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सस्पेंस थ्रिलर की तरह था शेहला मसूद हत्याकांड, सीबीआई ने ऐसे किया था कातिलों का पर्दाफाश

सस्पेंस थ्रिलर की तरह था शेहला मसूद हत्याकांड, सीबीआई ने ऐसे किया था कातिलों का पर्दाफाश

आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या बॉलीवुड के किसी सस्पेंस थ्रिलर की तरह ही थी. जानलेवा इश्क, जलन, जिंदगी में कुछ ऊंचा मुकाम हासिल करने का मंसूबा और सत्ता से नजदीकी रिश्तें. इस हत्याकांड का हर किरदार अपने आप में रहस्य से भरा हुआ था.  सारे किरदारों ने मिलकर एक ऐसा क्राइम सीन क्रिएट किया, जिसे पुलिसिया भाषा में 'परफेक्ट मर्डर' कहा जाता है.

आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या बॉलीवुड के किसी सस्पेंस थ्रिलर की तरह ही थी. जानलेवा इश्क, जलन, जिंदगी में कुछ ऊंचा मुकाम हासिल करने का मंसूबा और सत्ता से नजदीकी रिश्तें. इस हत्याकांड का हर किरदार अपने आप में रहस्य से भरा हुआ था. सारे किरदारों ने मिलकर एक ऐसा क्राइम सीन क्रिएट किया, जिसे पुलिसिया भाषा में 'परफेक्ट मर्डर' कहा जाता है.

आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या बॉलीवुड के किसी सस्पेंस थ्रिलर की तरह ही थी. जानलेवा इश्क, जलन, जिंदगी में कुछ ऊंचा मुकाम हासिल करने का मंसूबा और सत्ता से नजदीकी रिश्तें. इस हत्याकांड का हर किरदार अपने आप में रहस्य से भरा हुआ था. सारे किरदारों ने मिलकर एक ऐसा क्राइम सीन क्रिएट किया, जिसे पुलिसिया भाषा में 'परफेक्ट मर्डर' कहा जाता है.

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    आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या बॉलीवुड के किसी सस्पेंस थ्रिलर की तरह ही थी. जानलेवा इश्क, जलन, जिंदगी में कुछ ऊंचा मुकाम हासिल करने का मंसूबा और सत्ता से नजदीकी रिश्तें. इस हत्याकांड का हर किरदार अपने आप में रहस्य से भरा हुआ था. कोई नेता का करीबी था तो कोई जुर्म की दुनिया का बेताज बादशाह. सारे किरदारों ने मिलकर एक ऐसा क्राइम सीन क्रिएट किया, जिसे पुलिसिया भाषा में 'परफेक्ट मर्डर' कहा जाता है.

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो महिलाओं और एक राजनेता से शुरू हुई यह कहानी चार आरोपियों को उम्रकैद और एक शख्स को क्षमा दान के साथ एक पड़ाव पर पहुंच गई. हालांकि, यहां तक का सफर सीबीआई के लिए आसान नहीं रहा.  इश्क में जुनून और जज्बाती होकर मर्डर की साजिश की यह कहानी छह महीने तक एक रहस्य बनी थी.

    न्यूज 18 हिंदी आज आपको बताने जा रहा है कि एक वक्त देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री को सॉल्व करने में सीबीआई को कैसे परंपरागत तरीके से जांच, खुफिया जानकारी और नई टेक्नोलॉजी एवं मनोवैज्ञानिक तरीकों का सहारा लेना पड़ा था. जिसके बाद आरोपियों की साजिश को बेनकाब किया जा सका था.

    पांच आरोपी

    जाहिदा परवेज... सजा... उम्रकैद
    सबा फारूखी... सजा.... उम्रकैद
    शाकिब डेंजर... सजा... उम्रकैद
    ताबिश........ सजा... उम्रकैद
    इरफान....... सरकारी गवाह... क्षमा दान

    सीबीआई के लिए कातिल तक पहुंचना आसान नहीं था. सीबीआई को काफी पापड़ बेलने पड़े थे, जिसके बाद एक-एक कर बेहद शातिर तरीके से रची गई इस साजिश की परत दर परत खुलती गई.

    शहला का मर्डर 16 अगस्त 2011 को हुआ था. तीन दिन बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी. देश की सर्वश्रेष्ठ एजेंसी ने सितंबर के पहले सप्ताह में काम शुरू कर दिया. शुरूआत में सीबीआई को कोई सुराग हाथ नहीं लगा. फिर एक हवलदार के दिए नंबर ने सीबीआई का काम आसान कर दिया. जानते है सीबीआई की जांच से जुड़ी हर अहम बात.

