MCU महाघोटाला: मुख्य आरोपी पूर्व कुलपति बीके कुठियाला को राहत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक कुर्की पर रोक

ईओडब्ल्यू ने एमसीयू के पूर्व कुलपति बीके कुठियाला समेत बीस आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की थी. कुठियाला पर 45 करोड़ के घोटाले का आरोप है.

Manoj Kumar Rathor | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 4, 2019, 6:47 PM IST
MCU महाघोटाला: मुख्य आरोपी पूर्व कुलपति बीके कुठियाला को राहत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक कुर्की पर रोक
23 सितंबर को भोपाल जिला कोर्ट में होगी MCU महाघोटाला पर सुनवाई.
Manoj Kumar Rathor | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 4, 2019, 6:47 PM IST
भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (MCU) महाघोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व कुलपति बीके कुठियाला (Former Vice Chancellor BK Kuthiala) को भोपाल जिला कोर्ट (Bhopal District Court) से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनकी कुर्की की कार्रवाई को रोक दिया है और ये तब तक रूकी रहेगी, जब तक सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में लगी अग्रिम जमानत याचिका पर कोई फैसला नहीं आ जाता.

एमसीयू में हुए घोटाले के मुख्य आरोपी बीके कुठियाला हैं. आरोप है कि उन्होंने कुलपति के पद पर रहते हुए यूनिवर्सिटी में कई घोटाले किए हैं. यात्रा से लेकर प्रमोशन तक में आर्थिक अनियमितता का आरोप है.

ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में किया था आवेदन
ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में कुठियाला की कुर्की की कार्रवाई करने के लिए आवेदन दिया था. कोर्ट ने आज मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए. जब तक सुप्रीम कोर्ट में लगी अग्रिम जमानत याचिका का फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी तरह के कुर्की की कार्रवाई पर जिला कोर्ट से फैसला नहीं दिया जाएगा. अब मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को है. जिला कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई हो जाएगी.एक तरह से कुछ दिनों के लिए कोर्ट ने कुठियाला को राहत दी है.

अभी तक क्या हुआ?
ईओडब्ल्यू ने एमसीयू के पूर्व कुलपति बीके कुठियाला समेत बीस आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की थी. कुठियाला के छोड़कर बाकी के आरोपियों की प्रशासनिक जांच यूनिवर्सिटी की टीम कर रही है. कुठियाला पर आपराधिक आरोप है, इसलिए उनसे पूछताछ के लिए ईओडबल्यू की टीम ने उनके चड़ीगढ़ स्थित घर के साथ कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी थी. जब वह कहीं नहीं मिले, तो उन्हें कई बार नोटिस भी भेजा गया. नोटिस का जबाव मिला जरूर, लेकिन पूछताछ के लिए कुठियाला ने कई बहाने बनाए. ऐसे में ईओडब्ल्यू ने कुठियाला को फरार घोषित कर दिया. कोर्ट ने भी उनके फरारी की उद्घोषणा कर दी. इस कार्रवाई के बाद ईओडब्ल्यू ने कुर्की की कार्रवाई के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था. कुर्की की कार्रवाई से बचने के लिए कुठियाला कोर्ट में भी पेश हुए और ईओडब्ल्यू के ऑफिस भी पूछताछ के लिए पहुंचे. ऐसे में कोर्ट ने कुर्की की कार्रवाई को लेकर सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलों को सुना. कोर्ट ने फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक कोई भी फैसला नहीं सुनाने का निर्णय लिया है.

कुठियाला के वकील ने कही ये बात
Loading...

बीके कुठियाला के वकील प्रमोद सक्सेना ने कहा है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, तब तक जिला कोर्ट ने कुर्की की कार्रवाई पर रोक लगाई है. ईओडब्ल्यू ने कोर्ट को पूछताछ के लिए कुठियाला के पेश होने की जानकारी नहीं दी थी. कुठियाला कोर्ट में पेश हो गए और ईओडब्ल्यू की पूछताछ में भी शामिल हुए. ऐसे में उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई का हमने विरोध किया था. अब उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई का मामला बनता नहीं है.

आर्थिक फायदे के लिए 45 करोड़ की लागत बढ़ी
नए कैंपस के निर्माण के लिए एमपी हाउसिंग बोर्ड को 150 करोड़ का प्रोजेक्ट दिया गया था. नए कैंपस को 50 एकड़ में बनाया जा रहा है. निर्माण काम लगभग पूरा हो चुका है. कुठियाला के अवैध हस्तक्षेप की वजह से निर्माण में 40 से 45 करोड़ रुपए की लागत ज्यादा आ गई. ईओडब्ल्यू ने एमपी हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों से पूछताछ की और उनके बयान भी दर्ज किए हैं. जांच में कुठियाला के हस्तक्षेप में धांधली का खुलासा भी हुआ है.

ये भी पढ़ें-अपने अंतर्कलह से गिर जाएगी कमलनाथ सरकार-नरेन्द्र सिंह तोमर

बड़ा खुलासा: 400 करोड़ के मालिक रिटायर्ड SDO सुरेश उपाध्याय के रोहाणी परिवार से थे व्यापारिक संबंध!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए भोपाल से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 4, 2019, 6:44 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...