ये है हनुमान जी का चमत्कारी मंदिर, आज तक यहां एक भी व्यक्ति नहीं हुआ कोरोना संक्रमित


मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटकार लगे रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम छींद में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटकार लगे रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम छींद में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है

Madhya Pradesh News: इस गांव पर कृपा ऐसी है क‍ि एक भी व्यक्ति कोरोना महामारी से संक्रमित नहीं हुआ. जानिए क्यों देश में जहां महामारी फैलने से हाहाकार मची हुई है. हर जगह कोरोना का संक्रमण फैल चुका है, लेकिन हनुमान जी की कृपा से रायसेन के छींद गांव सहित आसपास के गांव स्वास्थ है. छींद में आज तक एक भी मरीज संक्रमित नही हुआ.

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देवराज दुबे

मध्‍य प्रदेश के भोपाल में प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान जी यहां विशाल पीपल के पेड़ के नीचे दक्षिणमुखी बिराजे हुए हैं. हनुमान जी को रोगों से दूर रखने वाला कहा गया है. हनुमान जी अनुशासित जीवन शैली को पसंद करते हैं, जो भक्त अनुशासित जीवन शैली को जीता है और हनुमान जी की आराधना करता है उससे भगवान हनुमान बहुत प्रसन्न रहते हैं. हनुमान भक्त स्वस्थ्य और निरोग रहते हैं नासे रोग हरे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमंत बलबीरा यह पंक्ति इस कोरोना काल मे यहां सत्य साबित होते दिख रही है. 200 से अधिक साल पुराने इस छींद धाम के मंदिर में दर्शन करने लोग काफी दूर-दूर से पहुंचते है. क्या है यहां की ओर महिमा देखिए?

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटकार लगे रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम छींद में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है यह हनुमान जी छींद वाले हनुमान जी के नाम से जाने जाते हैं. हनुमान जी की यहां पर कृपा इस तरह से है कि इस गांव में अभी तक संक्रमण नहीं फैलने दिया है. वैसे हर जगह संक्रमण इतना फैल गया है कि गली- गली गांव-गांव तक कोरोनावायरस ने पैर पसार लिए है, लेकिन छींद बाले दादा जी की कृपा से यहां आज तक एक भी व्यक्ति इस महामारी की चपेट में नहीं आया है. पूरे देश से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं. खासकर मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की कतारें तड़के चार बजे से लगी रहती हैं.

विशेष कार्यक्रम होते हैं मेला लगता है
हनुमान जन्मोत्सव पर हर वर्ष यहां विशेष कार्यक्रम होते है. इस बार संक्रमण के कारण प्रवेश बंद है. लोग परिवार और दोस्तों के साथ आते हैं. दर्शन कर पूजा अर्चना करते हैं. कई श्रद्धालु भण्डारे का आयोजन कर प्रसादी भी बांटते हैं. यहां पर दिन रात भजन, कीर्तन आयोजित होते हैं और छींद में मेला लगा रहता है. यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है.

दुर्लभ प्रतिमा किसान को खेत मे मिली

छींद वाले हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा के बारे में बताया जाता है कि यह दुर्लभ प्रतिमा जिस स्थान पर स्थापित है पहले वहां कृषि भूमि थी. इस भूमि के मालिक को बजरंगबली की प्रतिमा खेत में काम करते हुए प्राप्त हुई. तदोपरांत उस किसान ने उसी स्थान पर छोटी सी मढ़िया बनाकर हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना कर दी. उस दिन से यहां पूजा-पाठ होने लगा और छींद धाम की महिमा चारों तरफ बढ़ती चली गई. देखते ही देखते स्थान चमत्कारिक हो गया. लाखों की संख्या में भक्तों को आना प्रारंभ हो गया.



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गांव में एक भी कोरोना से संक्रमित नहीं हुआ

यहां के स्थानीय निवासी दिगपाल सिंह पटेल ने बताया की अभी तक इस गांव में कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं फैला है. एक भी व्यक्ति संक्रमित नहीं हुआ है और आसपास के गांव भी सुरक्षित है. दादाजी महाराज की कृपा है ऐसी बनी रहे छींद गांव और आप पास बनी है पूरे देश मे बनी रहे.
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