Honey Trap केस : STF एडीजी विपिन माहेश्वरी बनाए गए SIT के नये चीफ, राजेन्द्र कुमार रिटायर
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Honey Trap केस : STF एडीजी विपिन माहेश्वरी बनाए गए SIT के नये चीफ, राजेन्द्र कुमार रिटायर
उनकी टीम में कौन-कौन अधिकारी शामिल होंगे, उन नामों का अभी खुलासा नहीं किया गया है

हनीट्रैप (Honey Trap) की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था. कई चीफ बदलने के बाद राजेंद्र कुमार को ये ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी.उनके रिटायर होने के बाद इस पद की दौड़ में एसआईटी के सदस्य एडीजी मिलिंद का कानस्कर और स्पेशल डीजी अरुणा मोहन राव शामिल थे.

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भोपाल.मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सबसे बहुचर्चित हनी ट्रैप (Honey Trap) केस की जांच कर रहे SIT को फिर नया चीफ मिल गया है. इस बार एडीजी विपिन माहेश्वरी इसके चीफ होंगे. गृह विभाग ने नए चीफ के लिए आदेश भी जारी कर दिए हैं.

कमलनाथ सरकार में हनी ट्रैप केस की जांच के लिए गठित किए गए एसआईटी के कई चीफ बदले गए थे. अब बीजेपी सरकार में मौजूदा एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार के रिटायर होने की वजह से नया चीफ बनाया गया है. एसआईटी के नये चीफ विपिन महेश्वरी होंगे, उनकी टीम में कौन-कौन अधिकारी शामिल होंगे, उन नामों का अभी खुलासा नहीं किया गया है. विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि एसआईटी के सदस्यों को लेकर अलग से आदेश जारी किए जाएंगे.

दौड़ में थे ये अफसर
हनीट्रैप की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था. कई चीफ बदलने के बाद राजेंद्र कुमार को ये ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी.उनके रिटायर होने के बाद इस पद की दौड़ में एसआईटी के सदस्य एडीजी मिलिंद का कानस्कर और स्पेशल डीजी अरुणा मोहन राव शामिल थे. राव एसआईटी की सदस्य नहीं हैं.  बताया जा रहा था कि राव का नाम सबसे आगे था. लेकिन अचानक गृह विभाग ने विपिन माहेश्वरी को एसआईटीसी चीफ बनाकर सबको चौंका का दिया.
लिफाफे में थे 40 रसूखदारों के नाम


एसआईटी चीफ राजेन्द्र कुमार ने रिटायर होने से पहले पिछले महीने एक बंद लिफाफा हाईकोर्ट को सौंपा था. इसमें रसूखदार उन 40 'शौकीनों' के नाम हैं, जिनके तार  हनीट्रैप से जुड़े हैं. इनमें एक पूर्व मंत्री सहित कई बड़े अफसर, दो रिटायर्ड एडीशनल चीफ सेक्रेट्री और कई मौजूदा अफसर शामिल हैं. पुलिस मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक में इन नामों की चर्चा हो रही थी. सूत्रों ने बताया कि इनमें कई राजनेता और आईएएस और आईपीएस अफसर शामिल हैं.

ये है पूरा मामला
हनीट्रैप खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय ने सबसे पहले एसआईटी का गठन किया था. इसका पहला चीफ आईजी डी श्रीनिवास वर्मा को बनाया गया था. लेकिन 24 घंटे के अंदर ही उन्हें हटा दिया गया और एडीजी संजीव शमी को कमान सौंपी गई. संजीव शमी के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ पाती उससे पहले ही सरकार ने राजेंद्र कुमार को एसआईटी चीफ बना दिया. राजेंद्र कुमार की टीम में एडीजी मिलिंद कानस्कर, तत्कालीन डीआईजी इंदौर रुचि वर्धन मिश्रा शामिल थीं. बार-बार एसआईटी चीफ बदले जाने पर हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए थे कि कोर्ट की अनुमति के बिना एसआईटी में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा. अब नए एसआईटी चीफ बनाने की सूचना हाईकोर्ट को दी गई है.
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