Good News: अब कॉलोनाइजरों पर होगी FIR, 7 साल सजा और 10 लाख का जुर्माना, जानिए क्या है नए एक्ट में

मध्य प्रदेश के कॉलोनाइजर अब कस्टमर की आंखों में धूल नहीं झोंक पाएंगे. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश के कॉलोनाइजर अब कस्टमर की आंखों में धूल नहीं झोंक पाएंगे. (सांकेतिक तस्वीर)

Good News: सरकार ने वैध-अवैध कॉलोनियों से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है. अब कोई भी कॉलोनाइजर धोखाधड़ी या मंजूर हुए ले-आउट में गड़बड़ नहीं कर सकेगा. ऐसा करने पर उसे 7 साल की सजा होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 12:29 PM IST
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भोपाल. अब अवैध कॉलोनाइजर के साथ-साथ गड़बड़ी करने वाले वैध कॉलोनाइजरों पर भी कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है. सरकार ने मप्र नगर पालिका विधि संशोधन विधेयक 2021 को मंजूरी दे दी है. इस नए विधेयक में अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को रोकने के साथ-साथ वैध कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों के अधिकारों को भी सुरक्षा दी गई है. इस विधेयक में वैध कॉलोनियों को लेकर 2 प्रावधान किए गए हैं.

दो प्रावधानों में से पहला है- यदि कॉलोनाइजर ने कॉलोनी में किसी तरह का विकास कार्य या सड़क अधूरी छोड़ी तो उस कॉलोनी में पड़े अपने किसी खाली प्लॉट को किराए पर देकर उससे मिली राशि से वह निर्माण कार्य पूरा कराना होगा या राजस्व नियमों के तहत राशि की वसूली होगी. दूसरा है- कॉलोनाइजर ने मंजूर ले-आउट का यदि उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ FIR दर्ज होगी, सात साल तक सजा और दस लाख रुपए जुर्माना होगा.

इस तरह चलता रहा एक्ट, कोर्ट ने रद्द की थी कानून की धारा



गौरतलब है कि राज्य सरकार ने वर्ष 1998 में मप्र कॉलोनाइजर नियम 1998 में नियम-15(क) बनाया था. इससे 30 जून 1998 तक बनी अवैध कॉलोनियों को वैध किया गया. इसके बाद 30 जून 2002 तक, 30 जून 2007 तक, 21 दिसंबर 2012 तक और आखिरी बार दिसंबर 2016 तक कट चुकी अवैध कॉलोनियों को वैध करने के फैसले लिए गए. अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी हुई. नगरीय निकायों ने इस सिलसिले में आपत्तियां सुनी.

हाईकोर्ट ने दिया अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश



इसके बाद 1788 कॉलोनियों के ले-आउट, विकास शुल्क तय किए गए. इन कॉलोनियों से विकास शुल्क लेकर और राशि जमा कराने के बाद नियमितीकरण शुरू किया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद 3 जून 2019 को राज्य शासन की धारा 15 (क) को रद्द कर दिया. हाई कोर्ट ने नगर पालिक अधिनियम 1956 की धारा 292-ई के प्रावधान के तहत धारा 15(ए) को अवैध करार दिया. इसके साथ ही अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए. इससे नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया ठप पड़ गई. अब बताया जा रहा है कि नए रूल में कट ऑफ डेट को नवंबर 2028 किया जा सकता है.

इन बातों का कॉलोनाइजर को रखना होगा ध्यान





विधेयक में ले-आउट के बारे में स्पष्ट किया गया है कि यदि कॉलोनी में कहीं खुली जगह या ओपन एरिया, सड़क, हॉल या कुछ और जगह दर्शित हो, जिसका कॉलोनाइजर ने दूसरा इस्तेमाल कर लिया है तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. ऐसी स्थिति में अवैध कॉलोनी के कॉलोनाइजर पर जो कार्रवाई होगी, वही वैध कॉलोनी के कॉलोनाइजर पर भी की जाएगी. नए बिल में इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है. बता दें कि एक दिन पहले ही कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दी है.
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