MP Honey Trap Case: कितने किरदार, किसने फंसाया और कौन फंसा, पढ़िए पूरी कहानी

हाईकोर्ट को सौंपे गए लिफाफे में 40 रसूखदारों की कुंडली बंद है.

हाईकोर्ट को सौंपे गए लिफाफे में 40 रसूखदारों की कुंडली बंद है.

Honey Trap Case: मध्‍य प्रदेश का हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप कांड कमलनाथ सरकार के दौरान खुला था. अब तक इसमें कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, तो एसआईटी ने हाईकोर्ट को बंद लिफाफे में 40 रसूखदार लोगों के नाम सौंपे हैं. वहीं, एसआईटी ने पूर्व सीएम कमलनाथ को 2 जून को पेन ड्राइव के साथ अपने पास बुलाया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश का बहुचर्चित हनी ट्रैप केस (Honey Trap Case) फिर जिन्‍न की तरह बाहर निकल कर आया है. पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) के पेन ड्राइव वाले बयान के बाद एसआईटी (SIT) सक्रिय हो गई है, लेकिन अभी तक इस मामले में कितने लोग हनी ट्रैप के शिकार हुए, किसने फंसाया, कौन फंसा और अब आगे क्या होगा, जैसे सवाल हैं. हालांकि इस कहानी के जुड़ा हर किरदार सच उगल रहा है. कई आरोपी जेल में हैं तो कई संदिग्ध आरोपी एक बंद लिफाफे में अपने नाम के खुलासे का इंतजार कर रहे हैं.

बता दें कि मध्‍य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ हनी ट्रैप की पेन ड्राइव अपने पास होने का दावा किया था. इस दावे के बाद एसआईटी सक्रिय हो गई और अब वह 2 जून को कमलनाथ के बयान लेगी और उनसे उस हार्ड डिक्स को भी जब्‍त तक करेगी. इस हनी ट्रैप की कहानी की शुरुआत कमलनाथ सरकार के दौरान हुई थी. अब बीजेपी सरकार आने के साथ ही इस कहानी की जांच धीमी हो गई है. कमलनाथ के पेन ड्राइव वाले बयान से फिर हनी ट्रैप का जिन्‍न बाहर निकला है और अब इसने सियासी बवाल भी मचाना शुरू कर दिया है.

लिफाफे में 40 रसूखदारों की कुंडली

अगस्त 2020 में प्रदेश के हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप केस की जांच कर रही एसआईटी के तत्कालीन चीफ राजेंद्र कुमार ने रिटायरमेंट से पहले हाईकोर्ट को बंद लिफाफा सौंपा था. इस लिफाफे में 40 रसूखदारों की कुंडली बंद है. इसमें कई राजनेता, आईएएस और आईपीएस अफसरों के नाम बताए जा रहे हैं. यदि इन नामों की जांच की जाती है तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं. इनमें प्रदेश के कई बड़े अफसर, दो रिटायर्ड एडीशनल चीफ सेक्रेट्री सहित कई मौजूदा अफसर भी शामिल हैं.
ऐसे हुआ था हनी ट्रैप का खुलासा

2019 में नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह ने इंदौर पुलिस से शिकायत की थी कि उसकी सीडी बनाकर ब्लैकमेल किया जा रहा है. इस शिकायत पर पुलिस ने सबसे पहले उस लड़की को गिरफ्तार किया जिसके साथ हरभजन सिंह की सीडी थी. इसके बाद उस लड़की से पूछताछ के बाद पुलिस ने श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्लिन जैन, आरती दयाल, बरखा सोनी और ड्राइवर अभिषेक ठाकुर को गिरफ्तार किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन हुआ और भोपाल स्थित आरोपी महिलाओं के घर पर दबिश देकर लाखों रुपए नकदी और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद किए गए. इन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में हनी ट्रैप के कई वीडियो थे और इन्हीं वीडियो के आधार पर एसआईटी ने हाईकोर्ट में बंद लिफाफे में 40 रसूखदारों के नाम दिए हैं.

हनी ट्रैप के किरदारों की कहानी



हाल ही में भोपाल जिला कोर्ट में पेश की गई हनी ट्रैप केस से जुड़ी मानव तस्करी की चार्जशीट से कई राज खुले हैं. बता दें कि जिस किशोरी को मानव तस्करी का शिकार बनाया गया, उसने आरोपी महिलाओं के मायाजाल की पूरी कहानी बयान कर दी है.

हनी ट्रैप गैंग की आरोपी महिला श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्लिन जैन, आरती दयाल और बरखा सोनी अपने ड्राइवर अभिषेक ठाकुर की मदद से सुनियोजित तरीके से मिडिल क्लास लड़कियों को महंगी लाइफ स्टाइल और आर्थिक मदद का झांसा देकर अपने जाल में फंसाती थीं.
गैंग की आरोपी महिलाओं का ड्राइवर अभिषेक ठाकुर मिडिल क्लास लड़कियों से संपर्क करता था. वह लड़कियों को एनजीओ में जॉब दिलाने का झांसा देता था. अभिषेक के झांसे में आने के बाद लड़कियों को गैंग की आरोपी महिला आरती दयाल से मिलाया जाता था और वह लड़कियों को उनकी आगे की पढ़ाई का खर्चा उठने के साथ कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच देती थी.
आरोपी आरती दयाल झांसे में आई लड़कियों को अयोध्या नगर स्थित अपने फ्लैट में रखती थी. इसी फ्लैट पर दूसरी महिला आरोपी श्वेता विजय जैन आती थी और लड़कियों को गैंग के वास्तविक काम के बारे में बताया जाता था और उन्हें समझाया जाता था कि यदि पैसे वाले हमारा या हम जैसी औरतों का दैहिक शोषण करते हैं तो उनको ब्लैक मेल कर उनसे पैसा लेना कोई गलत काम नहीं है.
गैंग के झांसे में आई पीड़ित किशोरी जैसी कई लड़कियों के पहले अश्लील फोटो लिए जाते थे. इन फोटो को फिर बड़े लोगों को फंसाने के लिए भेजा जाता था. इन्हीं फोटो के जरिए शिकार खुद गैंग के पास पहुंच जाता था और फिर होटल में इन बड़े लोगों की सीडी बनाई जाती थी.
यदि कोई लड़की वापस इस दलदल से निकलना चाहती है, तो ये गैंग उसे जाने नहीं देता था. पीड़ित लड़की भी अपने गांव चली गई थी, लेकिन आरोपी आरती दयाल उसे इस गोरखधंधे में वापस लेकर आ गई. होटलों के अलावा अयोध्या नगर स्थित आरती दयाल के फ्लैट पर ग्राहकों को फंसाने के लिए बुलाया जाता था.
आरोपी श्वेता को पता होता था कि कौन सा अधिकारी वीडियो बनने के बाद डर जाएगा और आसानी से पैसा दे देगा. आरती से वीडियो लेने के बाद श्वेता वह वीडियो एक पत्रकार को दे देती थी. पत्रकार ही पैसों का पूरा सेटलमेंट कराता था.
ड्राइवर अभिषेक ठाकुर श्वेता जैन की फैक्ट्री में भी काम करता था. वह गलत कामों में भी श्वेता जैन का साथी है. अभिषेक ही आरती दयाल और मिडिल क्लास लड़कियों के अलग-अलग नामों से आधार कार्ड बनवाता था.
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