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शर्मनाक! मध्य प्रदेश में हैरिटेज खंडहर में तब्दील, ओरछा का शिव मंदिर भूसा घर बना, कैग रिपोर्ट में खजुराहो पर भी संकट

कैग ने कहा - सदर मंजिल के संरक्षण में मौलिकता का ध्यान नहीं रखा. (सदर मंजिल की फाइल फोटो)

कैग ने कहा - सदर मंजिल के संरक्षण में मौलिकता का ध्यान नहीं रखा. (सदर मंजिल की फाइल फोटो)

MP News: नियंत्रक एवं महालेखाकार (कैग, CAG) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. खजुराहो, ओरछा, इस्लाम नगर समेत कई शहरों क ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

कैग ने 506 स्मारकों में से 189 स्मारक, 22 संग्रहालय और 6 अभिलेखागारों का पहली बार ऑडिट किया है.
म्यूजियम और अभिलेखागारों के प्रबंधन पर भी कैग ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
कांग्रेस का आरोप, शिवराज सरकार की रूचि सिर्फ शहरों के नाम बदलने में, विरासत के संरक्षण से भाजपा को कोई मतलब नहीं

भोपाल. हमारी सभ्यता और संस्कृति के निशान जिन स्मारकों और धरोहरों में सहेजे हुए हैं, वे संकट में हैं. ओरछा के शिव मंदिर को भूसा घर बना दिया गया है तो खजुराहो की विश्व विरासत में प्राइवेट कैफे खोल दिया गया. जबलपुर में विष्णु वराह मंदिर में कब्जा कर गोशाला और दुकानें खुल गई हैं. इस पर शासन-प्रशासन सब मौन है.

विरासतों की ऐसी चौंकाने वाली स्थिति का खुलासा नियंत्रक एवं महालेखाकर (कैग) की रिपोर्ट में हुआ है. यह रिपोर्ट सोमवार को विधानसभा के पटल पर रखी गई. रिपोर्ट में सरंक्षण के सरकारी दावों की पोल भी खोली गई है. स्थिति इतनी बदतर है कि 64 स्थान अतिक्रमण की चपेट में हैं. म्यूजियम और अभिलेखागारों के प्रबंधन पर भी कैग ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. यहां आगजनी जैसे हालात से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन व्यवस्था नहीं है. फायर अलार्म सिस्टम गायब है तो वर्षों से यहां रखे दस्तावेजों का रखरखाव तक नहीं हुआ. सरकार की उदासीनता इतनी ज्यादा है कि दतिया के सूर्य मंदिर, मंदसौर किला, छतरपुर का भीमकुंड, रायसेन में गिन्नौरगढ़ किला, ग्वालियर की छत्रियां, डरफिन की सराय और भोपाल के लालघाटी, गोंदरमऊ और धरमपुरी के शैलाश्रय का सर्वे सालों से अधूरा है. इस वजह से इनका संरक्षण नहीं किया जा रहा है.

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कैग रिपोर्ट में विश्व विरासतों की बदहाल तस्‍वीर आई सामने

1. जगदीशपुर (पूर्व नाम इस्लाम नगर) में गोंड महल परिसर के 100 मीटर के भीतर लोगों के घर बने हुए हैं. यहां चमन महल, रानी महल और किलेबंदी की दीवार पर न तो साइन बोर्ड है और न ही गार्ड.

2. ओरछा के जुझार महल में एक जज और पालकी महल में निगम के कर्मचारी का निवास है. विश्व विरासत स्थल खजुराहो में महाराजा प्रताप सिंह की छत्री में प्राइवेट कैफे चलाया जा रहा है.

3. जबलपुर के मझोली स्थित विष्णु वराह मंदिर में कब्जा कर गोशाला और दुकानें चलाई जा रही हैं.

4. इंदौर के लालबाग पैलेस और चंपा बावड़ी परिसर में पुराने वाहनों का जमावड़ा है.

5. भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कंपनी ने सदर मंजिल के संरक्षण में मौलिकता का ध्यान नहीं रखा. खुद सरकार ने कैग को बताया कि इस वजह से सदर मंजिल का मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है.

6. बीते 10 साल में भोपाल की ऐतिहासिक इमारत ताज महल को हेरिटेज होटल नहीं बनाया जा सका. अब देखरेख और संरक्षण के अभाव में स्मारक जर्जर हो रहा है.

7. भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित म्यूजियम की कांस्य गैलरी दीमक के उपचार के लिए सालभर से बंद है. सेंट्रल आर्काइव ऑफिस की छत पर पानी जमा है.

526 सरंक्षित स्मारक पर 43 तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं
प्रदेश सरकार ने 526 स्मारकों को संरक्षित करने का नोटिफिकेशन जारी किया है. साथ ही 43 संग्रहालय हैं और 6 अभिलेखागार हैं. कैग ने इनमें से 189 स्मारक, 22 संग्रहालय और सभी 6 अभिलेखागारों का पहली बार ऑडिट किया है. इस आडिट में कैग ने बताया कि 105 में केयर टेकर हैं. 79 में सुरक्षा दीवार नहीं है तो 89 में साइन बोर्ड और 134 में दंडात्मक बोर्ड नहीं लगाए गए हैं. 43 में सड़क तक नहीं मिली. यही नहीं, सरकार ने कैग को 63 स्मारक ऐसे भी मिले जिनके संरक्षण का दावा सरकार ने किया था, लेकिन हकीकत में संरक्षण सिर्फ कागजों में हुआ है.

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कांग्रेस का पलटवार, नाम बदलने की बजाय सरंक्षण करे सरकार
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने कैग की रिपोर्ट पर कहा कि भाजपा सिर्फ दिखावा करती है. सरकार बताए कि जिन शहरों के नाम बदले गए, वहां की धरोहरों को सहेजने के लिए क्या किया? दरअसल, भाजपा इतिहास नष्ट करना चाहती है.

Tags: Bhopal news, CAG Report, Madhya pradesh news

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