा वहीं रिहर्सल करता था. जब पूरी तरह से जमानतदार और परिवार वाले आपस में मिल जाते थे उसके बाद कोर्ट में जमानत के लिए खड़े होते थे. वो इस तरीके का व्यवहार करते थे जिससे सभी को यह विश्वास हो जाए कि जमानतदार और परिवार वाले एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं. कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि इन लोगों ने कोर्ट के सामने विश्वास दिलाने के लिए यह बात भी कही कि " आज जमानत कराए दे रहा हूँ आज के बाद कभी मुझे मत बुलाना, इसको जेल में ही सड़ने देना."



पैसे की हिस्सा-बांटी
इस तरह की वार्तालाप से सभी को यह यकीन हो जाता था कि वास्तव में यह इनका हिमायती है. वास्तविक रूप से एक दूसरे को न ये जानते हैं और न ही पहचानते हैं. कोर्ट के बाहर निकलकर ये मनमाने पैसे परिवार वालों से वसूलते थे.जमानतदार उसके बाद राजेन्द्र मीणा से फिर संपर्क करता था और उसके बाद अगले ग्राहक की तलाश शुरू हो जाती थी.
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