'मिस्टर बंटाधार' इस तरह बने बीजेपी को उसके गढ़ में चुनौती देने वाले कांग्रेस के सबसे मजबूत दावेदार

दिग्विजय सिह (फाइल फोटो)
दिग्विजय सिह (फाइल फोटो)

विधानसभा चुनाव 2018 में दिग्विजय सिंह भले ही परदे के पीछे रहे, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह कहा जाता था कि दिग्विजय सिंह को शांत रखना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा.

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  • Last Updated: March 25, 2019, 6:04 PM IST
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एक समय मध्य प्रदेश राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले दिग्विजय सिंह के बारे में यह मशहूर था कि आप उनसे नफरत कर सकते हैं, लेकिन आप उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते. दस साल तक प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने के बाद 2003 में उन्हें भले ही बंटाधार का तमगा मिला हो लेकिन 2018 विधानसभा चुनाव और फिर 2019 में लोकसभा चुनाव आते-आते उन्होंने अपनी राजनीतिक उपयोगिता साबित कर दी है.

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2019 में उन्हें मध्य प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीट भोपाल से कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है. विधानसभा चुनाव 2018 में दिग्विजय सिंह भले ही परदे के पीछे ही रहे हों लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह कहा जाता था कि दिग्विजय सिंह को शांत रखना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं पर दिग्विजय की मजबूत पकड़ है.

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नर्मदा यात्रा ने बदली दिग्विजय की राजनीति
विधानसभा चुनाव 2018 से पहले दिग्विजय सिंह ने राजनीति से ब्रेक लेकर नर्मदा यात्रा की. उस दौरान ये कयास लगाए जा रहे थे कि दिग्विजय सिंह अब सक्रिय राजनीति से भी संन्यास ले लेंगे. लेकिन, यात्रा के दौरान पूरे मध्य प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उनका सीधा जुड़ाव हुआ. वह जहां भी जाते और रुकते वहां स्थानीय लोगों की भीड़ लगी रहती थी. इसका परिणाम भी कहीं न कहीं कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में देखने को मिला.

कमलनाथ से बेहतर संबंध
जिस दिन दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा खत्म हुई थी उस दिन नर्मदा घाट पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे कमलनाथ ने कहा था, 'आज मेरे भाई ने बहुत बड़ा काम करके दिखाया है.' इसके बाद पूरे विधानसभा चुनाव में वह कमलनाथ की रणनीतिक टीम के केंद्र बिंदु बने रहे. इतना ही नहीं कमलनाथ और उनके मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद भोपाल के कांग्रेस मुख्यालय में जब मंत्रियों की मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ पहली बैठक हुई तो उसमें दिग्विजय सिंह कमलनाथ के बगल वाली कुर्सी पर ही बैठे दिखाई दिए.

भोपाल सीट पर कांग्रेस को थी मजबूत चेहरे की तलाश
मध्य प्रदेश की 29 सीटों पर लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस आलकमान ने कमलनाथ पर ही भरोसा दिखाया है. कमलनाथ ने राहुल गांधी की भोपाल रैली में संकेत दे दिए थे कि लोकसभा चुनाव में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी. और इसीलिए एमपी की सभी सीटों पर कांग्रेस मजबूत उम्मीदवार खड़ी कर रही है.

और इसी रणनीति के तहत बीजेपी की गढ़ कही जाने वाली सीटों पर कमलनाथ विशेष तैयारी के साथ उतर रहे हैं. भोपाल सीट पर यूं तो यह तय था कि किसी बड़े नेता को टिकट दिया जाएगा लेकिन कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से दिल्ली लौटे कमलनाथ ने संकेत दे दिए थे कि भोपाल से दिग्विजय सिंह ही लड़ेंगे.

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