भोपाल: Corona को दावत दे रहा GMC कैंपस, वेस्ट मैनेजमेंट में लापरवाह बना हमीदिया प्रबंधन

वेस्ट मैनेजमेंट में लापरवाह बना हमीदिया प्रबंधन (फाइल फोटो)
वेस्ट मैनेजमेंट में लापरवाह बना हमीदिया प्रबंधन (फाइल फोटो)

भोपाल के हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) के अंदर ही तमाम उपायों के बावजूद लगभग डेढ़ दर्जन स्टाफ को कोरोना अपना शिकार बना चुका है. इसके साथ ही कैंपस के 150 से ज्यादा स्टाफ कारेंटाइन भी हो चुके हैं. इसके बावजूद संक्रमण को रोकने के लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग की ये आशंका है कि जून के महीने में कोरोना के मरीजों की संख्या में बड़ा उछाल आएगा. इसके लिए सरकार अपने स्तर पर तैयारी करने में जुटी हुई है. वहीं दूसरी तरफ सूबे का नामी अस्पताल हमीदिया कोरोना संक्रमण को खुद दावत देने में लगा है. हमीदिया प्रबंधन वेस्ट मैमेजमेंट के प्रति बेहद लापरवाह बना हुआ है. आलम ये है की जूनियर डॉक्टर्स के हास्टलों के आगे कई दिनों तक संक्रमित कचरे का ढ़ेर पड़ा रहता है और कचरा बीनने वाले भी इस कचरे को बिना किसी रोक-टोक के बीनते हैं. अंदाजा लगाया जा सकता है की इस तरह से संक्रमण कैसे और कितना फैल सकता है.

वेस्ट मैनेजमेंट में लापरवाही
राजधानी भोपाल का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल हमीदिया ही है. इस अस्पताल में कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों का इलाज कराने भी मरीज प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आते हैं. मरीजों को इंफेक्शन के खतरे से बचाने अस्पताल को दो विभागों में यानी कोविड और नॉन कोविड वार्ड में बांटा गया है. कैंपस के अंदर से ही तमाम उपायों के बाद लगभग डेढ़ दर्जन स्टाफ को कोरोना अपना शिकार बना चुका है. इसके साथ ही कैंपस के 150 से ज्यादा स्टाफ कारेंटाइन भी हो चुके हैं. इसके बावजूद संक्रमण को रोकने के लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है. बात मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की करें तो मामले पर हमीदिया अस्पताल में लगातार लापरवाही हो रही है. दो दिन पहले यहां का कचरा आदमपुर खंती पंहुचाया गया था जिसके बाद निगम ने चालान काटा और बात रफा दफा हो गई. लेकिन अभी भी जूडा के एच ब्लॉक हॉस्टल के सामने तीन दिनों से अस्पताल का संक्रमित कचरा पड़ा हुआ है जिसको प्रोपर्ली डिस्ट्रॉय करने कोई ध्यान नहीं दे रहा. यहीं से रोजाना डॉक्टर्स और स्टूडेंट का अस्पताल से हॉस्टल और स्टाफ क्वार्टर की ओर आना जाना लगा रहता है. इतना ही नहीं आवारा कुत्ते और कचरा बीनने वाले भी इस ढ़ेर के अंदर घंटों बिताते हैं.

संक्रमित स्टाफों को जारी किया था नोटिस
कोरोना का खौफ दो महीने पहले से हमीदिया में इतना छाया हुआ था की जो भी स्टाफ कोरोना से संक्रमित हुआ उनसे अस्पताल ने लिखित में संक्रमित होने का कारण लिया. सभी संक्रमित स्टाफों को हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था. एक तरफ तो इस बात पर पूरा ख्याल रखा जा रहा है की संक्रमण की चपेट से स्टाफ बचा रहे वहीं दूसरी तरफ हाल ये है की कैंपस हॉस्टल के पास पड़े पीपीई किट, ग्लव्ज,मास्क सहित संक्रमित मेडिकल वेस्ट के कारण स्टाफ समेत ट्रीटमेंट कराने के लिए आने वाले लोगों की जान पर भी कोरोना का खतरा मंडराने लगा है. जीएमसी के एच ब्लॉक हॉस्टल के सामने से कमला नेहरू गैस राहत अस्पताल की तरफ जाने वाले मुख्य रास्ते में अस्पताल से निकले कचरे से भरे बड़े बैग खुले में रखे जा रहे हैं. इन बैग को कुत्ते फाडते हुए कचरे को फैला देते हैं. ये लापरवाही स्टाफ पर भारी पड सकती है. जीएमसी के स्टूडेंट्स के साथ ही कमला नेहरू के स्टाफ ने डंपिग स्टेशन को हटाकर रोजाना सफाई कराने की मांग की है पर अभी तक अस्पताल की तरफ से कोई कदम नहीं उठाए गए हैं.



बढ़ रहा संक्रमण का खतरा
जीएमसी के एच ब्लॉक हॉस्टल से कमला नेहरू जाने वाले रास्ते में लगे मेडिकल वेस्ट के ढेरों से कचरा बीनने वाले लोग कबाड खोजते रहते हैं. वो घंटो इस कबाड़ के साथ बिताते हैं. इस कचरे में संक्रमण फैलाने के लिए पर्याप्त सामग्री है जो व्यक्ति को कोरना संक्रमित बना सकती है. पीपीई किट, सिरिंज, सहित संक्रमण फैलाने वाली सामग्री से कचरा बीनने वालों को कोरोना संक्रमण हो सकता है और अगर बीनने वाले संक्रमित हो गए तो शहर में आसानी से संक्रमण कम्यनुटी और कस्टर स्रप्रैड के जरिए फैल सकता है. ऐसे में संक्रमण की चेन को तोड़ना भी जिम्मेदारों के लिए काफी मुश्किल हो जाएगा.

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