    -हत्याकांड की जांच में शुरूआत में कोई सबूत हाथ नहीं लगा तो कॉल डिटेल पर सारा फोकस केंद्रित किया गया.
    -घटनास्थल के आसपास मोबाइल टॉवर लोकेशन के आधार पर 10 लाख फोन नंबरों का रिकॉर्ड सामने आ गया. 10 लाख नंबरों को खंगालकर 90 नंबर संदिग्ध मानकर जांच शुरू की गई, फिर भी सीबीआई के हाथ कुछ नहीं लगा.
    -हत्या के एक दिन पूर्व भाजपा विधायक ध्रुव नारायण से शेहला की लंबी बातचीत हुई थी, जिसकी वजह से वह भी शक के दायरे में आ गए थे.
    -भाजपा और आरएसएस से जुड़े तरुण विजय का नाम भी इस हत्याकांड की वजह से सुर्खियों में रहा. बताते हैं कि हत्याकांड के पूर्व दो महीने के दरमियान शेहला से उनकी फोन पर कई बार बातचीत हुई थी. ऐसे में हाई प्रोफाइल होते गए इस मामले में सीबीआई को एक भी सिरा पकड़ में नहीं आ रहा था.
    -सीबीआई को मर्डर मिस्ट्री में भोपाल पुलिस के एक हवलदार ने अहम सुराग दिया. उसने पुलिस को एक नंबर दिया, जिस पर हत्याकांड में शामिल एक आरोपी शाकिब डेंजर कुछ लोगों से बात करता था.
    -ये वो नंबर था जिससे शाकिब और जाहिदा के बीच बात होती है. वो नंबर शाकिब के दोस्त शाहिद और उसकी पत्नी के नाम पर थे.
    - शाकिब को भनक नहीं लग जाए इसलिए सीबीआई की एक टीम शाहिद के घर टेलीकॉम अफसर बनकर पहुंची थी.
    -इसके बाद ही शाकिब डेंजर को पता चल गया कि उसका खेल खत्म हो गया. उसने 28 फरवरी 2012 को दिल्ली स्थित सीबीआई के दफ्तर में जाकर सरेंडर किया था.
    -सीबीआई ने जाहिदा परवेज को गिरफ्तार किया, तो उसका गुनाह साबित करना आसान नहीं हुआ. सीबीआई को जाहिदा की एक डायरी मिली, जिसमें मर्डर वाले दिन यानी 16 अगस्त 2011 को उसने खुश होने के अंदाज में लिखा था....और इंतकाम पूरा हुआ. वाह...मैंने गोली की आवाज सुनी....’
    -जाहिदा ने इस सबूत को गलत साबित करने के लिए अपनी हैंडराइटिंग बदल ली, जिसके बाद हैंड राइटिंग एनालिसिस ने तोड़-मरोड़कर लिखें गए शब्दों के जरिए सैंपल का मिलान किया. यह डायरी इस कत्ल में आरोपियों को सजा दिलाने में अहम सबूत साबित हुई.
    -जाहिदा एवं सबा (जाहिदा की सहेली) का जब सीबीआई ने सायको एनालिसिस टेस्ट कराया तो उसमें दोनों फेल हो गईं. इसके बाद पॉलीग्राफ टेस्ट से उन्होंने इंकार कर दिया.
    -वहीं,आरोपियों ने सीबीआई को गुमराह करने के लिए जिस कट्टे से गोली मारी गई थी, उसकी नाल घिस दी. इस वजह से मिलान में यह साबित करना बड़ी चुनौती साबित हुआ कि गोली इसी कट्टे से चलाई गई थी.
    -शेहला मसूद हत्याकांड को सुलझाने की टीम का नेतृत्व कर रहे तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर केशव कुमार कातिल की मानसिकता समझने के लिए डेढ़ से दो महीने तक पुराने अपराधियों के साथ लंबी बैठक की, फिर भी कोई सुराग हाथ नहीं लगाा.
    -आखिरकार कोहेफिजा पुलिस के स्टाफ की मदद ली गई. इसी थाना क्षेत्र के तहत शेहला की हत्या हुई थी. वहां से मिले एक फोन नंबर के बाद सीबीआई ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

     

    Tags: CBI

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