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सांसद बने रहेंगे जी एस डामोर, विधायक पद से देंगे इस्तीफ़ा

जी एस डामोर
जी एस डामोर

नियम के मुताबिक किसी दूसरे पद पर चुने जाने के 14 दिन के भीतर डामोर को किसी एक पद से इस्तीफा देना था

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झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट से चुनाव जीते बीजेपी के जी एस डामोर सांसद बने रहेंगे. उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है. डामोर झाबुआ सीट से विधायक थे. उनके इस एलान के साथ ही मध्य प्रदेश में अब झाबुआ सीट पर उप चुनाव होना तय है.

सस्पेंस ख़त्म -  मध्य प्रदेश की झाबुआ विधानसभा सीट सेर अब उप चुनाव होगा. हाल ही में झाबुआ-रतलाम सीट से सांसद चुने गए बीजेपी के जी एस डामोर  ने विधानसभा सीट छोड़ने का फैसला किया है. डामोर झाबुआ सीट से विधायक थे. उनके लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से सस्पेंस बना हुआ था कि वो विधान सभा सीट छोड़ते हैं या लोकसभा सीट.

लोकसभा जाएंगे डामोर -जी एस डामोर सांसद बने रहेंगे. उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है. डामोर दिल्ली गए हुए थे. वहां पार्टी आलाकमान से बात करन के बाद उन्होंने इसका एलान किया. नियम के मुताबिक किसी दूसरे पद पर चुने जाने के 14 दिन के भीतर डामोर को किसी एक पद से इस्तीफा देना था. मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान के कारण अटकलों का दौर चल रहा था कि डामोर विधायकी छोड़ते हैं या सांसद के पद से इस्तीफ़ा देंगे.



डामोर के लोकसभा चुनाव जीतते ही यहां उपचुनाव की स्थिति बन गई थी. डामोर झाबुआ के विधायक हैं और फिर सांसद भी चुन लिए गए.. नियम के मुताबिक ऐसे हालात में चुनाव जीतने के 14 दिन के भीतर  एक सीट छोड़ना होता है.
सियासी समीकरण -मध्य प्रदेश के मौजूदा सियासी समीकरण को देखते हुए बीजेपी तय नहीं कर पा रही थी कि वो डामोर को किस पद पर बनाए रखे. झाबुआ-रतलाम मध्य प्रदेश की वही सीट है जो कांग्रेस का तीसरा गढ़ मानी जाती है. लेकिन 2014 के चुनाव में बीजेपी के दिलीप सिंह भूरिया ने कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया को हरा दिया था. कुछ समय बाद दिलीप सिंह का निधन होने के कारण सीट खाली हुई और 2015 में उप चुनाव में कांतिलाल भूरिया जीत गए. अभी हाल ही में हुए  लोकसभा चुनाव में  बीजेपी के जी एस डामोर ने कांतिलाल भूरिया को पराजित कर दिया.
एक व्यक्ति-एक पद -  रतलाम झाबुआ सीट से चुने गए बीजेपी सांसद जी एस डामोर पहले से विधायक निर्वाचित हैं. वो 2018 के विधानसभा चुनाव में झाबुआ से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते. लोकसभा चुनाव में पार्टी ने फिर उन पर भरोसा जताया.

बीजेपी का गणित- 

मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के 114 और बीजेपी के 109 विधायक हैं. बीजेपी के कांग्रेस से सिर्फ 5 विधायक कम हैं. यही वजह है कि उसके नेता लगातार कमलनाथ सरकार को गिराने की धमकी दे रहे हैं. इसलिए अनुमान था कि डामोर शायद विधायक पद ना छोड़ें.

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